गर्भवती स्त्री pregnancy के लिए पथ्य आहार-विहार------
गर्भधारण होने के पश्चात् ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करना चाहिए। सत्साहित्य का श्रवण एवं अध्ययन, सत्पुरुषों, आश्रमों एवं देवमंदिरों के दर्शन करना चाहिए एवं मन प्रफुल्लित रहे – ऐसी सत्प्रवृत्तियों में रत रहना चाहिए।
गर्भधारण के पश्चात्
#प्रथम #मास बिना औषधि का ठंडा दूध सुबह-शाम पियें। आहार प्रकृति के अनुकूल एवं हितकर करें। दूध भात उत्तम आहार है।
#दूसरे #मास में मधुर औषधि जैसे कि जीवंति, मुलहठी, मेदा, महामेदा, सालम, मुसलीकंद आदि से संस्कारित सिद्ध दूध योग्य मात्रा में पियें तथा आहार हितकर एवं सुपाच्य ले तथा आहार हितकर एवं सुपाच्य लें।
#तीसरे #मास में दूध में शहद एवं घी (विमिश्रण)(शहद घी बराबर मात्रा में कभी न ले ये जहर का काम करता है इस लिए ) डालकर पिलायें तथा हितकर एवं सुपाच्य आहार दें।
#चौथे #मास में दूध में एक तोला मलाई डालकर पिलायें तथा हितकर एवं सुपाच्य आहार दें।
#पाँचवें #मास में दूध एवं घी मिलाकर पिलायें।
#छठे एवं #सातवें #मास में दूसरे महीने की तरह औषधियों से सिद्ध किया गया दूध दें एवं घी खिलायें।
शरीर में रक्त बनाने के लिए प्राणियों के खून से बनी ऐलोपैथिक केप्सूल अथवा सिरप लेने के स्थान पर सुवर्णमालती, रजतमालती एवं च्यवनप्राश का रोज सेवन करना चाहिए एवं दशमूल का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए।
1 ग्लास अनार के रस में 1 ग्राम खाने का चूना मिला कर 3 महीने सेवन करे फिर 1 महीने का गेप फिर 3 महीने सेवन करे खाली पेट फिर 1 घण्टे कुछ न खाए
ये चूना पान वाले पे या पंसारी की दूकान में 2 रु का पैकेट के रूप में मिले गा
ये आप के शरीर में आयरन कैल्शिम की कमी को दूर करे गा
बाजार की सभी एबीसीडी ब्रांड वाली गोलियों से 100000 गुना ज्यादा बेहतर व सस्ता
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इस पोस्ट में घी का मतलब केवल देशी गाय के देशी घी से है बाजार के घी से कोई आशय नही है
जिसे चाहिए वो नजदीकी गौ शाळा से सम्पर्क करे या मुझे बताए
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नोट-- पथरी के मरीज चुना न ले
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