Friday, November 29, 2013

USES OF AWLA { Gooseberry. (phyllanthus emlica) }

आंवले के प्रयोग - ------ 

 गर्मी से बचाव : -गर्मी में आंवले का शर्बत पीने से बार-बार प्यास नहीं लगती तथा गर्मी के रोगों से बचाव होता है स्वप्नदोष : -
 * एक मुरब्बे का आंवला नित्य खाने से लाभ होता है।
 * एक कांच के गिलास में सूखे आंवले 20 ग्राम पीसकर डालें। इसमें 60 ग्राम पानी भरें और फिर 12 घंटे भीगने दें। फिर छानकर इस पानी में 1 ग्राम पिसी हुई हल्दी डालकर पीएं। यह युवकों के स्वप्नदोष (नाइटफाल) के लिए बहुत ही उपयोगी है। 
पुराना बुखार : -मूंग की दाल में सूखा आंवला डालकर पकाकर खाएं।
 खूनी बवासीर : -सूखे आंवले को बारीक पीसकर एक चाय का चम्मच सुबह-शाम 2 बार छाछ या गाय के दूध से लेने से खूनी बवासीर में लाभ होता है। 
खून की कमी : - * आंवले का चूर्ण 3 से 6 ग्राम प्रतिदिन शहद के साथ लेने से खून में वृद्धि होती है।
 * खून की कमी के रोगी को एक चम्मच आंवले का चूर्ण और 2 चम्मच तिल के चूर्ण लेकर शहद के साथ मिलाकर खिलाने से एक महीने में ही रोग में लाभ होता है। 
 पाचन-शक्तिवर्धक : - खाने के बाद 1 चम्मच सूखे आंवले के चूर्ण की फंकी लेने से पाचन-शक्ति बढ़ती है, मल बंधकर आता है। 
 शक्तिवर्धक : -पिसा हुआ आंवला 1 चम्मच, 2 चम्मच शहद में मिला कर चाटें, ऊपर से दूध पीएं। इससे सदा स्वास्थ्य अच्छा रहता है। दिनभर प्रसन्नता का अनुभव होता है। जब ताजे आंवले मिलते हो तो सुबह आधा कप आंवले के रस में 2 चम्मच शहद आधा कप पानी मिला कर पीएं। ऊपर से दूध पीएं। इससे थके हुए ज्ञान-तंतुओं को उत्तम पोषण मिलता है। कुछ ही दिन नित्य पीने पर शरीर में नई शक्ति और चेतना आयेगी जीवन में यौवन की बहार आयेगी। जो लोग स्वस्थ रहना चाहते है, उन्हें इस प्रकार आंवले का रस नित्य पीना चाहिए। 

स्मरणशक्ति बढ़ाने के लिए : -प्रतिदिन सुबह आंवले का मुरब्बा खाएं। 
 नेत्र-शक्ति बढ़ाने के लिए : -आंवले के सेवन से आंखों की दृष्टि बढ़ती है। 250 ग्राम पानी में 6 ग्राम सूखे आंवले को रात को भिगो दें। प्रात: इस पानी को छानकर आंखें धोयें। इससे आंखों के सब रोग दूर होते हैं और आंखों की दृष्टि बढ़ती है। सूखे आंवले के चूर्ण की 1 चाय की चम्मच की फंकी रात को पानी से लें।

 कटने से खून निकलने पर : -कटे हुए स्थान पर आंवले का ताजा रस लगाने से खून निकलना बंद हो जाता है।

LOOSE YOUR WEIGHT WITHOUT SPEND A SINGLE RUPEE/DOLLER

पानी पीने के इस तरीके को अपनाकर मोटापे से छुटकारा पाएं हमेशा के लिए 

____________________________________________________ (मोटापा घटाने का सबसे सरल और मुफ्त का उपाय) प्रभात काल में जल्दी उठकर, बिना मुँह धोये हुए बिना ब्रश किये हुए करीब सवा लीटर (चार बड़े गिलास) ताजा पानी पियें। पानी आराम से बैठ कर धीरे धीरे घूँट घूँट करके पीए और पानी ठण्डा न हो (फ्रिज या बर्फ का पानी कभी ना पियें) सर्दियों में हल्का गुनगुना पानी उपयोग कर सकते हैं। तदनन्तर 45 मिनट तक कुछ भी खायें-पियें नहीं। पानी पीने के बाद मुँह धो सकते हैं, ब्रश कर सकते हैं। यह प्रयोग चालू करने के बाद सुबह में अल्पाहार के बाद, दोपहर को एवं रात्रि को भोजन के बाद कम से कम डेढ़ घण्टे बीत जाने पर पानी पियें और जब भी पानी पियें तो घूँट घूँट करके ही पियें। रात्रि के समय सोने से पहले कुछ भी खाये नहीं। बीमार एवं बहुत ही नाजुक प्रकृति के लोग एक साथ चार गिलास पानी नहीं पी सकें तो वे पहले एक या दो गिलास से प्रारंभ करें और बाद में धीरे-धीरे एक-एक गिलास बढ़ाकर चार गिलास पर आ जायें। फिर नियमित रूप से चार गिलास पीते रहें। ऐसा कुछ दिन करने से मोटापे से ग्रसित व्यक्ति का वजन कम हो जाता है| यह मोटापा घटाने का सबसे सरल और मुफ्त का उपाय है

Saturday, November 23, 2013

USES OF TURMERIC (HALDI)

• हल्दी : Turmeric इस दृव्य को सभी भारतीय , भोज्य पदार्थ के रूप में प्रयोग करते हैं आयुर्वेद में इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं घरेलू उपचार में इसे प्रयोग करते हंर बाहरी उपचार में इसे प्रयोग करते हैं सूखी हल्दी का चूर्ण • . हल्दी के विभिन्न भाषाओं में नाम संस्कृत : हरिद्रा , कांचनीं , वरवर्णिनीं , पीता बंगला : हलुद , हरिद्रा मराठी : हलद गुजराती : हलदर कन्नड़ : अरसीन तेलुगू : पासुपु फारसी : जरदपोप अरबी : डरूफुस्सुकुर English : Turmeric Latin : Curcuma Longa, Curcuma Domestica •
 हल्दी के प्रकार हल्दी दो प्रकार की होती है , एक लम्बी तथा दूसरी गोल लम्बी हल्दी गोल हल्दी • हल्दी परिचय :1 यह खेतों में बोई जाती है , लेकिन कई स्थानों में यह स्वयमेव उतपन्न हो जाती है जमीन के नीचे कन्द के रूप में इसकी जड़ें होती है ये कन्द रूपी जड़ें हरी अथवा ताजी अथवा कच्ची हल्दी होती है •

 हल्दी परिचय : 2 कच्ची हल्दी की सब्जी बनाकर खाते हैं कच्ची हल्दी को सुखा लेते हैं या उबालकर सुखा लेते हैं , ऐसी हल्दी सूखने के बाद रंग परिवर्तन होकर पीला रंग ग्रहण कर लेती है • हल्दी के रासायनिक तत्व हल्दी में कई प्रकार के रासायनिक तत्व पाये जाते हैं एक प्रकार का सुगंधित उडंनशील तैल 1 प्रतिशत एक प्रकार का गोंद जैसा पदार्थ एक प्रकार का पीले रंग का रंजक पदार्थ एक प्रकार का गाढा तेल • कुछ आधुनिक तथ्य वैज्ञानिकों का कहना है कि हल्दी में लौह तत्व पाया गया है इसमें विटामिन बी ग्रुप के कुछ तत्व पाये गये हैं • विश्लेषण में पाये गये तत्व - 1 हल्दी में पाये गये आवश्यक तत्व निम्न प्रकार हैं जल 13.1 % ग्राम प्रोटीन 6.3 % ग्राम वसा 5.1 % ग्राम खनिज पदार्थ 3.5 % ग्राम रेशा 2.6 % ग्राम कारबोहाइड्रेट 69.4 % ग्राम • विश्लेषण में पाये गये तत्व - 2 कैल्शियम 150 मिलीग्राम प्रतिशत फासफोरस 282 मिलीग्राम प्रतिशत लोहा 15 मिलीग्राम प्रतिशत विटामिन ए 50 मिलीग्राम प्रतिशत विटामिन बी 03 मिलीग्राम प्रतिशत कैलोरियां प्रति 100 ग्राम में : 349 कैलोरी • हल्दी के गुण -1 आयुर्वेद में हल्दी के गुणों का वर्णन कई ग्रंथों में मिलता है हल्दी स्वाद में चरपरी , कड़वी प्रभाव में रूखी और गर्म होती है यह कफ तथा पित्त दोषों को दूर करती है • हल्दी के गुण -2 इसे त्वचा के रोग , वर्ण , प्रमेह , रक्त विकार , सूजन , पान्डु रोग और घावों के इलाज के लिये प्रयोग करते हैं आधुनिक शोधों से पता चला है कि हल्दी तमाम प्रकार के रोगों को दूर करनें में सहायक है • हल्दी के बारे में आयुर्वेद विचार हल्दी तिक्त , कटु , उष्णवीर्य , रूक्ष , वर्ण्य , लेखन , कुष्टघ्न , विषघ्न , शोधन गुण युक्त है इसके प्रयोग से कफ , पित्त , पीनस , अरूचि , कुष्ठ , कन्डू , विष , प्रमेह , व्रण , कृमि , पान्डु रोग , अपची आदि रोंग दूर होते हैं 

• हल्दी के बारे में आधुनिक विचार हल्दी के बारे में आधुनिक वैज्ञानिकों नें परीक्षण करके सिद्ध किया है कि यह कैंसर को बढ़नें से रोकती है यह गठिया जैसे रोंगों की पीड़ा को दूर करती है • हल्दी की औषधीय मात्रा कच्ची हल्दी का रस : 1 से 3 चाय चम्मच तक सूखी हल्दी का चूर्ण : 1 ग्राम से 4 ग्राम तक यह वयस्क व्यक्ति के लिये निश्चित की गयी मात्रा है किशोंरों के लिये 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम तक बच्चों के लिये 50 मिलीग्राम से 100 मिली ग्राम तक • हल्दी की मात्रा इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं और हल्दी पूर्ण रूप से सुरक्षित औषधि है इसे आवश्यकतानुसार गुनगुनें पानीं , गरम चाय अथवा दूध के साथ दिन मे , तकलीफ के हिसाब से , एक बार से लेकर चार या पांच बार तक ले सकते हैं

 • हल्दी के बाहरी प्रयोग - 1 त्वचा के रोगों में हल्दी का बाहरी प्रयोग करते हैं हल्दी का चूर्ण 1 ग्राम और आवश्कतानुसार दूध मिलाकर बनाया हुआ पेस्ट मुहासों , युवान पीडिका , सफेद दागों या काले दागों , रूखी त्वचा , काले रंग के त्वचा के धब्बे , खुजली , खारिश आदि तकलीफों में लगानें से आरोग्य प्राप्त होता है घाव , कटे एवं पके हुये , पीब से भरे घावों में हल्दी का चूर्ण छिड़कनें से घाव शीघ्र भरते हैं

 • हल्दी के बाहरी प्रयोग -2 चाकू या धारदार अस्त्र से शरीर का कोई अंग कट जानें पर हल्दी का चूर्ण छिड़कनें से लाभ प्राप्त होता है बवासीर के मस्सों का दर्द अथवा जलन ठीक करनें के लिये हल्दी का चूर्ण मस्सों पर छिड़कना चाहिये

 • हल्दी के बाहरी प्रयोग -3 चेहरे का सौंदर्य , त्वचा का सौंदर्य निखारनें के लिये हल्दी का उबटन प्रयोग करना चाहिये एलर्जी , शीतपित्ती , जलन का अनुभव , ददोरे आदि पड़ जानें की तकलीफ में हल्दी को पानी के साथ पेस्ट जैसा बनाकर लगानें से आराम मिलता है 

• हल्दी के बाहरी प्रयोग -4 फोड़ा फुन्सी पकानें के लिये हल्दी की पुल्टिस रखनें से फोड़ा फुंसी शीघ्र पक जाते हैं शरीर के किसी भी स्थान की सूजन के साथ दर्द और जलन हो तो हल्दी के पेस्ट का बाहरी प्रयोग करनें से इन तकलीफों में आम मिल जाती है

 • आंतरिक प्रयोग - जुखाम , खांसी , बुखार सभी प्रकार के बुखार , जुखामों और खांसियों में हल्दी का चूर्ण 1 से 3 ग्राम तक गरम पानीं से दिन में दो बार , सुबह शाम , खानें से आरोग्य प्राप्त होता है जुकाम , बुखार अथवा खांसी कैसी भी हो , नया हो अथवा पुराना , उक्त प्रकार से हल्दी का सेवन करनें से सभी अवश्य ठीक हो जाते हैं 

• आंतरिक प्रयोग - साइनुसाइटिस नाक से संबंधित सभी तरह की तकलीफों , पुराना जुकाम , पीनस , नाक का गोश्त बढ़ जानें , साइनुसाइटिस में हल्दी का चूर्ण 1 से 2 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार खाने से आरोग्य प्राप्त होता है उक्त तकलीफों से होनें वाले सिर दर्द , बुखार , बदन दर्द आदि लक्षण ठीक हो जाते हैं 

• आंतरिक प्रयोग - एलर्जी एलर्जी , शीतपित्ती या इसी तरह के लक्षणों और तकलीफों से परेशान रोगी हल्दी का चूर्ण , 1 से 2 ग्राम , सुबह और शाम , दिन में दो बार , आधा कप दूध और आधा कप पानी मिलाकर , इस प्रकार से पकाये दूध के साथ खानें से आरोग्य प्राप्त होता है दूध में यदि चाहें तो थोड़ी शक्कर स्वाद के लिये मिला सकते हैं • इस्नोफीलिया इस्नोफीलिया में हल्दी का प्रयोग बहुत सटीक है 2 से 3 ग्राम हल्दी चूर्ण गुनगुनें पानीं से , दिन में तीन बार , खानें से इस रोग में आराम मिलती है कुछ दिनों तक लगातार खानें से रोग समूल नष्ट हो जाते हैं जैसे जैसे इसनोफीलिया का काउन्ट कम होता जाये , वैसे हल्दी की मात्रा अनुपात में घटाते जाना चाहिये 

• दमा और अस्थमा में इस रोग में हल्दी का चूर्ण 2 से 3 ग्राम तक अदरख के एक या दो चम्मच रस और शहद मिलाकर दिन में चार बार खानें से आरोग्य प्राप्त होता है कुछ दिनों तक यह प्रयोग लगातार काना चाहिये अगर रोगी एलापैथी की दवायें खा रहा है , तो भी यह प्रयोग कर सकते हैं जैसे जैसे आराम मिलता जाय , एलापैथी दवाओं की मात्रा कम करते जांय 

• यकृत प्लीहा की बीमारियों में यकृत की बीमारियों में हल्दी का उपयोग आदि काल से किया जा रहा है यकृत के सभी विकारों में , पीलिया , पान्डु रोग इत्यादि में हल्दी का चूर्ण 1 ग्राम , कुटकी का चूर्ण 500 मिलीग्राम मिलाकर दिन में तीन बार सादे पानीं के साथ खाना चाहिये प्लीहा की सभी बीमारियों में उक्त चूर्ण मिश्रण खाना चाहिये 

• प्रमेह प्रमेह रोग से संबंधित सभी विकारों में हल्दी का उपयोग बहुत सटीक है बहुमूत्र , गंदा पेशाब , पेशाब में जलन , पेशाब की कड़क , पेशाब में एल्बूमेंन जाना , पेशाब में रक्त , पीब के कण आदि आदि रोगों में हल्दी चूर्ण 1 ग्राम दिन में चार बार सादे पानीं से सेवन करें अगर इन बीमारियों में कोई एलोपैथी की दवा खा रहे हों , तो उनके साथ हल्दी का उपयोग करें , शीघ्र लाभ होगा 

• मधुमेह हल्दी 2 ग्राम , जामुन की गुठली का चूर्ण 2 ग्राम , कुटकी 500 मिलीग्राम मिलाकर दिन में चार बार सादे पानीं से खायें पथ्य , परहेज करें , कई हफ्तों तक औषधि प्रयोग करें मधुमेह के साथ जिनको पैंक्रियाटाइटिस , यकृत प्लीहा विकार , गुर्दे के विकार , आंतों से संबंधित विकार हों , ये सभी तकलीफें दूर होंगी 

• शास्त्रोक्त प्रयोग हल्दी के शास्त्रोक्त प्रयोग बड़ी संख्या में आयुर्वेद के चिकित्सा ग्रंथों में मिलते हैं इनमें से बहुत से प्रयोग तमाम प्रकार की बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल किये जाते हैं

 • सलाह अगर आप कोंई एलोपैथी की दवा खा रहे हैं या होम्योपैथिक या कोई अन्य उपचार कर रहे हैं , तो भी , आप हल्दी का प्रयोग कर सकते हैं हल्दी के प्रयोग करनें से , उपचार पर , कोई असर नहीं पड़ता है हल्दी के प्रयोग से , किये जा रहे उपचार , अधिक प्रभावकारी हो जाते हैं

Friday, November 22, 2013

ABUSES OF REFIND OIL

आज से 50 साल पहले तो कोई रिफाइन तेल के बारे में जानता नहीं था, ये पिछले 20 -25 वर्षों से हमारे देश में आया है | कुछ विदेशी कंपनियों और भारतीय कंपनियाँ इस धंधे में लगी हुई हैं | इन्होने चक्कर चलाया और टेलीविजन के माध्यम से जम कर प्रचार किया लेकिन लोगों ने माना नहीं इनकी बात को, तब इन्होने डोक्टरों के माध्यम से कहलवाना शुरू किया | डोक्टरों ने अपने प्रेस्क्रिप्सन में रिफाइन तेल लिखना शुरू किया कि तेल खाना तो सफोला का खाना या सनफ्लावर का खाना, ये नहीं कहते कि तेल, सरसों का खाओ या मूंगफली का खाओ, अब क्यों, आप सब समझदार हैं समझ सकते हैं |

ये रिफाइन तेल बनता कैसे हैं ? मैंने देखा है और आप भी कभी देख लें तो बात समझ जायेंगे | किसी भी तेल को रिफाइन करने में 6 से 7 केमिकल का प्रयोग किया जाता है और डबल रिफाइन करने में ये संख्या 12 -13 हो जाती है | ये सब केमिकल मनुष्य के द्वारा बनाये हुए हैं प्रयोगशाला में, भगवान का बनाया हुआ एक भी केमिकल इस्तेमाल नहीं होता, भगवान का बनाया मतलब प्रकृति का दिया हुआ जिसे हम ओरगेनिक कहते हैं | तेल को साफ़ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं सब Inorganic हैं और Inorganic केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका combination जहर के तरफ ही ले जाता है | इसलिए रिफाइन तेल, डबल रिफाइन तेल गलती से भी न खाएं | फिर आप कहेंगे कि, क्या खाएं ? तो आप शुद्ध तेल खाइए, सरसों का, मूंगफली का, तीसी का, या नारियल का | अब आप कहेंगे कि शुद्ध तेल में बास बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल बहुत चिपचिपा होता है | हमलोगों ने जब शुद्ध तेल पर काम किया या एक तरह से कहे कि रिसर्च किया तो हमें पता चला कि तेल का चिपचिपापन उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है | तेल में से जैसे ही चिपचिपापन निकाला जाता है तो पता चला कि ये तो तेल ही नहीं रहा, फिर हमने देखा कि तेल में जो बास आ रही है वो उसका प्रोटीन कंटेंट है, शुद्ध तेल में प्रोटीन बहुत है, दालों में ईश्वर का दिया हुआ प्रोटीन सबसे ज्यादा है, दालों के बाद जो सबसे ज्यादा प्रोटीन है वो तेलों में ही है, तो तेलों में जो बास आप पाते हैं वो उसका Organic content है प्रोटीन के लिए | 4 -5 तरह के प्रोटीन हैं सभी तेलों में, आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे उसका प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका Fatty Acid गायब | अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं पानी है, जहर मिला हुआ पानी | और ऐसे रिफाइन तेल के खाने से कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं, घुटने दुखना, कमर दुखना, हड्डियों में दर्द, ये तो छोटी बीमारियाँ हैं, सबसे खतरनाक बीमारी है, हृदयघात (Heart Attack), पैरालिसिस, ब्रेन का डैमेज हो जाना, आदि, आदि | जिन-जिन घरों में पुरे मनोयोग से रिफाइन तेल खाया जाता है उन्ही घरों में ये समस्या आप पाएंगे, अभी तो मैंने देखा है कि जिनके यहाँ रिफाइन तेल इस्तेमाल हो रहा है उन्ही के यहाँ Heart Blockage और Heart Attack की समस्याएं हो रही है |

जब हमने सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट किया, सूरजमुखी का तेल, अलग-अलग ब्रांड का टेस्ट किया तो AIIMS के भी कई डोक्टरों की रूचि इसमें पैदा हुई तो उन्होंने भी इसपर काम किया और उन डोक्टरों ने जो कुछ भी बताया उसको मैं एक लाइन में बताता हूँ क्योंकि वो रिपोर्ट काफी मोटी है और सब का जिक्र करना मुश्किल है, उन्होंने कहा "तेल में से जैसे ही आप चिपचिपापन निकालेंगे, बास को निकालेंगे तो वो तेल ही नहीं रहता, तेल के सारे महत्वपूर्ण घटक निकल जाते हैं और डबल रिफाइन में कुछ भी नहीं रहता, वो छूँछ बच जाता है, और उसी को हम खा रहे हैं तो तेल के माध्यम से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी चाहिए वो मिल नहीं रहा है |" आप बोलेंगे कि तेल के माध्यम से हमें क्या मिल रहा ? मैं बता दूँ कि हमको शुद्ध तेल से मिलता है HDL (High Density Lipoprotein), ये तेलों से ही आता है हमारे शरीर में, वैसे तो ये लीवर में बनता है लेकिन शुद्ध तेल खाएं तब | तो आप शुद्ध तेल खाएं तो आपका HDL अच्छा रहेगा और जीवन भर ह्रदय रोगों की सम्भावना से आप दूर रहेंगे |

अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा विदेशी तेल बिक रहा है | मलेशिया नामक एक छोटा सा देश है हमारे पड़ोस में, वहां का एक तेल है जिसे पामोलिन तेल कहा जाता है, हम उसे पाम तेल के नाम से जानते हैं, वो अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहा है, एक-दो टन नहीं, लाखो-करोड़ों टन भारत आ रहा है और अन्य तेलों में मिलावट कर के भारत के बाजार में बेचा जा रहा है | 7 -8 वर्ष पहले भारत में ऐसा कानून था कि पाम तेल किसी दुसरे तेल में मिला के नहीं बेचा जा सकता था लेकिन GATT समझौता और WTO के दबाव में अब कानून ऐसा है कि पाम तेल किसी भी तेल में मिला के बेचा जा सकता है | भारत के बाजार से आप किसी भी नाम का डब्बा बंद तेल ले आइये, रिफाइन तेल और डबल रिफाइन तेल के नाम से जो भी तेल बाजार में मिल रहा है वो पामोलिन तेल है | और जो पाम तेल खायेगा, मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर देने को तैयार हूँ कि वो ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों से मरेगा | क्योंकि पाम तेल के बारे में सारी दुनिया के रिसर्च बताते हैं कि पाम तेल में सबसे ज्यादा ट्रांस-फैट है और ट्रांस-फैट वो फैट हैं जो शरीर में कभी dissolve नहीं होते हैं, किसी भी तापमान पर dissolve नहीं होते और ट्रांस फैट जब शरीर में dissolve नहीं होता है तो वो बढ़ता जाता है और तभी हृदयघात होता है, ब्रेन हैमरेज होता है और आदमी पैरालिसिस का शिकार होता है, डाईबिटिज होता है, ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है |