Wednesday, July 31, 2013

USES OF TURMERIC


यह व्यंजनों के स्वाद में तो इजाफा करती ही है साथ ही इसमें अनेक औषधीय गुण भी होते हैं। त्वचा, पेट और शरीर की कई बीमारियों में हल्दी का प्रयोग किया जाता है। हल्दी का प्रयोग लगभग सभी प्रकार के खाने में किया जाता है। हल्दी के पौधे से मिलने वाली इसकी गांठे ही नहीं बल्कि इसके पत्ते भी बहुत उपयोगी होते हैं। हजारों साल से भारतीय खाने में आवश्यक रूप से इस्तेमाल होने वाली हल्दी सेहत के लिए भी फायदेमंद है। भारतीय लोक कथाओं, संस्‍कृति एवं एरंपराओं में हल्‍दी का इस्‍तेमाल, सदियों से उसके विशिष्‍ट गुणों के चलते विभिन्‍न रूपों में कया जाता रहा है। दादी मां के नुस्‍खों में शारीरिक क्षति जैसे, चोट, मोच, अंदरूनी घाव को ठीक करने, सर्दी जुकाम व खांसी आदि बीमारियों को ठीक करने आदि के अतिरिक्‍त सौंदर्य प्रसाधन, धार्मिक व सामाजिक मांगलिक कार्यक्रमों में हल्‍दी का प्रयोग किया जाता है। आइये और जानते हैं हल्‍दी के स्‍वास्‍थ्‍य और सौदर्य के गुणों के बारे में- स्‍वास्‍थ्‍य और सौंदर्य का खजाना हल्‍दी

1. यह एक प्राकृतिक एंटिसेप्टिक एवं एंटिबैक्टेरियल एजेन्ट है। हल्दी का पावडर जले और कटे अंग पर लगाने से संक्रमण का जोखिम कम हो जाता है।

2. हल्दी को फूलगोभी के साथ मिलाकर खाने से प्रोस्टेट कैंसर की आशंका जाती रहती है। इसके अलावा अगर प्रोस्टेट कैंसर हो तो उसका बढ़ना रुक जाता है।

3. चूहों पर हुए प्रयोग से पता चला है कि हल्दी स्तन कैंसर को फेफड़ों में जाने से रोक देती है।

4. हल्दी से मेलानोमा यानी काले तिल उभरना रुक सकता है। इसके अलावा मौजूद मेलानोमा सेल्स आत्महत्या कर लेते हैं। हल्दी त्वचा का रूप निखारने के लिए सदियों से भारत में इस्तेमाल की जाती रही है।

5. बचपन में होने वाले ल्यूकेमिया यानी रक्तकैंसर का जोखिम कम हो जाता है।
6. लिवर शुद्धि के लिए यह एक प्राकृतिक छन्नी है।

7. हल्दी मस्तिष्क में बनने वाले एम्लोयड प्लॉक की वृद्धि एवं निर्माण रोककर एल्जाइमर्स की बढ़त पर रोकथाम कर लेती है।

8.दमा के मरीजों को दूध में हल्दी चूर्ण मिलाकर सुबह शाम लेना चाहिए।

9.मोच या हड्डी टूट जाने पर हल्दी का लेप लगाएं।

10.हल्दी और गुड़ को मिलाकर खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

11.मुंह में छाले हो जाने पर गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर डालकर कुल्ला करें।

12.दरदरी पिसी हल्दी को ताजी मिलाई के साथ मिलाकर चेहरे व हाथ पर लगाने कर सूखने दें।
गुनगुने पानी से चेहरा धो ले। त्वचा चमक उठेगी।

13.लिवर के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होती है।

14.मासिक के दिनों में पेट दर्द होने पर गरम पानी के साथ हल्दी को लेने से दर्द से राहत मिलती है।

15.प्रतिदिन एक चुटकी हल्दी को खाने से भूख बढ़ती है।

16.हल्दी की गांठ को पानी के साथ मिलाकर पिस लें। नहाने से पहले इसे उबटन की तरह लगाएं। हफ्ते भर में त्वचा में निखार आएगा।

18.चर्म रोग में हल्दी औषधि का काम करती है।

19.बिच्छू, मक्खी जैसे किसी विषैले कीड़े के काटने पर हल्दी का लेप लगाना चाहिए।

२०.दांतों से पीलापन दूर करने के हल्दी में सेंधा नमक व सरसों का तेल मिलाकर दांतों को साफ करें।

हल्दी के औषधीय प्रयोग


सर्दी-खांसी - हल्दी के टुकड़े को घी में सेंककर रात्रि को सोते समय मुंह में रखने से कफ, सर्दी और खांसी में लाभ होता है हल्दी के धुंए का नस्य लेने (नाक से सूंघने से) सर्दी व जुकान में तुरंत आराम मिलता है अदरक एवं ताज़ी हल्दी के एक-एक चम्मच रस में शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से कफ दोष से उत्पन्न सर्दी-खांसी में लाभ होता है (पथ्य- भोजन में मीठे, पचने में भारी एवं तले हुए पदार्थ लेना बंद कर दें)


टांसिल - हल्दी चूर्ण को शहद में मिलाकर टांसिल पर लगायें


कोड़ - गौमूत्र में तीन से पांच ग्राम हल्दी मिलाकर पीने से लाभ होता है


मूत्ररोग - ताज़ी हल्दी एवं आंवले के दो-दो चम्मच रस में शहद डालकर पीने से प्रमेह में आराम मिलता है


कृमि - ७० प्रतिशत बच्चों को कृमि रोग होता है ताज़ी हल्दी का आधा से एक चम्मच रस रोज़ पिलाने से बालकों के कृमि रोग दूर होते हैं अंजीर रात को भिगोकर सुबह खाली पेट खिलाने से भी कृमिरोग दूर होते हैं

AYURVEDIC TEA

आयुर्वेदिक चाय

लाभ: इस पेय के सेवन से शारीर में स्फूर्ति व मस्तिष्क में शक्ति आती है | पाचनक्रिया में सुधार होता है और भूख बढ़ती है | सर्दी, बलगम, खांसी, दमा, श्वास, कफजन्य ज्वर और न्युमोनिया जैसे रोग होने की सम्भावना कम हो जाती है | इसे 'ओजस्वी चाय' नाम दें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी |

सामग्री: (१) गुलबनपशा २५ ग्राम
(२) छाया में सुखाये हुए तुलसी के पत्ते २५ ग्राम
(३) तज २५ ग्राम
(४) छोटी इलायची १२ ग्राम
(५) सोंफ १२ ग्राम
(६) ब्राह्मी के सूखे पत्ते १२ ग्राम
(७) छिली हुई जेठीमध १२ ग्राम

विधि: उपरोक्त प्रत्येक वस्तु को अलग-अलग कूटकर चूर्ण बना के मिश्रित कर लें | जब चाय-कॉफी पीने की आवश्यकता महसूस हो, तब मिश्रण में से ५-६ ग्राम चूर्ण लेकर ४०० ग्राम पानी में उबालें | जब आधा पानी बाकी रहे तब नीचे उतारकर छान लें | उसमें दूध-खांड मिलाकर धीरे-धीरे पियें | चीन जैसे देशों में तो आयुर्वेदिक चाय का प्रचलन बढ़ रहा है, फिर हमारे देशवासी चाय-कॉफी पीकर अपनी तबाही क्यों करें ?

Saturday, July 27, 2013

पेट दर्द से आराम के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

 

गलत खान पान अथवा अपच के कारण होने वाले पेट दर्द के लिए आयुर्वेद में कुछ नुस्खे बताए गये हैं ! जिनका अगर प्रयोग किया जाए तो पेट दर्द कि परेशानी से बचा जा सकता है ! हालांकि इस तरह के पेट दर्द के लिए आज भी हमारे घरों में आयुर्वेदिक नुस्खे काम में लाये जाते हैं और उनसे आराम भी मिलता है ! ऐसे ही कुछ नुस्खे :-


१. अदरक और लहसुन को बराबर कि मात्रा में पीसकर एक चम्मच कि मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द में लाभ मिलता है !

२. एक ग्राम काला नमक और दो ग्राम अजवायन गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द में लाभ मिलता है !

३. अमरबेल के बीजों को पानी से पीसकर बनाए गये लेप को पेट पर लगाकर कपडे से बाँधने से गैस कि तकलीफ,डकारें आना,अपानवायु न निकलना,पेट दर्द और मरोड़ जैसे कष्ट दूर हो जाते हैं !

४. सौंठ,हींग और कालीमिर्च का चूर्ण बराबर कि मात्रा में मिलाकर एक चम्मच कि मात्रा में गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द में तुरंत आराम मिलता है !

५. जटामांसी,सौंठ,आंवला और काला नमक बराबर कि मात्रा में पीस लें और एक एक चम्मच कि मात्रा में तीन बार लेने से भी पेट दर्द से राहत मिलती है !

६. जायफल का एक चौथाई चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करने से भी पेट दर्द में आराम पहुँचता है !

७. पत्थरचट्टा के दो तीन पत्तों पर हल्का नमक लगाकर या पत्तों के एक चम्मच रस में सौंठ का चूर्ण मिलाकर खिलाने से पेट दर्द से राहत मिलती है !

८. सफ़ेद मुसली और दालचीनी को समभाग में मिलाकर पीस लें ! एक चम्मच कि मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से २-३ खुराक में ही पूरा आराम मिल जाता है !

Thursday, July 25, 2013

HOW TO INCREASE YOUR APITITE ?

भूख बढाने के कुछ असरदार नुस्खे --------

हमारे शरीर की अग्नि खाये गये भोजन को पचाने का काम करती है,यदि यह अग्नि किसी कारण से मंद पड़ जाये तो भोजन ठीक तरह से नही पचता है, भोजन के ठीक से नही पचने के कारण शरीर में कितने ही रोग पैदा हो जाते है,अनियमित खानपान से वायु पित्त और कफ़ दूषित हो जाते है,जिसकी वजह से भूख लगनी बंद हो जाती है,और अजीर्ण अपच वायु विकार तथा पित्त आदि की शिकायतें आने लगती है,भूख लगनी बंद हो जाती है,शरीर टूटने लगता है, स्वाद बिगड जाता है,पेट में भारीपन महसूस होने लगता है,पेट खराब होने से दिमाग खराब रहना चालू हो जाता है,अथवा समझ लीजिये कि शरीर का पूरा का पूरा तंत्र ही खराब हो जाता है,इसके लिये मंन्दाग्नि से हमेशा बचना चाहिये और तकलीफ़ होने पर इन दवाओं का प्रयोग करना चाहिये।

* भूख नही लगने पर आधा माशा फ़ूला हुआ सुहागा एक कप गुनगुने पानी में दो तीन बार लेने से भूख खुल जाती है।
* काला नमक चाटने से गैस खारिज होती है,और भूख बढती है,यह नमक पेट को भी साफ़ करता है।
* हरड का चूर्ण सौंठ और गुड के साथ अथवा सेंधे नमक के साथ सेवन करने से मंदाग्नि ठीक होती है।
* सेंधा नमक,हींग अजवायन और त्रिफ़ला का समभाग लेकर कूट पीस कर चूर्ण बना लें,इस चूर्ण के बराबर पुराना गुड लेकर सारे चूर्ण के अन्दर मिला दें,और छोटी छोटी गोलियां बना लें,रोजाना ताजे पानी से एक या दो गोली लेना चालू कर दे,यह गोलियां खाना खाने के बाद ली जाती है,इससे खाना पचेगा भी और भूख भी बढेगी।
* हरड को नीब की निबोलियों के साथ लेने से भूख बढती है,और शरीर के चर्म रोगों का भी नाश होता है।
* हरड गुड और सौंठ का चूर्ण बनाकर उसे थोडा थोडा मट्ठे के साथ रोजाना लेने से भूख खुल जाती है।
* छाछ के रोजाना लेने से मंदाग्नि खत्म हो जाती है।
* सोंठ का चूर्ण घी में मिलाकर चाटने से और गरम जल खूब पीने से भूख खूब लगती है।
* रोज भोजन करने से पहले छिली हुई अदरक को सेंधा नमक लगाकर खाने से भूख बढती है।
* लाल मिर्च को नीबू के रस में चालीस दिन तक खरल करके दो दो रत्ती की गोलियां बना लें,रोज एक गोली खाने से भूख बढती है।
* गेंहूं के चोकर में सेंधा नमक और अजवायन मिलाकर रोटी बनवायी जाये,इससे भूख बहुत बढती है।
* मोठ की दाल मंदाग्नि और बुखार की नाशक है।
* डेढ ग्राम सांभर नमक रोज सुबह फ़ांककर पानी पीलें,मंदाग्नि का नामोनिशान मिट जायेगा।
* पके टमाटर की फ़ांके चूंसते रहने से भूख खुल जाती है।
* दो छुहारों का गूदा निकाल कर तीन सौ ग्राम दूध में पका लें,छुहारों का सत निकलने पर दूध को पी लें,इससे खाना भी पचता है,और भूख भी लगती है।
* जीरा सोंठ अजवायन छोटी पीपल और काली मिर्च समभाग में लें,उसमे थोडी सी हींग मिला लें,फ़िर इन सबको खूब बारीक पीस कर चूर्ण बना लें,इस चूर्ण का एक चम्मच भाग छाछ मे मिलाकर रोजाना पीना चालू करें,दो सप्ताह तक लेने से कैसी भी कब्जियत में फ़ायदा देगा।
* भोजन के आधा घंटा पूर्व चुकन्दर गाजर टमाटर पत्ता गोभी पालक तथा अन्य हरी साग सब्जियां व फ़लीदार सब्जियों के मिश्रण का रस पीने से भूख बढती है।
* सेब का सेवन करने से भूख भी बढती है और खून भी साफ़ होता है।
* अजवायन चालीस ग्राम सेंधा नमक दस ग्राम दोनो को कूट पीस कर एक साफ़ बोतल में रखलें,इसमे दो ग्राम चूर्ण रोजाना सवेरे फ़ांक कर ऊपर से पानी पी लें,इससे भूख भी बढेगी और वात वाली बीमारियां भी समाप्त होंगी।
* एक पाव सौंफ़ पानी में भिगो दें,फ़िर इस पानी में चौगुनी मिश्री मिलाकर पका लें,इस शरबत को चाटने से भूख बढती है।
* पकी हुई मीठी इमली के पत्ते सेंधा नमक या काला नमक काली मिर्च और हींग का काढा बनाकर पीने से मंदाग्नि ठीक हो जाती है।
* जायफ़ल का एक ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से जठराग्नि प्रबल होकर मंदाग्नि दूर होती है।
* सोंफ़ सोंठ और मिश्री सभी को समान भाग लेकर ताजे पानी से रोजाना लेना चाहिये इससे पाचन शक्ति प्रबल होती है।
* जवाखार और सोंठ का चूर्ण गरम पानी से लेने से मंदाग्नि दूर होती है।
* लीची को भोजन से पहले लेने से पाचन शक्ति और भूख में बढोत्तरी होती है।
* अनार भी क्षुधा वर्धक होता है,इसका सेवन करने से भूख बढती है।
* नीबू का रस रोजाना पानी में मिलाकर पीने से भूख बढती है।
* आधा गिलास अनन्नास का रस भोजन से पहले पीने से भूख बढती है।
* तरबूज के बीज की गिरी खाने से भूख बढती है।
* बील का फ़ल या जूस भी भूख बढाने वाला होता है।
* इमली की पत्ती की चटनी बनाकर खाने से भूख भी बढती है,और खाना भी हजम होता है।
* सिरका सोंठ काला नमक भुना सुहागा और फ़ूला हींग समभाग मे लेकर मिला लें,रोजाना खाने के बाद भूख बढती है।
* सूखा पुदीना बडी इलायची सोंठ सौंफ़ गुलाब के फ़ूल धनिया सफ़ेद जीरा अनारदाना आलूबुखारा और हरड समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें,मंदाग्नि अवश्य दूर हो जायेगी।
* एक ग्राम लाल मिर्च को अदरक और नीबू के रस में खरल कर लें,फ़िर इसकी काली मिर्च के बराबर की गोलिया बना लें, यह गोली चूसने से भूख बढती है।

Saturday, July 20, 2013

REMEDY FOR HIGH AND LOW BLOOD PRESSURE

DOSTO,

 HIGH BP की बीमारी ठीक करने के लिए घर में उपलब्ध कुछ आयुर्वेदिक दबाईया है जो आप ले सकते है । जैसे एक बहुत अच्छी दवा है आप के घर में है वो है दालचीनी जो मसाले के रूप में उपयोग होता है वो आप पत्थर में पिस कर पावडर बनाके आधा चम्मच रोज सुबह खाली पेट गरम पानी के साथ खाइए ;


अगर थोडा खर्च कर सकते है तो दालचीनी को शहद के साथ लीजिये (आधा चम्मच शहद आधा चम्मच दालचीनी) गरम पानी के साथ, ये हाई BP के लिए बहुत अच्छी दवा है । और एक अच्छी दवा है जो आप ले सकते है पर दोनों में से कोई एक । दूसरी दावा है मेथी दाना, मेथी दाना आधा चम्मच लीजिये एक ग्लास गरम पानी में और रात को भिगो दीजिये, रात भर पड़ा रहने दीजिये पानी में और सुबह उठ कर पानी को पि लीजिये और मेथी दाने को चबा के खा लीजिये । ये बहुत जल्दी आपकी हाई BP कम कर देगा, देड से दो महीने में एकदम स्वाभाविक कर देगा ।

और एक तीसरी अच्छी दवा है हाई BP के लिए वो है अर्जुन की छाल । अर्जुन एक वृक्ष होती है उसकी छाल को धुप में सुखा कर पत्थर में पिस के इसका पावडर बना लीजिये । आधा चम्मच पावडर, आधा ग्लास गरम पानी में मिलाकर उबाल ले, और खूब उबालने के बाद इसको चाय की तरह पि ले । ये हाई BP को ठीक करेगा, कोलेस्ट्रोल को ठीक करेगा, ट्राईग्लिसाराईड को ठीक करेगा, मोटापा कम करता है , हार्ट में अर्टेरिस में अगर कोई ब्लोकेज है तो वो ब्लोकेज को भी निकाल देता है ये अर्जुन की छाल । डॉक्टर अक्सर ये कहते है न की दिल कमजोर है आपका; अगर दिल कमजोर है तो आप जरुर अर्जुन की छाल लीजिये हरदिन , दिल बहुत मजबूत हो जायेगा आपका; आपका ESR ठीक होगा, ejection fraction भी ठीक हो जायेगा; बहुत अछि दावा है ये अर्जुन की छाल ।

और एक अछि दावा है हमारे घर में वो है लौकी का रस । एक कप लौकी का रस रोज पीना सबेरे खाली पेट नास्ता करने से एक घंटे पहले ; और इस लौकी की रस में पांच धनिया पत्ता, पांच पुदीना पत्ता, पांच तुलसी पत्ता मिलाके, तिन चार कलि मिर्च पिस के ये सब डाल के पीना .. ये बहुत अच्छा आपके BP ठीक करेगा और ये ह्रदय को भी बहुत व्यवस्थित कर देता है , कोलेस्ट्रोल को ठीक रखेगा, डाईबेटिस में भी काम आता है ।

और एक मुफ्त की दावा है , बेल पत्र की पत्ते - ये उच्च रक्तचाप में बहुत काम आते है । पांच बेल पत्र ले कर पत्थर में पिस कर उसकी चटनी बनाइये अब इस चटनी को एक ग्लास पानी में डाल कर खूब गरम कर लीजिये , इतना गरम करिए के पानी आधा हो जाये , फिर उसको ठंडा करके पि लीजिये । ये सबसे जल्दी उच्च रक्तचाप को ठीक करता है और ये बेलपत्र आपके सुगर को भी सामान्य कर देगा । जिनको उच्च रक्तचाप और सुगर दोनों है उनके लिए बेल पत्र सबसे अछि दावा है ।

और एक मुफ्त की दावा है हाई BP के लिए - देशी गाय की मूत्र पीये आधा कप रोज सुबह खाली पेट ये बहुत जल्दी हाई BP को ठीक कर देता है । और ये गोमूत्र बहुत अद्भूत है , ये हाई BP को भी ठीक करता है और लो BP को भी ठीक कर देता है - दोनों में काम आता है और येही गोमूत्र डाईबेटिस को भी ठीक कर देता है , Arthritis , Gout (गठिया) दोनों ठीक होते है । अगर आप गोमूत्र लगातार पि रहे है तो दमा भी ठीक होता है अस्थमा भी ठीक होता है, Tuberculosis भी ठीक हो जाती है । इसमें दो सावधानिया ध्यान रखने की है के गाय सुद्धरूप से देशी हो और वो गर्भावस्था में न हो ।

low BP की बीमारी के लिए दावा : निम्न रक्तचाप की बीमारी के लिए सबसे अछि दावा है गुड । ये गुड पानी में मिलाके, नमक डालके, नीबू का रस मिलाके पि लो । एक ग्लास पानी में 25 ग्राम गुड, थोडा नमक नीबू का रस मिलाके दिन में दो तिन बार पिने से लो BP सबसे जल्दी ठीक होगा ।
और एक अछि दावा है ..अगर आपके पास थोड़े पैसे है तो रोज अनार का रस पियो नमक डालकर इससे बहुत जल्दी लो BP ठीक हो जाती है , गन्ने का रस पीये नमक डालकर ये भी लो BP ठीक कर देता है, संतरे का रस नमक डाल के पियो ये भी लो BP ठीक कर देता है , अनन्नास का रस पीये नमक डाल कर ये भी लो BP ठीक कर देता है ।
लो BP के लिए और एक बढ़िया दावा है मिसरी और मखन मिलाके खाओ - ये लो BP की सबसे अछि दावा है ।
लो BP के लिए और एक बढ़िया दावा है दूध में घी मिलाके पियो , एक ग्लास देशी गाय का दूध और एक चम्मच देशी गाय की घी मिलाके रातको पिने से लो BP बहुत अछे से ठीक होगा ।
और एक अछि दावा है लो BP की और सबसे सस्ता भी वो है नमक का पानी पियो दिन में दो तिन बार , जो गरीब लोग है ये उनके लिए सबसे अच्छा है । —

Tuesday, July 16, 2013

HOW TO LIVE HEALTHY IN THIS RAINY SEASON.......?

सुबह उठते ही सबसे पहले हल्का गर्म पानी पिये !! 2 से 3 गिलास जरूर पिये !
पानी हमेशा बैठ कर पिये !
पानी हमेशा घूट घूट करके पिये !!

घूट घूट कर इसलिए पीना है ! ताकि सुबह की जो मुंह की लार है इसमे ओषधिए गुण बहुत है ! ये लार पेट मे जानी चाहिए ! वो तभी संभव है जब आप पानी बिलकुल घूट घूट कर मुंह मे घूमा कर पिएंगे !

इसके बाद दूसरा काम पेट साफ करने का है ! रोज पानी पीकर सुबह शोचालय जरूर जाये !पेट का सही ढंग से साफ न होना 108 बीमारियो की जड़ है !

खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है !
हमेशा डेड घंटे बाद ही पानी पीएं !

खाना खाने के बाद अगर कुछ पी सकते हैं उसमे तीन चीजे आती हैं !!

1) जूस
2) छाज (लस्सी) या दहीं !
3) दूध

सुबह खाने के बाद अगर कुछ पीना है तो हमेशा जूस पिये !
दोपहर को दहीं खाये ! या लस्सी पिये !
और दूध हमेशा रात को पिये !!

इन तीनों के क्रम को कभी उल्टा पुलटा न करे !!फल सुबह ही खाएं (ज्यादा से ज्यादा दोपहर 1 बजे तक ) ! दहीं दोपहर को दूध रात को !


इसके इलावा खाने के तेल मे भूल कर भी refine oil का प्रयोग मत करे !(वो चाहे किसी भी कंपनी का क्यू न हो dalda ,ruchi,gagan)को भी हो सकता है !
अभी के अभी घर से निकाल दें ! बहुत ही घातक है !
सरसों के तेल का प्रयोग करे ! या देशी गाय के दूध का शुद्ध घी खाएं ! ! (पतंजलि का सरसों का तेल एक दम शुद्ध है !(शुद्ध सरसों के तेल की पहचान है मुंह पर लगाते ही एक दम जलेगा ! और खाना बनाते समय आंखो मे हल्की जलन होगी !


चीनी का प्रयोग तुरंत बंद कर दीजिये ! गुड खाना का प्रयोग करे ! या शक्कर खाये ! चीनी बहुत बीमारियो की जड़ ! slow poison है !)

खाने बनाने मे हमेशा सेंधा नमक या काला नमक का ही प्रयोग करे !! आयोडिन युक्त नमक कभी न खाएं !!
(ये नमक वाली बात आपको अजीब लग सकती हैं ! लेकिन बहुत रहस्यमय कहानी है इस आओडीन युकत नमक के पीछे ) बाद मे विस्तार से बताई जाएगी !!

सुबह का भोजन सूर्य उद्य ! होने के 2 से 3 घंटे तक कर लीजिये ! (अगर 7 बजे आपके शहर मे सूर्य निकलता है ! तो 9 या 10 बजे तक सुबह का भोजन कर लीजिये ! इस दौरान जठर अग्नि सबसे तेज होती है ! सुबह का खाना हमेशा भर पेट खाएं ! सुबह के खाने मे पेट से ज्यादा मन संतुष्टि होना जरूरी है ! इसलिए अपनी मनपसंद वस्तु सुबह खाएं !!

खाना खाने के तुरंत बाद ठीक 20 मिनट के लिए बायीं लेट जाएँ और अगर शरीर मे आलस्य ज्यादा है तो 40 मिनट मिनट आराम करे ! लेकिन इससे ज्यादा नहीं !

इसी प्रकार दोपहर को खाना खाने के तुरंत बाद ठीक 20 मिनट के लिए बायीं लेट जाएँ और अगर शरीर मे आलस्य ज्यादा है तो 40 मिनट मिनट आराम करे ! लेकिन इससे ज्यादा नहीं !

रात को खाना खाने के तुरंत बाद नहीं सोना ! रात को खाना खाने के बाद बाहर सैर करने जाएँ ! कम से कम 500 कदम सैर करे ! और रात को खाना खाने के कम स कम 2 घंटे बाद ही सोएँ !

ब्रह्मचारी है (विवाह के बंधन मे नहीं बंधे ) तो हमेशा सिर पूर्व दिशा की और करके सोएँ ! ब्रह्मचारी नहीं है तो हमेशा सिर दक्षिण की तरफ करके सोएँ ! उत्तर और पश्चिम की तरफ कभी सिर मत करके सोएँ !

मैदे से बनी चीजे पीज़ा ,बर्गर ,hotdog,पूलड़ोग , आदि न खाएं ! ये सब मेदे को सड़ा कर बनती है !! कब्ज का बहुत बड़ा कारण है ! और ऊपर आपने पढ़ा कब्ज से 108 रोग आते हैं )


इन सब नियमो का अगर पूरी ईमानदारी से प्रयोग करेंगे ! 1 से 2 महीने मे ऐसा लगेगा पूरी जिंदगी बदल गई है ! मोटापा है तो कम हो जाएगा ! hihgh BP,cholesterol,triglycerides,सब level पर आना शुरू हो जाएगा ! HDL बढ्ने लगेगा ! LDL ,VLDL कम होने लगेगा !! और भी बहुत से बदलाव आप देखेंगे !!

Saturday, July 13, 2013

IF SNACKS CUT YOU ?

दोस्तो सबसे पहले साँपो के बारे मे एक महत्वपूर्ण बात आप ये जान लीजिये ! कि अपने देश भारत मे 550 किस्म के साँप है ! जैसे एक cobra है ,viper है ,karit है ! ऐसी 550 किस्म की साँपो की जातियाँ हैं ! इनमे से मुश्किल से 10 साँप है जो जहरीले है सिर्फ 10 ! बाकी सब non poisonous है! इसका मतलब ये हुआ 540 साँप ऐसे है जिनके काटने से आपको कुछ नहीं होगा !! बिलकुल चिंता मत करिए !

लेकिन साँप के काटने का डर इतना है (हाय साँप ने काट लिया ) और कि कई बार आदमी heart attack से मर जाता है !जहर से नहीं मरता cardiac arrest से मर जाता है ! तो डर इतना है मन मे ! तो ये डर निकलना चाहिए !

वो डर कैसे निकलेगा ????

जब आपको ये पता होगा कि 550 तरह के साँप है उनमे से सिर्फ 10 साँप जहरीले हैं ! जिनके काटने से कोई मरता है ! इनमे से जो सबसे जहरीला साँप है उसका नाम है !
russell viper ! उसके बाद है karit इसके बाद है viper और एक है cobra ! king cobra जिसको आप कहते है काला नाग !! ये 4 तो बहुत ही खतरनाक और जहरीले है इनमे से किसी ने काट लिया तो 99 % chances है कि death होगी !

लेकिन अगर आप थोड़ी होशियारी दिखाये तो आप रोगी को बचा सकते हैं
होशियारी क्या दिखनी है ???

आपने देखा होगा साँप जब भी काटता है तो उसके दो दाँत है जिनमे जहर है जो शरीर के मास के अंदर घुस जाते हैं ! और खून मे वो अपना जहर छोड़ देता है ! तो फिर ये जहर ऊपर की तरफ जाता है ! मान लीजिये हाथ पर साँप ने काट लिया तो फिर जहर दिल की तरफ जाएगा उसके बाद पूरे शरीर मे पहुंचेगा ! ऐसे ही अगर पैर पर काट लिया तो फिर ऊपर की और heart तक जाएगा और फिर पूरे शरीर मे पहुंचेगा ! कहीं भी काटेगा तो दिल तक जाएगा ! और पूरे मे खून मे पूरे शरीर मे उसे पहुँचने मे 3 घंटे लगेंगे !

मतलब ये है कि रोगी 3 घंटे तक तो नहीं ही मरेगा ! जब पूरे दिमाग के एक एक हिस्से मे बाकी सब जगह पर जहर पहुँच जाएगा तभी उसकी death होगी otherwise नहीं होगी ! तो 3 घंटे का time है रोगी को बचाने का और उस तीन घंटे मे अगर आप कुछ कर ले तो बहुत अच्छा है !

क्या कर सकते हैं ?? ???

घर मे कोई पुराना इंजेक्शन (injection) हो तो उसे ले और आगे जहां सुई(needle) लगी होती है वहाँ से काटे ! सुई(needle) जिस पलास्टिक मे फिट होती है उस प्लास्टिक वाले हिस्से को काटे !! जैसे ही आप सुई के पीछे लगे पलास्टिक वाले हिस्से को काटेंगे तो वो injection एक सक्षम पाईप की तरह हो जाएगा ! बिलकुल वैसा ही जैसा होली के दिनो मे बच्चो की पिचकारी होती है !

उसके बाद आप रोगी के शरीर पर जहां साँप ने काटा है वो निशान ढूँढे ! बिलकुल आसानी से मिल जाएगा क्यूंकि जहां साँप काटता है वहाँ कुछ सूजन आ जाती है और दो निशान जिन पर हल्का खून लगा होता है आपको मिल जाएँगे ! अब आपको वो injection( जिसका सुई वाला हिस्सा आपने काट दिया है) लेना है और उन दो निशान मे से पहले एक निशान पर रख कर उसको खीचना है ! जैसी आप निशान पर injection रखेंगे वो निशान पर चिपक जाएगा तो उसमे vacuum crate हो जाएगा ! और आप खींचेगे तो खून उस injection मे भर जाएगा ! बिलकुल वैसे ही जैसे बच्चे पिचकारी से पानी भरते हैं ! तो आप इंजेक्शन से खींचते रहिए !और आप first time निकलेंगे तो देखेंगे कि उस खून का रंग हल्का blackish होगा या dark होगा तो समझ लीजिये उसमे जहर मिक्स हो गया है !

तो जब तक वो dark और blackish रंग blood निकलता रहे आप खिंचीये ! तो वो सारा निकल आएगा ! क्यूंकि साँप जो काटता है उसमे जहर ज्यादा नहीं होता है 0.5 मिलीग्राम के आस पास होता है क्यूंकि इससे ज्यादा उसके दाँतो मे रह ही नहीं सकता ! तो 0.5 ,0.6 मिलीग्राम है दो तीन बार मे आपने खीच लिया तो बाहर आ जाएगा ! और जैसे ही बाहर आएगा आप देखेंगे कि रोगी मे कुछ बदलाव आ रहा है थोड़ी consciousness (चेतना) आ जाएगी ! साँप काटने से व्यकित unconsciousness हो जाता है या semi consciousness हो जाता है और जहर को बाहर खींचने से चेतना आ जाती है ! consciousness आ गई तो वो मरेगा नहीं ! तो ये आप उसके लिए first aid (प्राथमिक सहायता) कर सकते हैं !

इसी injection को आप बीच से कट कर दीजिये बिलकुल बीच कट कर दीजिये 50% इधर 50% उधर ! तो आगे का जो छेद है उसका आकार और बढ़ जाएगा और खून और जल्दी से उसमे भरेगा !
तो ये आप रोगी के लिए first aid (प्राथमिक सहायता) के लिए ये कर सकते हैं !
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दूसरा एक medicine आप चाहें तो हमेशा अपने घर मे रख सकते हैं बहुत सस्ती है homeopathy मे आती है ! उसका नाम है NAJA (N A J A ) ! homeopathy medicine है किसी भी homeopathy shop मे आपको मिल जाएगी ! और इसकी potency है 200 ! आप दुकान पर जाकर कहें NAJA 200 देदो ! तो दुकानदार आपको दे देगा ! ये 5 मिलीलीटर आप घर मे खरीद कर रख लीजिएगा 100 लोगो की जान इससे बच जाएगी ! और इसकी कीमत सिर्फ पाँच रुपए है ! इसकी बोतल भी आती है 100 मिलीग्राम की 70 से 80 रुपए की उससे आप कम से कम 10000 लोगो की जान बचा सकते हैं जिनको साँप ने काटा है !

और ये जो medicine है NAJA ये दुनिया के सबसे खतरनाक साँप का ही poison है जिसको कहते है क्रैक ! इस साँप का poison दुनिया मे सबसे खराब माना जाता है ! इसके बारे मे कहते है अगर इसने किसी को काटा तो उसे भगवान ही बचा सकता है ! medicine भी वहाँ काम नहीं करती उसी का ये poison है लेकिन delusion form मे है तो घबराने की कोई बात नहीं ! आयुर्वेद का सिद्धांत आप जानते है लोहा लोहे को काटता है तो जब जहर चला जाता है शरीर के अंदर तो दूसरे साँप का जहर ही काम आता है !

तो ये NAJA 200 आप घर मे रख लीजिये !अब देनी कैसे है रोगी को वो आप जान लीजिये !
1 बूंद उसकी जीभ पर रखे और 10 मिनट बाद फिर 1 बूंद रखे और फिर 10 मिनट बाद 1 बूंद रखे !! 3 बार डाल के छोड़ दीजिये !बस इतना काफी है !

और राजीव भाई video मे बताते है कि ये दवा रोगी की जिंदगी को हमेशा हमेशा के लिए बचा लेगी ! और साँप काटने के एलोपेथी मे जो injection है वो आम अस्तप्तालों मे नहीं मिल पाते ! डाक्टर आपको कहेगा इस अस्तपाताल मे ले जाओ उसमे ले जाओ आदि आदि !!

और जो ये एलोपेथी वालो के पास injection है इसकी कीमत 10 से 15 हजार रुपए है ! और अगर मिल जाएँ तो डाक्टर एक साथ 8 से -10 injection ठोक देता है ! कभी कभी 15 तक ठोक देता है मतलब लाख-डेड लाख तो आपका एक बार मे साफ !! और यहाँ सिर्फ 10 रुपए की medicine से आप उसकी जान बचा सकते हैं !

और राजीव भाई इस video मे बताते है कि injection जितना effective है मैं इस दवा(NAJA) की गारंटी लेता हूँ ये दवा एलोपेथी के injection से 100 गुना (times) ज्यादा effective है !

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तो ये जानकारी आप हमेशा याद रखे पता नहीं कब काम आ जाए हो सकता है आपके ही जीवन मे काम आ जाए ! या पड़ोसी के जीवन मे या किसी रिश्तेदार के काम आ जाए! तो first aid के लिए injection की सुई काटने वाला तरीका और ये NAJA 200 hoeopathy दवा ! 10 - 10 मिनट बाद 1 - 1 बूंद तीन बार
रोगी की जान बचा सकती है !!

CAUSES AND REMEDY FOR THE CONSTIPATION

अजीर्ण रोग से पीड़ित रोगी को कई प्रकार के अन्य रोग भी हो जाते हैं तथा इस रोग को कई प्रकार के अन्य नामों से भी जाना जाता है जो इस प्रकार हैं- बदहजमी, मन्दाग्नि, अपच तथा अग्निमान्द्य। इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है।

अजीर्ण रोग होने के कारण:-

अजीर्ण रोग होने का सबसे प्रमुख कारण पेट में कब्ज बनना है।

अजीर्ण रोग होने के लक्षण:-
अजीर्ण रोग होने के कारण भोजन करने के बाद रोगी व्यक्ति का भोजन ठीक से नहीं पचता है, उसे खट्टी-खट्टी डकारे आने लगती है तथा उसका पेट फूलने लगता है। रोगी व्यक्ति के पेट में हल्का-हल्का दर्द होने लगता है, गले तथा हृदय में जलन होने लगती है, मुंह के अन्दर से पानी बाहर आने लगता है, जी-मिचलाने लगता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है, मलक्रिया बन्द हो जाती है। इसके अलावा दिमागी परेशानी, घबराहट तथा भूख न लगना आदि समस्याएं भी रोगी को हो जाती है।

अजीर्ण रोग से पीड़ित व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-

1. अजीर्ण रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को शुरू के 3 दिन कागजी नींबू के रस का सेवन कराके उपवास रखवाना चाहिए या फिर कुछ दिनों तक फलों का रस पिलाना चाहिए।
2. संतरा, गाजर तथा टमाटर के रस का अधिक मात्रा में सेवन करने से भी अर्जीण रोग ठीक हो जाता है।
3. अजीर्ण रोग से पीड़ित रोगी को 4-5 दिनों तक आवश्यकता से कम भोजन का सेवन करना चाहिए। सुबह के समय में एक मीठा सेब या फिर पका टमाटर, दोपहर के समय कोई उबाली हुई सब्जी तथा तीसरे पहर के समय में गाजर, टमाटर, अनानास का रस और रात के समय में थोड़ी-सी उबाली हुई सब्जी या फिर इन सभी चीजों का रस पीना चाहिए। इन दिनों में उपचार करने के साथ-साथ रोगी व्यक्ति को गुनगुने पानी से एनिमा क्रिया करनी चाहिए। इससे यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
4. रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक उपवास रखना चाहिए तथा पाचनशक्ति को बढ़ाने के लिए सादा और साधारण भोजन करना चाहिए। इसके साथ-साथ रोगी को हल्का व्यायाम भी करना चाहिए।
5. अजीर्ण रोग को ठीक करने के लिए शुश्क तथा घर्षण स्नान करना चाहिए और इसके साथ-साथ हल्का व्यायाम भी करना चाहिए। यदि साधारण अर्जीण रोग है तो वह मात्र इतने उपचार से ही ठीक हो जाता है लेकिन जब यह रोग अधिक गंभीर, प्रबल तथा पुराना होता है उसे ठीक होने में कुछ समय लग सकता है।
प्रबल तथा पुराने अजीर्ण रोग को निम्नलिखित प्राकृतिक चिकित्सा से ठीक किया जा सकता है :-
1. रोगी व्यक्ति को प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार बताए गए एप्सम साल्ट बाथ करना (गुनगुने पानी में नमक थोड़ा सा नमक मिलकर उस पानी से स्नान करने को एप्सम साल्ट बाथ कहते है।) चाहिए। प्रतिदिन गरम पानी में तौलिया भिगोकर उस तौलिए से पेट की मांसपेशियों की कुछ मिनटों तक सिंकाई करनी चाहिए। इस क्रिया को करने के साथ-साथ बीच-बीच में 3 से 4 मिनट तक ठंडे पानी में तौलिए को भिगोंकर सिंकाई करनी चाहिए। इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा उपचार करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
2. प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार अजीर्ण रोग को ठीक करने के लिए रात के समय में रोगी के पेड़ू पर गीली मिट्टी की पट्टी लगानी चाहिए।
3. प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार रोगी की कमर पर गीली मिट्टी की पट्टी लगानी चाहिए।
4. रोगी व्यक्ति को भोजन करने से 30 मिनट पहले 1 गिलास ठंडे पानी में एक कागजी नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे अजीर्ण रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
5. यदि इस रोग से पीड़ित रोगी का अजीर्ण रोग बहुत ज्यादा गंभीर हो गया हो तो प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार रोगी व्यक्ति के पूरे शरीर को भीगी चादर की लपेट करना चाहिए फिर इसके बाद वाष्प स्नान करना चाहिए। इससे यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
6. अजीर्ण रोग को प्राकृतिक चिकित्सा से ठीक करने के लिए रोगी को उदरस्नान तथा मेहनस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद गरम और ठण्डा पेट स्नान करना चाहिए। इस प्रकार से स्नान करना ज्यादा लाभकारी होता है।
7. रोगी व्यक्ति को 5 मिनट तक गरम पानी से उदर स्नान करने के बाद 3 मिनट तक ठंडे पानी से उदर स्नान करना चाहिए। इसके बाद इस क्रिया को प्रतिदिन कम से कम 3 से 4 बार दोहराना चाहिए।
8. प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार धनुरासन और उत्थान पादासन क्रिया से अर्जीण रोग का इलाज करने से रोगी व्यक्ति जल्दी ही ठीक हो जाता है।
9. प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार अर्जीण रोग को ठीक करने के लिए नीली बोतल का सूर्यतप्त जल 25 मिलीलीटर की मात्रा में रोजाना 4 बार सेवन करने से रोगी व्यक्ति जल्दी ही ठीक हो जाता है।

Tuesday, July 9, 2013

BILB PATRA





चतुर्मास में शीत जलवायु के कारण वातदोष प्रकुपित हो जाता है। अम्लीय जल से पित्त भी धीरे-धीरे संचित होने लगता है। हवा की आर्द्रता (नमी) जठराग्नि को मंद कर देती है। सूर्यकिरणों की कमी से जलवायु दूषित हो जाते हैं। यह परिस्थिति अनेक व्याधियों को आमंत्रित करती है। इसलिए इन दिनों में व्रत उपवास व होम-हवनादि को हिन्दू संस्कृति ने विशेष महत्त्व दिया है। इन दिनों में भगवान शिवजी की पूजा में प्रयुक्त होने वाले बिल्वपत्र धार्मिक लाभ के साथ साथ स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करते हैं।

बिल्वपत्र उत्तम वायुनाशक, कफ-निस्सारक व जठराग्निवर्धक है। ये कृमि व दुर्गन्ध का नाश करते हैं। इनमें निहित उड़नशील तैल व इगेलिन, इगेलेनिन नामक क्षार-तत्त्व आदि औषधीय गुणों से भरपूर हैं। चतुर्मास में उत्पन्न होने वाले रोगों का प्रतिकार करने की क्षमता बिल्वपत्र में है।
बिल्वपत्र ज्वरनाशक, वेदनाहर, कृमिनाशक, संग्राही (मल को बाँधकर लाने वाले) व सूजन उतारने वाले हैं। ये मूत्र के प्रमाण व मूत्रगत शर्करा को कम करते हैं। शरीर के सूक्ष्म मल का शोषण कर उसे मूत्र के द्वारा बाहर निकाल देते हैं। इससे शरीर की आभ्यंतर शुद्धि हो जाती है। बिल्वपत्र हृदय व मस्तिष्क को बल प्रदान करते हैं। शरीर को पुष्ट व सुडौल बनाते हैं। इनके सेवन से मन में सात्त्विकता आती है।

बिल्वपत्र के प्रयोगः
बेल के पत्ते पीसकर गुड़ मिला के गोलियाँ बनाकर खाने से विषमज्वर से रक्षा होती है।
पत्तों के रस में शहद मिलाकर पीने से इन दिनों में होने वाली सर्दी, खाँसी, बुखार आदि कफजन्य रोगों में लाभ होता है।

बारिश में दमे के मरीजों की साँस फूलने लगती है। बेल के पत्तों का काढ़ा इसके लिए लाभदायी है।
बरसात में आँख आने की बीमारी (Conjunctivitis) होने लगती है। बेल के पत्ते पीसकर आँखों पर लेप करने से एवं पत्तों का रस आँखों में डालने से आँखें ठीक हो जाती है।

कृमि नष्ट करने के लिए पत्तों का रस पीना पर्याप्त है।

एक चम्मच रस पिलाने से बच्चों के दस्त तुरंत रुक जाते हैं।

संधिवात में पत्ते गर्म करके बाँधने से सूजन व दर्द में राहत मिलती है।

बेलपत्र पानी में डालकर स्नान करने से वायु का शमन होता है, सात्त्विकता बढ़ती है।

बेलपत्र का रस लगाकर आधे घंटे बाद नहाने से शरीर की दुर्गन्ध दूर होती है।

पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर पीने से अम्लपित्त (Acidity) में आराम मिलता है।

स्त्रियों के अधिक मासिक स्राव व श्वेतस्राव (Leucorrhoea) में बेलपत्र एवं जीरा पीसकर दूध में मिलाकर पीना खूब लाभदायी है। यह प्रयोग पुरुषों में होने वाले धातुस्राव को भी रोकता है।

तीन बिल्वपत्र व एक काली मिर्च सुबह चबाकर खाने से और साथ में ताड़ासन व पुल-अप्स करने से कद बढ़ता है। नाटे ठिंगने बच्चों के लिए यह प्रयोग आशीर्वादरूप है।

मधुमेह (डायबिटीज) में ताजे बिल्वपत्र अथवा सूखे पत्तों का चूर्ण खाने से मूत्रशर्करा व मूत्रवेग नियंत्रित होता है।

बिल्वपत्र की रस की मात्राः 10 से 20 मि.ली.

Friday, July 5, 2013

ASK ABOUT YOUR HEalth problems

DEAR SIR/MADAM;

   IF YOU HAVE ANY PROBLEM RELATED TO HEALTH OR ANY PART OF THE BODY. YOU CAN ASK ME. I'LL SUGGEST YOU THE BEST REMEDY FOR THAT..

REMEDY FOR CANCER- DIAMOND

हीरा है सदा के लिए। यह सुंदरता में चार चांद
लगाता है और शरीर भी निरोग रखता है। कैंसर जैसे
असाध्य रोग की कारगर दवा है हीरे की भस्म,
जिसमें कैंसर की शरीर में अनियंत्रित वृद्धि रोकने
की अत्यन्त प्रभावी क्षमता है। इस भस्म से दर्जनभर
लोगों को अपनी बीमारी से चमत्कारिक आराम मिला है। इससे
चिकित्सकों का हौसला काफी बढ़ गया है।
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, हंडिया के
कायचिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो.जीएस तोमर
ने कैंसर को दूर करने के लिए विशेष शोध किया है।

इसमें कैंसर रोगियों को हीरक भस्म, गोमूत्र के साथ
कुछ दवाओं का सेवन करना होता है। इसमें हीरे
की भस्म शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। इससे रोग से अतिशीघ्र निजात मिलता है,
क्योंकि हीरे की भस्म से दवाएं कैंसर ग्रस्त अंग जैसे
ब्रेन, ब्लड, ब्रोन आदि तक सीधे पहुंचकर कार्य करने
लगती हैं। वहीं आयुर्वेदीय 'मोलीकुलरली टारगेटेड
थिरेपी' से उस अंग का तेजी से सुधार होता है। डॉ.तोमर का कहना है कि कैंसर एक ऐसा असाध्य
एवं घातक रोग है, जिसके नाम से ही मृत्युवत भय
उत्पन्न होता है। कीमोथिरेपी,
रेडिएशनथिरेपी तथा शल्य क्रिया में कैंसर को ठीक
करने की क्षमता है। रोग के जीर्ण (पुराना) होने पर
इसका लाभ नहीं मिल पाता। इससे निराशा एवं भयावहता से ग्रस्त रोगी आयुर्वेद
चिकित्सकों की शरण लेते हैं। तीन-चार सप्ताह में ही दिखने लगता है फायदा--- डॉ.तोमर का दावा है कि हीरे की भस्म को तीन
दर्जन से अधिक कैंसर पीड़ितों में प्रयोग
किया गया। इसमें दस रोगियों को तीन सप्ताह में
40 प्रतिशत आराम मिल गया, जबकि 15 ऐसे मरीज
थे जिनको पांच सप्ताह में 45 प्रतिशत आराम
मिला। उन्होंने बताया कि शोध कार्य पूरा होने पर इसकी प्रामाणिकता के लिए आयुष
को भेजा जाएगा।


ऐसे बनती है भस्म--- पहले कुल्थी की दाल का काढ़ा बनाया जाता है।
इसके बाद हीरे को तपाकर उसे 101 बार उसमें बुझाते
हैं। इससे वह भस्म का रूप ले लेता है। फिर शहद में
मिलाकर प्रतिदिन 10-20 मिलीग्राम
की मात्रा चाटने पर लाभ मिलता है। साथ
ही गोमूत्र को उबालकर अर्क बनाते हैं इसे चार चम्मच खाली पेट दिया जाता है। 


दवा के साथ करें परहेज----- कैंसर के रोगियों को दवा के साथ कुछ पहरेज
भी करना होता है। बिना उसके दवा का लाभ
नहीं मिल पाता।

-प्रदूषित पानी का सेवन न करें।
-धूम्रपान व तंबाकू का सेवन न करें।
-शराब के सेवन से रहें दूर।
-लाल मांस का सेवन न करें।
-वसा युक्त खाद्य पदार्थ से बचें।
-बासी व अधिक समय से कटे फल का सेवन न करें।

Thursday, July 4, 2013

USES OF TRIFLA

त्रिफला : आयुर्वेद का अनमोल उपहारत्रिफला चूर्ण के
औषधि प्रयोग- नेत्र-प्रक्षलन : एक चम्मच
त्रिफला चूर्ण रातको एक कटोरी पानी में भिगोकर
रखें। सुबह कपड़े सेछानकर उस पानी से आंखें धो लें। यह
प्रयोगआंखों के लिए अत्यंत हितकर है। इससे आंखें
स्वच्छव दृष्टि सूक्ष्म होती है। आंखों की जलन,लालिमा आदि तकलीफें दूर होती हैं।-


कुल्ला करना : त्रिफला रात को पानी में भिगोकररखें।
सुबह मंजन करने के बाद यह पानी मुंह मेंभरकर रखें।
थोड़ी देर बाद निकाल दें। इससे दांत वमसूड़े
वृद्धावस्था तक मजबूत रहते हैं। इससे अरुचि,मुख
की दुर्गंध व मुंह के छाले नष्ट होते हैं।-


त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर पीने सेमोटापा कम होता है।

त्रिफला के काढ़े से घाव धोनेसे एलोपैथिक-
एंटिसेप्टिककी आवश्यकता नहीं रहती। घाव जल्दी भर
जाता है।-


गाय का घी व शहद के मिश्रण (घी अधिक
वशहद कम) के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन
आंखों केलिए वरदान स्वरूप है।- संयमित आहार-विहार के साथ इसका नियमितप्रयोग करने से मोतियाबिंद,
कांचबिंदु-दृष्टिदोषआदि नेत्र रोग होने
की संभावना नहीं होती।- 


मूत्र संबंधी सभी विकारों व
मधुमेह में यहफायदेमंद है। रात को गुनगुने पानी के
साथत्रिफला लेने से कब्ज नहीं रहती है।-


 मात्रा : 2 से 4
ग्राम चूर्ण दोपहर को भोजन केबाद अथवा रात को गुनगुने पानी के साथ लें।एक अध्ययन से पता चला है
कि त्रिफला का सेवनरेडियोधर्मिता से भी बचाव
करता है। प्रयोगों मेंदेखा गया है
कि त्रिफला की खुराकों सेगामा किरणों के रेडिएशन
के प्रभाव से होनेवाली अस्वस्थता के लक्षण भी नहीं पाए
जाते हैं।इसीलिए त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद का अनमोल उपहारकहा जाता है।


सावधानी : दुर्बल,
कृशव्यक्ति तथा गर्भवती स्त्री को एवं नए बुखार
मेंत्रिफला का सेवन नहीं करना चाहिए।
यदि दूधका सेवन करना हो तो दूध व त्रिफला के सेवन
केबीच 2 घंटे का अंतर रखें।

IMPORTANT THINGS

- सुबह उठ कर २ से ४ ग्लास पानी पीना चाहिए .
इसके साथ अपनी प्रकृति के अनुसार कोई ना कोई
आयुर्वेदिक औषधि लेनी चाहिए . वात या पित्त
प्रवृत्ति के लोगों को आंवला , एलो वेरा , या बेल
पत्र या नीम पत्र या मेथी दाना (भिगोया हुआ );
थायरोइड के मरीजों को भिगोया हुआ धनिया ,
कफ प्रवृत्ति के लोगों को तुलसी , कम रोग
प्रतिरोधक क्षमता वालों को गिलोय घनवटी .
इस प्रकार से रूटीन बना ले .

- खाली पेट चाय पीने से एसिडिटी की समस्या बढ़
सकती है .

- चाय का पानी उबालते समय उसमे ऋतू अनुसार
कोई ना कोई जड़ी बूटी अवश्य डाले .अदरक चाय के
बुरे गुणों को कम करता है .

- सुबह घुमने जाते समय अपने आस पास के वृक्षों और
पौधों पर नज़र डाले . इनका आयुर्वेदिक महत्त्व
समझे और इसके बारे में जानकारी फैलाइए . ताकि लोग इन्हें संरक्षण दे और काटे नहीं .इसमें से
कोई बूटी अपनी चाय के लिए चुन ले .

- हार्ट के मरीजों को अर्जुन की छाल चाय में
डालनी चाहिए

- शकर जितनी कम डालेंगे हमारी आदत
सुधरती जायेगी और मोटापा कम होता जाएगा .
- सफ़ेद शकर की जगह मधुरम का प्रयोग करे .

- चाय में तुलसी , इलायची , लेमन ग्रास ,
अश्वगंधा या दालचीनी डाली जा सकती है .

- चाय के पानी में थोड़ी देर दिव्य पेय डाल कर
उबाले .

- दूध सुबह
नहीं लिया जाना चाहिए पर ये काढ़े के साथ
लिया जा सकता है . अगर हम चाय के पानी में दिव्य
पेय या कोई भी जड़ी बूटी दाल कर ५-१० मी . उबाल
ले तो ये एक काढा ही तैयार हो जाएगा . अब इसमें
हम दूध डाल के ले सकते है .

- जो बच्चें मौसम बदलने पर बार बार बीमार पड़ते है
उन्हें रोज़ थोड़ी चाय (जड़ी बूटी वाली )
दी जानी चाहिए .पेट गड़बड़ होने पर
भी बच्चों को चाय देनी चाहिए .

- चाय के साथ कोई नमकीन पदार्थ ना ले
क्योंकि इसमें दूध होता है जिसके साथ अगर नमक लिया जाए तो ये ज़हर पैदा करता है जिससे
त्वचा रोग भी हो सकते है .

- चाय कम स्ट्रोंग पीनी चाहिए .

- दिन में २ कप से अधिक चाय कभी ना ले .

- चाय हमेशा स्वदेशी ब्रांड की ही ले ताकि हम
सुबह का पहला काम तो देश के नाम कर सके .

- जो शाकाहारी है वे चाय बोन चायना के कप में
ना ले क्योंकि ये कप हड्डियों के चूरे से ही बनाए
जाते है .