Monday, September 30, 2013

USES OF GINGER

अदरक के स्वास्थ्य लाभ....................

अदरक रसोई घर या हर्बल दवाओं में भी पाया जाता है। विशिष्ट गुणों से भरपूर अदरक का इस्तेमाल कई 


बड़ी-छोटी बीमारियों में भी किया जाता है। यह कफ, खांसी, जुकाम, सिरदर्द, कमर दर्द, पसली और 

छाती की पीड़ा दूर करती है और पसीना लाकर रोम छिद्रों को खोलती है। औषधि के रूप में इसका प्रयोग 

गठिया, र्यूमेटिक आर्थराइटिस (आमवात, जोड़ों की बीमारियों) साइटिका और गर्दन व रीढ़ की हड्डियों की 

बीमारी (सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस) होने पर, भूख न लगना, मरोड़, अमीबिक पेचिश, खाँसी, जुकाम, दमा 

और शरीर में दर्द के साथ बुखार, कब्ज होना, कान में दर्द, उल्टियाँ होना, मोच आना, उदर शूल और 

मासिक धर्म में अनियमितता होना, एंटी-फंगल। इन सब रोगों में भी अदरक (सोंठ) को दवाई के रूप में 

इस्तेमाल किया जाता है। अदरक एक दर्द निवारक के रूप में भी पाया गया है। इस का प्रयोग दर्दनाक 

माहवारी, माइग्रेन, अपच और संक्रमण के लिए और अस्थमा के रूप में राहत प्रदान और जीवन शक्ति 

और दीर्घायु को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। विभिन्न प्रकार के रूमेटिक रोगों में जहाँ 

कर्टिकोस्टेराईड तथा नान स्टेराइड दर्द नाशक दवाएं दी जाती हैं वहाँ अदरक का रस बहुत ही लाभ दायक 

है। अदरक कुष्ठ, पीलिया, रक्त पित्त, ज्वर दाह रोग आदि में उपयोगी औषधि है। अदरक का रस पेट के 

लिए तो लाभकारी है ही साथ में शरीर की सूजन, पीलिया, मूत्र विकार, दमा, जलोदर आदि रोगों में भी 

लाभकारी है। इसके सेवन से वायु विकार नष्ट हो जाते हैं। बालों के लिए भी उपयोगी है। अदरक का रस 

रूसी को भी नियंत्रित करता है। अदरक खाने से मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया भी मर जाते हैं।


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1- चोट लगने पर
- अदरक पीसकर गर्म कर ले। इसकी दर्द वाले स्थान पर लगभग आधा इंच (मोटाई) 


लेप करके पट्टी बाधे लगभग 2 घन्टे पश्चात लेप को हटाये व सरसों का तेल लगाकर सेक लें। इस प्रक्रिया 

को लाभ हाने पर प्रतिदिन करे।

2- अपच- भोजन के उपरान्त अदरक व नीबू के रस में सेधानमक मिलाकर प्रातःसाय पीते रहने से अपच 

दूर हो जाती है। और भूख खूब लगती है।


3- कान का दर्द- अदरक का रस किचित गर्म करके कान में डालने से कान का दर्द तुरन्त समाप्त हो जाता 

है।

4- दन्तशूल- दातो में दर्द होते समय अदरक के टुकड़े दातो के बीच में दबाकर रखने से दातो का दर्द 

समाप्त हो जाता है।

5- सन्निपातिक ज्वर- अदरक का रस में त्रिकुटा व सेधानमक मिलाकर देने से गले में घिरा हुआ कफ 

निकल जाता है। जिससें रोगी को आराम मिल जाता है।

6- न्यूमोनिया- अदरक के रस में 2-1 वर्ष पुराना घृत व कपुर मिलाकर गर्म करके लेप करना तत्काल 

लाभ करता है।


अदरक के औषधीय प्रयोग-


भोजन से पूर्व अदरक की कतरन में नमक डालकर खाने से खुलकर भूख लगती है, खाने में रुचि पैदा होती 


है, कफ व वायु के रोग नहीं होते एवं कंठ व जीभ की शुद्धि होती है।

अदरक और प्याज का रस समान मात्रा में पीने से उल्टी (वमन) होना बंद हो जाता है।

सर्दियों में अदरक को गुड़ में मिलाकर खाने से सर्दी कम लगती है तथा शरीर में गर्मी पैदा होती है। सर्दी 

लगकर होने वाली खांसी का कफ वाली खांसी की यह अचूक दवा है।

अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े मुंह में रखकर चूसने से हिचकियां आनी बंद हो जाती हैं।

सर्दी के कारण होने वाले दांत व दाढ़ के दर्द में अदरक के टुकड़े दबाकर रस चूसने से लाभ होता है।


एक गिलास गरम पानी में एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर कुल्ले करने से मुंह से दुर्गंध आनी बंद हो 

जाती है।सर्दी के कारण सिरदर्द हो तो सोंठ को घी या पानी में घिसकर सिर पर लेप करने से आराम 

मिलता है।पेट दर्द में एक ग्राम पिसी हुई सोंठ, थोड़ी सी हींग और सेंधा नमक की फंकी गरम पानी के साथ 

लेने से फ़ायदा होता है।


अदरक को आप फल-सब्जी मानें या फिर विलक्षण दवा कह लें, यह गुणों की खान है। अधिकतर घरों में 


अदरक का उपयोग तरह-तरह से किया जाता है। भोजन के एक महत्वपूर्ण अंग और औषधि, दोनों रूपों में 

अदरक या सोंठ का प्रयोग किया जाता है। विशिष्ट गुणों से भरपूर अदरक का इस्तेमाल कई बड़ी-छोटी 

बीमारियों में भी किया जाता है।

REMEDY OF STONE

मित्रो जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान मे डाल कर खा जाते हैं )

क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है | मतलब 


जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे 

पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|



आयुर्वेदिक इलाज !

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पखानबेद नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके 10 पत्तों को 1 से डेड 


गिलास पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे 

 भी जल्दी खत्म हो जाती !!! आप दिन मे 3 बार पत्ते 3 पत्ते सीधे भी खा सकते हैं !


होमियोपेथी इलाज !

अब होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर मिलेगी उसका नाम हे 

BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी हे|

वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये| (स्वदेशी कंपनी SBL की 

बढ़िया असर करती है )

(ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions 


form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है )

अब इस दवा की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/ 4) कप गुण गुने पानी मे मिलाकर दिन मे चार बार 


(सुबह,दोपहर,शाम और रात) लेना है | चार बार अधिक से अधिक और कमसे कम तीन बार|इसको 

लगातार एक से डेढ़ महीने तक लेना है कभी कभी दो महीने भी लग जाते है |

इससे जीतने भी stone है ,कही भी हो गोलब्लेडर gall bladder )मे हो या फिर किडनी मे हो,या युनिद्रा के 


आसपास हो,या फिर मुत्रपिंड मे हो| वो सभी स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे|

99% केस मे डेढ़ से दो महीने मे ही सब टूट कर निकाल देता हे कभी कभी हो सकता हे तीन महीने भी हो 


सकता हे लेना पड़े|तो आप दो महीने बाद सोनोग्राफी करवा लीजिए आपको पता चल जायेगा कितना टूट 

गया है कितना रह गया है|अगर रह गया हहै तो थोड़े दिन और ले लीजिए|यह दवा का साइड इफेक्ट नहीं है |

और यही दवा से पित की पथरी (gallbladder stones ) भी ठीक हो जाती है ! जिसे आधुनिक डाक्टर पित 


का कैंसर बोल देते हैं !
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ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके लिए क्या??? क्योंकि 


कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना 

चाहिए इसके लिए क्या ???

इसके लिए एक और होमियोपेथी मे दवा है CHINA 1000|

प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल दीजिए|सिर्फ 

एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा|

और एक बात इस 


BERBERIS VULGARIS से पीलिया jaundice भी ठीक होता है !

Friday, September 27, 2013

BENEFITS OF WHEY OR BUTTER MILK ( CHHACH/ MATTHA )

रोजाना एक गिलास छाछ पीने से होंगे ये चमत्कारी फायदे -------

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गर्मियों में दूध से बने पदार्थ को शरीर के लिए बहुत अधिक लाभदायक माना गया है। इसीलिए इन दिनों 


दही,पनीर, मट्टा व छाछ का भरपूर उपयोग किया जाता है। दही, पनीर, मठ्ठा, आदि तो उपयोगी हैं ही 

लेकिन उनसे भी ज्यादा लाभदायक छाछ है। गर्मियों मे रोजाना छाछ का सेवन अमृत के समान है। इससे 

चेहरा चमकने लगता है। खाने के साथ छाछ पीने से जोड़ों के दर्द से भी राहत मिलती है।छाछ कैल्शियम से 

भरी होती है।

इसका रोजाना सेवन करने वाले को कभी भी पाचन सबंधी समस्याएं प्रभावित नहीं करती हैं। खाना खाने 


के बाद पेट भारी हो जाना अरूचि आदि दूर करने के लिए गर्मियों में छाछ जरुर पीना चाहिए। रोजाना छाछ 

पीने के ढेरों फायदे हैं उन्हीं में से कुछ आज हम आपको बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं छाछ पीने के 

लाभ....

एसिडिटी
- गर्मी के कारण अगर दस्त हो रही हो तो बरगद की जटा को पीसकर और छानकर छाछ में 


मिलाकर पीएं। छाछ में मिश्री, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर रोजाना पीने से एसिडिटी जड़ से 

साफ हो जाती है।

रोग प्रतिरोधकता बढाए
- इसमें हेल्‍दी बैक्‍टीरिया और कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं साथ ही लैक्‍टोस शरीर में 


आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है, जिससे आप तुरंत ऊर्जावान हो जाते हैं।

कब्ज
- अगर कब्ज की शिकायत बनी रहती हो तो अजवाइन मिलाकर छाछा पीएं। पेट की सफाई के लिए 


गर्मियों में पुदीना मिलाकर लस्सी बनाकर पीएं।

खाना न पचने की शिकायत
- जिन लोगों को खाना ठीक से न पचने की शिकायत होती है। उन्हें रोजाना 


छाछ में भुने जीरे का चूर्ण, काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर धीरे-धीरे 

पीना चाहिए। इससे पाचक अग्रि तेज हो जाएगी।

विटामिन- बटर मिल्‍क में विटामिन सी, ए, ई, के और बी पाये जाते हैं जो कि शरीर के पोषण की जरुरत 


को पूरा करता है।

मिनरल्‍स
- यह स्वस्थ पोषक तत्वों जैसे लोहा, जस्ता, फास्फोरस और पोटेशियम से भरा होता है, जो कि 


शरीर के लिये बहुत ही जरुरी मिनरल माना जाता है।यदि आप डाइट पर हैं तो रोज़ एक गिलास मट्ठा पीना 

ना भूलें। यह लो कैलोरी और फैट में कम होता है।

Tuesday, September 24, 2013

BENEFITS OF WARM WATER

रोजाना थोड़ा गर्म पानी पीएंगे तो इन रोगों के लिए दवा नहीं खानी पड़ेगी

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आयुर्वेद की विशेषता है कि इसमें सामान्य से सामान्य दिखने वाली चीजों के औषधीय गुणों को भी 


पहचाना गया है। पानी की दुर्लभ औषधीय क्षमता ऋषि-मुनियों की सूक्ष्म दृष्टि से अछूती नहीं रही है। गर्म 

पानी में भी अनेकों ऐसे औषधीय गुण हैं, जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे 

हैं आयुर्वेद में बताए गए गर्म पानी के खास गुण व इसे पीने से होने वाले फायदों के बारे 

में ....


पानी एक दवा है- पानी भी एक दवा है। यह कई रोगों को दूर करने का काम करता है। इसीलिए सुबह 


खाली पेट गर्म पानी पीना शरीर के लिए लाभदायक होता है।


कैसे पीएं गर्म पानी- जब उबलते हुए पानी में झाग आना बंद हो जाए, पानी आधा बचे और साफ हो जाए 


तो ऐसे पानी को आयुर्वेद की भाषा में उष्णेदक कहा जाता है। यह पानी आयुर्वेद के अनुसार शुद्ध माना 

जाता है और इसे ठंडा करके या हल्का गुनगुना पीने से अनेक लाभ होते हैं।



उष्णेदक पानी पीने के लाभ

यह कफ से संबंधित अनेक बीमारियों का नाश करता है।

गैस्ट्रिक प्रॉब्लम वाले लोगों को ठंडे की जगह गर्म पानी पीना चाहिए।

खाने के बाद गुनगुना पानी पीने से मोटापा कम हो जाता है।

गर्म पानी पीने से भूख तेज लगती है।

खांसी, दमा व अन्य समस्याएं भी दूर होती हैं।

अपच, आफरा , सिरदर्द आदि बीमारियों से मुक्ति मिलती है।


विशेष- पानी को उबालते हुए जब उसका चौथाई हिस्सा जल जाए और तीन भाग पानी बच जाए तो ऐसे 


पानी को पीने से अधिक लाभ होता है। गर्म पानी हमारे शरीर के तीनों दोषों वात, पित्त व कफ का नाश 

करता है। जिस पानी में ईंट के टुकड़े को आग में गर्म करके बुझाया गया हो, वह पानी पीने से कई 

बीमारियां खत्म हो जाती हैं।


कब नहीं पीएं गर्म पानी- बुखार में, शरीर में जलन होने पर, चक्कर , दस्त आदि समस्याओं में गर्म पानी 

वर्जित है। गर्मी के मौसम में गर्म पानी नहीं पीना चाहिए।


उबालकर ठंडा किए गए पानी को पीने से दूर होने वाले रोग- गैस्ट्रिक समस्या, बवासीर, क्षयरोग, पेट के 


रोग, सूजन, भूख न लगना, जुकाम आदि समस्या दूर होती है।


उबला पानी पीने की उचित विधि- सुबह बिस्तर से उठते ही बिना मुंह धोए चार बड़े गिलास पानी पीना 

चाहिए। अगर चार गिलास न पी पाएं तो कम से कम एक-दो गिलास तो जरूर पीएं। यदि सुबह पीए जाने 

वाले पानी को रातभर तांबे के बर्तन में रखा जाए तो वह पेट के लिए बहुत लाभदायक होता है।

REMADY OF THROGHT AND CHEST PROBLEMS

गला और छाती की बीमारी का इलाज :

गले में किनती भी ख़राब से ख़राब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे अछि दावा है हल्दी । 


जैसे गले में दर्द है, खरास है , गले में खासी है, गले में कफ जमा है, गले में टोनसीलाईटिस हो गया ; ये 

सब बिमारिओं में आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस लेना 

और मुह खोल कर गले में डाल देना , और फिर थोड़ी देर चुप होके बैठ जाना तो ये हल्दी गले में निचे उतर 

जाएगी लार के साथ ; और एक खुराक में ही सब बीमारी ठीक होगी दुबारा डालने की जरुरत नही । ये छोटे 

बछो को तो जरुर करना ; बछो के टोन्सिल जब बहुत तकलीफ देते है न तो हम ऑपरेशन करवाके उनको 

कटवाते है ; वो करने की जरुरत नही है हल्दी से सब ठीक होता है ।


गले और छाती से जुडी हुई कुछ बीमारिया है जैसे खासी ; इसका एक इलाज तो कच्ची हल्दी का रस है जो 

गले में डालने से तुतंत ठीक हो जाती है चाहे कितनी भी जोर की खासी हो । दूसरी दावा है अदरक , ये जो 

अदरक है इसका छोटा सा टुकड़ा मुह में रखलो और टफी की तरह चुसो खासी तुतंत बंध हो जाएगी । अगर 

किसीको खासते खासते चेहरा लाल पड़ गया हो तो अदरक का रस ले लो और उसमे थोड़ा पान का रस 

मिला लो दोनों एक एक चम्मच और उसमे मिलाना थोड़ा सा गुड या सेहद । अब इसको थोडा गरम करके 

पी लेना तो जिसको खासते खासते चेहरा लाल पड़ा है उसकी खासी एक मिनट में बंध हो जाएगी । और 

एक अछि दावा है , अनार का रस गरम करके पियो तो खासी तुरन्त ठीक होती है । काली मिर्च है गोल 

मिर्च इसको मुह में रख के चबालो , पीछे से गरम पानी पी लो तो 

खासी बंध हो जाएगी, काली मिर्च को चुसो तो भी खासी बंध हो जाती है । 


छाती की कुछ बिमारिया जैसे दमा, अस्थमा, ब्रोंकिओल अस्थमा, इन तीनो बीमारी का सबसे अच्छा दवा 

है गाय मूत्र ; आधा कप गोमूत्र पियो सबेरे का ताजा ताजा तो दमा ठीक होता है, अस्थमा ठीक होता है, 

ब्रोंकिओल अस्थमा ठीक होता है । और गोमूत्र पिने से टीबी भी ठीक हो जाता है , लगातार पांच छे महीने 

पीना पड़ता है । दमा अस्थमा का और एक अछि दावा है दालचीनी, इसका पाउडर रोज सुबह आधे चम्मच 

खाली पेट गुड या सेहद मिलाके गरम पानी के साथ लेने से दमा अस्थमा ठीक कर देती है ।

Monday, September 23, 2013

REMEDY OF CANCER

कैंसर बहुत तेज़ी से बड़ रहा है इस देश में । हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे है और हर साल नए Cases आ रहे है । और सभी डॉक्टर्स हात-पैर डाल चुके है ।
राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना के … " कैंसर के patient को कैंसर से death नही होती है, जो treatment दिया जाता है उससे death होती है " । माने कैंसर से जादा खतर
नाक कैंसर का treatment है । Treatment कैसा है आप सभी जानते है .. Chemotherapy दे दिया, Radiotherapy दे दिया, Cobalt-therapy दे दिया ।

इसमें क्या होता है के शारीर का जो प्रतिरक्षक शक्ति है Resistance वो बिलकुल ख़तम हो जाते है । जब Chemotherapy दिए जाते है ये बोल कर के हम कैंसर के सेल को मारना चाहते है तो अछे सेल भी उसी के साथ मर जाते है । राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो आया Chemotherapy लेने के बाद वे उनको बचा नही पाए । लेकिन इसका उल्टा भी रिकॉर्ड है .. राजीव भाई के पास बिना Chemotherapy लिए हुए कोई भी रोगी आया Second & third Stage तक वो एक भी नही मर पाया अभी तक ।

मतलब क्या है Treatment लेने के बाद जो खर्च आपने कर दिया वो तो गया ही और रोगी भी आपके हात से गया । डॉक्टर आपको भूल भुलैया में रखता है अभी 6 महीने में ठीक हो जायेगा 8 महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में वो जाता ही है , कभी हुआ नही है के Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसीको कैंसर हो जाये तो जादा खर्चा मत करिए कियों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नही होगा उसको इतना कष्ट होता है की आप कल्पना नही कर सकते ।

उसको जो injections दिए जाते है, जो Tablets खिलाई जाती है, उसको जो Chemotherapy दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते है, भ्रू के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगता है के पहचान में नही आता ये अपना ही आदमी है। इतना कष्ट कियों दे रहे हो उसको ? सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है के आपके पास बहुत पैसा है तो Treatment कराके ही मानुगा ! होता ही नही है वो, और आप अपनी आस पड़ोस की बाते जादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे Relatives बहुत Emotionally Exploit करते है । घर में किसीको गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार है वो पहले आके कहते है ' अरे All India नही ले जा रहे हो? PGI नही ले जा रहे हो ? Tata Institute बम्बई नही ले जा रहे हो ? आप कहोगे नही ले जा रहा हूँ मेरे घर में ही चिकित्सा .... अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नही कर सकते माँ के लिए इतना नही कर सकते " । ये बहुत खतरनाक लोग होते है !! हो सकता है कई बार वो Innocently कहते हो, उनका intention ख़राब नही होता हो लेकिन उनको Knowledge कुछ भी नही है, बिना Knowledge के वो suggestions पे suggestions देते जाते है और कई बार अच्छा खासा पड़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में .. रोगी को भी गवाता है पैसा भी जाता है ।

कैंसर के लिए क्या करे ? हमारे घर में कैंसर के लिए एक बहुत अछि दावा है ..अब डॉक्टर ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नही थे; एक ही दुनिया में दावा है Anti-Cancerous उसका नाम है " हल्दी " । हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखता है । हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है । हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीस में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा सीधा मूत्र जिसे सूती के आट परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे । अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाके गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरहा पिलाना है .. चुस्किया ले ले के सिप कर कर । एक और आयुर्वेदिक दावा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये Complementary है जो आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है ।

इस दावा में सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है जेर्सी का मूत्र कुछ काम नही आता । और जो देशी गाय काले रंग का हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में । इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा ) सही अनुपात में मिलाके उबालके ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये । ये दावा कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अछे परिणाम देते है । जब स्टेज थर्ड क्रोस करके फोर्थ में पोहुंच गया तब रिजल्ट में प्रॉब्लम आती है । और अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy बैगेरा दे दिया तो फिर इसका कोई असर नही आता ! कितना भी पिलादो कोई रिजल्ट नही आता, रोगी मरता ही है । आप अगर किसी रोगी को ये दावा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy सुरु तो नही हो गयी ? अगर सुरु हो गयी है तो आप उसमे हात मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए .. इतना ही करे । और अगर Chemotherapy स्टार्ट नही हुई है और उसने कोई अलोप्यथी treatment सुरु नही किया तो आप देखेंगे इसके Miraculous रिजल्ट आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के resistance पर, हमारी जो vitality है उसको improve करता है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शारीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है ।

तो कैंसर के लिए आप अपने जीवन में इस तरह से काम कर सकते है; इसके इलावा भी बहुत सारी मेडिसिन्स है जो थोड़ी complicated है वो कोई बहुत अच्छा डॉक्टर या वैद्य उसको हंडल करे तभी होगा आपसे अपने घर में नही होगा । इसमें एक सावधानी रखनी है के गाय के मूत्र लेते समय वो गर्वबती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी use कर सकते है।

ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही न ये और भी अच्छा है जानना । तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के, हमेसा जो खाना खाए उसमे डालडा तो नही है ? उसमे refined oil तो नही है ? ये देख लीजिये, दूसरा जो भी खाना खा रहे है उसमे रसेदार हिस्सा जादा होना चाहिए जैसे छिल्केवाली डाले, छिल्केवाली सब्जिया खा रहे है , चावल भी छिल्केवाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है ।

और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तिन कारन है, एक तो कारन है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी और सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हात मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारन है पुरे देश में ।
कैंसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती है चाहे वो डॉक्टर हो, experts हो, Scientist हो के इससे बचाओ ही इसका उपाय है ।

महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर है uterus में गर्वशय में, स्तनों में और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए जिससे जिन्दगी में कभी Tumour न आये ? आपके लिए सबसे अच्छा prevention है की जैसे ही आपको आपके शारीर के किसी भी हिस्से में unwanted growth (रसोली, गांठ) का पता चले तो जल्द ही आप सावधान हो जाइये । हलाकि सभी गांठ और सभी रसोली कैंसर नही होती है 2-3% ही कैंसर में convert होती है लेकिन आपको सावधान होना तो पड़ेगा । माताओं को अगर कहीं भी गांठ या रसोली हो गयी जो non-cancerous है तो जल्दी से जल्दी इसे गलाना और घोल देने का दुनिया में सबसे अछि दावा है " चुना " । चुन वोही जो पान में खाया जाता है, जो पोताई में इस्तेमाल होता है ; पानवाले की दुकान से चुना ले आइये उस चुने को कनक के दाने के बराबर रोज खाइये; इसको खाने का तरीका है पानी में घोल के पानी पी लीजिये, दही में घोल के दही पी लीजिये, लस्सी में घोल के लस्सी पी लीजिये, डाल में मिलाके दाल खा लीजिये, सब्जी में डाल के सब्जी खा लीजिये । पर ध्यान रहे पथरी के रोगी के लिए चुना बर्जित है । 

WHEN DOG BITE YOU........

कुत्ता काटने पर चिकित्सा : 

अगर घरेलु कुत्ता काटे तो कोई दिक्कत नही है पर पागल कुत्ता कटे तो समस्या है। सड़क वाला कुत्ता 


काटले तो आप जानते है नही उसको इंजेक्शन दिए हुए है या नही, उसने काट लिया तो आप डॉक्टर के 

पास जायेंगे फिर वो 14 इंजेक्शन लगाएगा वो भी पेट में लगाता है, उससे बहुत दर्द होता है और खर्च भी हो 

जाता है कम से कम 50000 तक कई बार, गरीब आदमी के पास वो भी नही है । 

कुत्ता कभी भी काटे, पागल से पागल कुत्ता काटे, घबराइए मत, चिंता मत करिए बिलकुल ठीक होगा वो 


आदमी बस उसको एक दावा दे दीजिये । दावा का नाम है Hydrophobinum 200 और इसको 10-10 

मिनट पर जिव में तिन ड्रोप डालना है । कितना भी पागल कुत्ता काटे आप ये दावा दे दीजिये और भूल 

जाइये के कोई इंजेक्शन देना है। इस दावा को सूरज की धुप और रेफ्रीजिरेटर से बचाना है। रेबिस सिर्फ 

पागल कुत्ता काटने से ही होता है पर साधारण कुत्ता काटने से रेबिस नही होता। आवारा कुत्तों अगर काट 

दिया है तो आप अपना मन का बहम दूर करने के लिए ये दावा दे सकते है लेकिन 

उससे कुछ नही होता वो हमारा मन का बहम है जिससे हम परिसान रहते है, और कुछ डर डॉक्टरों ने 

बिठा रखा है के इंजेक्शन तो लेना ही पड़ेगा। अपने शारीर में थोड़े बहुत resistance सबके पास है अगर 

कुत्ते के काटने से उनके लारग्रंथी के कुछ वायरस चले भी गये है तो उनको ख़तम करने के लिए हमारे 

रक्त में काफी कुछ है और वो ख़तम कर हि लेता है । लेकिन क्योंकि मन में भय बिठा दिया है शंका हो 

जाती है हमको confirm नही होता जबतक 20000-50000 खर्च नही कर लेते ये उस समय

 ये दावा लेने की बात कही है। और इसका एक एक ड्रोप 10-10 मिनट में जिव पे तिन बार डाल के 

छोड़ दीजिये । 30 मिनट में ये दावा सब काम कर देगा । 

कई बार कुत्ता घर के बच्चों से साथ खेल रहा होता है और गलती से उसका कोई दाँत लग गया तो आप 


उस जखम में थोडा हल्दी लगा दीजिये पर साबुन से उस जखम को बिलकुल मत धोये नही तो वो पक 

जायेगा; हल्दी Antibiotic, Antipyretic, Antititetanatic, Antiinflammatory है।

REMEDY FOR STOMACH PROBLEMS AND PILES ALSO

अगर आपकी पेट ख़राब है दस्त हो गया है , बार बार आपको टॉयलेट जाना पड़ रहा है तो इसकी सबसे अछि दावा है जीरा | अध चम्मच जीरा चबाके खा लो पीछे से गुनगुना पानी पी लो तो दस्त एकदम बंध हो जाते है एक ही खुराख में |

अगर बहुत जादा दस्त हो ... हर दो मिनिट में आपको टॉयलेट जाना पड़ रहा है तो आधा कप कच्चा दूध ले लो बिना गरम किया हुआ और उसमे निम्बू डालके जल्दी से पी लो | दूध फटने से पहले पीना है और बस एक ही खुराक लेना है बस इतने में ही खतरनाक दस्त ठीक हो जाते है |

और एक अछि दावा है ये जो बेल पत्र के पेड़ पर जो फल होते है उसका गुदा चबाके खा लो पीछे से थोडा पानी पी लो ये भी दस्त ठीक कर देता है | बेल का पाउडर मिलता है बाज़ार में उसका एक चम्मच गुनगुना पानी के साथ पी लो ये भी दस्त ठीक कर देता है |

पेट अगर आपका साफ़ नही रहता कब्जियत रहती है तो इसकी सबसे अछि दावा है अजवाईन | इसको गुड में मिलाके चबाके खाओ और पीछे से गरम पानी पी लो तो पेट तुरंत साफ़ होता है , रात को खा के सो जाओ सुबह उठते ही पेट साफ होगा |

और एक अछि दावा है पेट साफ करने की वो है त्रिफला चूर्ण , रात को सोते समय एक चम्मच त्रिफला चूर्ण ले लो पानी के साथ पेट साफ हो जायेगा |

पेट जुडी दो तिन ख़राब बिमारिय है जैसे बवासीर, पाईल्स, हेमोरोइड्स, फिसचुला, फिसर .. ये सब बिमारिओ में अछि दावा है मुली का रस | एक कप मुली का रस पियो खाना खाने के बाद दोपहर को या सबेरे पर शाम को मत पीना तो हर तरेह का बवासीर ठीक हो जाता है , भगंदर ठीक होता है फिसचुला, फिसर ठीक होता है .. अनार का रस पियो तो भी ठीक हो जाता है |

Sunday, September 22, 2013

HERBAL REMEDY FOR FEVER AND GATHIYA

गठिया या संधिबात का सबसे अछि दावा है मेथी, हल्दी और सुखा हुआ अदरक माने सोंठ , इन तीनो को 

बराबर मात्रा में पिस कर, इनका पावडर बनाके एक चम्मच लेना गरम पानी के साथ सुभाह खाली पेट तो 

इससे घुटनों का दर्द ठीक होता है, कमर का दर्द ठीक होता है, देड़ दो महिना ले सकता है । 


और एक अछि दावा है , एक पेड़ होता है उसे हिंदी में हरसिंगार कहते है, संस्कृत पे पारिजात कहते है, 

बंगला में शिउली कहते है , उस पेड़ पर छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और फुल की डंडी नारंगी रंग की 

होती है, और उसमे खुसबू बहुत आती है, रात को फूल खिलते है और सुबह जमीन में गिर जाते है । इस 

पेड़ के पांच पत्ते तोड़ के पत्थर में पिस के चटनी बनाइये और एक ग्लास पानी में इतना गरम करो के 

पानी आधा हो जाये फिर इसको ठंडा करके रोज सुबह खाली पेट पियो तो बीस बीस साल पुराना गठिया का 

दर्द इससे ठीक हो जाता है । और येही पत्ते को पिस के गरम पानी में डाल के पियो तो बुखार ठीक कर 

देता है और जो बुखार किसी दावा से ठीक नही होता वो इससे ठीक होता है ; जैसे चिकनगुनिया का बुखार, 

डेंगू फीवर, Encephalitis , ब्रेन मलेरिया, ये सभी ठीक होते है । 



बुखार की और एक अछि दावा है अपने घर में तुलसी पत्ता ; दस पन्दरा तुलसी पत्ता तोड़ो, तिन चार 

काली मिर्च ले लो पत्थर में पिस के एक ग्लास गरम पानी में मिलके पी लो .. इससे भी बुखार ठीक होता है


बुखार की एक और दावा है नीम की गिलोय, अमृता भी कहते है, उडूनची भी कहते है, इसको थोडासा चाकू 

से काट लो , पत्थर में कुचल के पानी में उबाल लो फिर वो पानी पी लेना तो ख़राब से ख़राब बुखार ठीक हो 

जाता है तिन दिन में । कभी कभी बुखार जब बहुत जादा हो जाते है तब खून में सेत रक्त कनिकाएं , 

प्लेटलेट्स बहुत कम हो जाते है तब उसमे सबसे जादा काम आती है ये गिलोय ।