Friday, April 11, 2014

USES OF BAEL (Aegle marmelos)







बेल पत्र के औषधीय प्रयोग ----
- बेल पत्र के सेवन से शरीर में आहार के पोषक तत्व अधिकाधिक रूप से अवशोषित होने लगते है |
- मन एकाग्र रहता है और ध्यान केन्द्रित करने में सहायता मिलती है |
- इसके सेवन से शारीरिक वृद्धि होती है |
- इसके पत्तों का काढा पीने से ह्रदय मज़बूत होता है |
- बारिश के दिनों में अक्सर आँख आ जाती है यानी कंजक्टिवाईटीस हो जाता है . बेल पत्रों का रस आँखों में डालने से ; लेप करने से लाभ होता है |
- इसके पत्तों के १० ग्राम रस में १ ग्रा. काली मिर्च और १ ग्रा. सेंधा नमक मिला कर सुबह दोपहर और शाम में लेने से अजीर्ण में लाभ होता है |
- बेल पत्र , धनिया और सौंफ सामान मात्रा में ले कर कूटकर चूर्ण बना ले , शाम को १० -२० ग्रा. चूर्ण को १०० ग्रा. पानी में भिगो कर रखे , सुबह छानकर पिए | सुबह भिगोकर शाम को ले, इससे प्रमेह और प्रदर में लाभ होता है | शरीर की अत्याधिक गर्मी दूर होती है |
- बरसात के मौसम में होने वाले सर्दी , खांसी और बुखार के लिए बेल पत्र के रस में शहद मिलाकर ले |
- बेल के पत्तें पीसकर गुड मिलाकर गोलियां बनाकर रखे. इसे लेने से विषम ज्वर में लाभ होता है |
- दमा या अस्थमा के लिए बेल पत्तों का काढा लाभकारी है|
- सूखे हुए बेल पत्र धुप के साथ जलाने से वातावरण शुद्ध होता है|
- पेट के कीड़ें नष्ट करने के लिए बेल पत्र का रस लें|
- एक चम्मच रस पिलाने से बच्चों के दस्त तुरंत रुक जाते है |
- संधिवात में बेल पत्र गर्म कर बाँधने से लाभ मिलता है |
- महिलाओं में अधिक मासिक स्त्राव और श्वेत प्रदर के लिए और पुरुषों में धातुस्त्राव हो रोकने के लिए बेल पत्र और जीरा पीसकर दूध के साथ पीना चाहिए|

DIABITIES- AN WONDERFUL IDEA




डायबिटीस में कारगर है शहतूत की पत्तियां

५० ग्राम शहतूत की ताजा हरी साफ़ धुली कोमल पत्तियों को थोडा सा पानी डालकर कुचल लीजिए, पेस्ट तैयार होगा, रोज सवेरे खाली पेट इसका सेवन करें, मधुमेह में बेहद असरकारक है। एक महिने तक आजमाकर देखें, उम्मीद है मुझे कि परिणाम सकारात्मक नज़र आएंगे..छोटा सा, आसान से नुस्खा है,

Monday, April 7, 2014

BENEFITS OF HONEY



 शहद जितना पुराना होता है उतना ही श्रेष्ठउ भी होता है । समय के साथ साथ शहद का रंग बदलने लगता है तथा लौह-तत्व भी बढ़ता जाता है। हैरतंगेज बात तो यह है कि 1923 ई. मे मिस्त्र के फराओ नूनन खामेन के पिरामिड में रूसी वैज्ञानिक को एक शहद से भरा पात्र मिला। उस समय हैरत में डाल देने वाली बात यह थी कि यह शहद 3300 वर्ष पुराना होने के बावजूद खराब नहीं हुआ था। उसके स्वाद और गुण में कोई अंतर नहीं आया था।

1.शहद को दूध में मिला दे तो यह श्रेष्ठ और सम्पूर्ण आहार बन जाता है और रक्त में हीमोग्लोबिन निर्माण में मदद करता है।10 ग्राम शहद से 55 कैलोरी ऊर्जा मिलती है जो कि अन्य खाद्य पदार्थो में लगभग 7 अण्डों के, 130 ग्राम दूध के, 80 ग्राम प्लम के, 190 ग्राम हरे मटर के, 130 ग्राम सेब व 200 ग्राम गाजर के बराबर होती है।

2. शहद में सभी शरीर के लिए उपयोगी तत्व (कार्बोहाइड्रेट्स, खनिज, अमीनो एसिड, प्रोटीन्स, मैग्नीशियम, पोटेशियम, केल्शियम, सोडियम किलोरिन, आयरन और विटामिन्स) पाए जाते हैं। शरीर में इन तत्वों की कमी होने से रोगों की सम्भावना तेज हो जाती है शहद में इन तत्वों की मोजुदगी शरीर को रोगों से बचाता हैं।

3.शहद में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स होता है, इसमें मोजूद एंजाइम्स जो की जो की भूख बढ़ाने में सहायक है शुद्ध शहद के प्रतिदिन सेवन से उम्र लंबी होती है इसके लिए किसी जड़ी या संजीवनी बूटी की आवश्यीकता नहीं है।

4.शहद कि गुणवत्ता मधुमक्खियों दुवारा बनाये जाने वाले छत्ते के स्थान पर निर्भर करता है छत्ते के आसपास लगे फूलों के गुण शहद में संचित रहते है। नीम पर लगे छत्ते का शहद आँखों के लिए, जामुन पर लगे छत्ते का शहद मधुमेह के लिए, सहजने पर लगे छत्ते का शहद हृदय, वात तथा रक्तचाप के लिए अधिक उपयोगी होता है। शहद शीघ्र हजम होकर रक्त में मिल जाता है। शहद को दूध, दही, पानी, सब्जी, सूप, फलों के रस में मिलाकर सेवन कर सकते हैं। सर्दियों में शहद का सेवन गुनगुने दूध या पानी से करना चाहिये।

शहद एक औषधि:-
1.शहद में मोजूद विटामिंस (B और C)त्वचा को एलर्जी से बचाता है।
2.शहद को खाने से मस्तिष्क स्वस्थ और पुष्ट होता है।
3.शहद को नींबू के रस में लेने से गहरी नींद आती है।
4.शहद चाटने से लगातार आ रही हिचकी रुक जाती है।
5.शहद में अदरक का रस मिलाकर लेने से खाँसी से राहत मिलती है।
6.शहद में एक बडी इलायची पीसकर पीने से पेट दर्द में फायदा होता है।
7.शहद शूगर की मात्रा को कोलस्ट्रोल को नियंत्रित करता है। और साथ ही शरीर को ऊर्जावान बनाता है ।
8.खट्टे फलों मोसमी, निम्बू, संतरा, अंगूर, अमरूद, गन्ना, टमाटर के साथ शहद का सेवन अमृत के 
सामान है।

9.शहद को एक शानदार एंटीबैक्टीरियल और एंटिसेप्टिक माँना जाता रहा है। चोट, घाव और जले के घाव पर शहद लगाने से ये जल्दी ठीक हो जाते हैं तथा निशान भी नहीं पडते, सूजन और दर्द में भी आराम मिलता हैं और घावों से आने वाली दुर्गंध भी नष्ट होती है। शहद से नुकसान दायक बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं शहद की पट्टी बांधने से मृत कोशिकाये पुष्ट हो जाती है।

10.शहद में एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी पाए जाते हैं, जो रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाते हैं। ये कैंसर और ह्रदय की बीमारियों को भी रोकता हैं। और शक्ति का संचार होता है।

11.शहद किडनी और आँतों को ठीक रखता है शहद को हमारे शरीर के खून को भी साफ करता हैं।
12.शहद के नियमित सेवन से हीमोग्लोबिन बढता हैऔर शरीर में रक्त की कमी दूर हो जाती है।
13.शहद में अदरक और तुलसी के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन से जुकाम ठीक होता है।
14.शहद शीघ्रता से पच जाती है। आंतों को विश्राम मिलता है। थकान होने पर शहद का उपयोग थकान से तत्काल राहत देता है।

15.सुबह खाली पेट नीबू और शहद का सेवन से वजन बिना किसी दोष के कम हो जाता है।
16.सुबह नियमित शहद और नीबू का उपयोग गुनगुने पानी से करने पर मोटापा घटता है, कब्ज दूर होता है, रक्त को शुद्ध करता है।

17.बादाम को भिगोकर पीस लें और इसे शहद मिले दूध में मिलाकर पूरे परिवार को पिलाने से परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ होंगे।

18.प्याज का रस और शहद मिलाकर सेवन से उल्टी और हिचकी में रोक लगती है और फेफड़े और गले में जमा कफ भी निकल जाता है।

19.शहद को दूध के साथ मिलकर कुछ दिन सेवन करने से पेट और आंतो के छोटे-छोटे शुरुआती घाव ठीक हो जाते है निर्बल आमाशय व आँतों को बल मिलता है।

20.समान मात्रा में शहद व नींबू का रस सेवन करने से सूखी खाँसी में लाभ होता है और शहद व अदरक का रस मिलाकर चाटने से सांसो की तकलीफ और खाँसी में भी आराम आता है और हिचकियाँ भी बंद हो जाती हैं।

21.रात को एक गिलास दूध में शहद मिलकर पीने से दुबलापन दूर होकर शरीर स्वस्थ, सुंदर,चुस्त, सुडौल, ह्रष्ट -पुष्ट व मजबूत बनता है और आयु को बढ़ता है।

22.मोटापा बढ़ाने के लिए शहद को दूध में मिलाकर पिएं।

23.शहद में विटामिन ‘ए’ और ‘बी’ की मोजुदगी आँखों की ज्योति को बढ़ाता है व भूख बढती है ।

24.शहद व नींबू गुनगुने पानी के सेवन से चुस्ती -स्फूर्ति आती है और कमजोरी भी दूर हो जाती है।

25.गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर गरारे करने से गला साफ़ होता है और आवाज खुल जाती है।

26.कब्ज होने पर सुबह-शाम शहद को गुनगुने पानी में मिलाकर पीए। प्रातः शहद-नींबू का गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से रक्त शुद्ध होता है व कब्ज तथा मोटापे को दूर करता है।

27.पोदीने के रस के साथ शहद का प्रयोग उल्टी को शांत करता है।

28.लहसुन और शहद के नियमित सेवन से रक्तचाप सामान्य रहता है।

29.टमाटर या संतरे के रस में शहद डालकर सेवन करने से कब्ज में लाभ होता है।

30.मीठे आम का रस और शहद मिलाकर पीने से पीलिया के रोग में आराम आता है।

Saturday, April 5, 2014

BENEFITS OF CHUNA (LIMESTONE)




चूना जो पान में लगा के खाया जाता है , उसकी एक डिब्बी ला कर घर में रखे .
- यह सत्तर प्रकार की बीमारियों को ठीक कर देता है 
. गेहूँ क दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक हो जाता है .
- चूना नपुंसकता की सबसे अच्छी दवा है - अगर किसी के शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे 

. जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उन्हें भी इस चूने का सेवन करना चाहिए .
- विद्यार्थीओ के लिए चूना बहुत अच्छा है जो लम्बाई बढाता है - गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिला के खाना चाहिए, दही नही है तो दाल में मिला के या पानी में मिला के लिया जा सकता है - इससे लम्बाई बढने के साथ साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छी होती है । जिन बच्चों की बुद्धि कम है ऐसे मतिमंद बच्चों के लिए सबसे अच्छी दवा है चूना . जो बच्चे बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करता है, देर में सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अच्छे हो जायेंगे ।
- बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अच्छी दवा है चूना । मेनोपौज़ की सभी समस्याओं के लिए गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना चाहिए . इससे ओस्टीओपोरोसिस होने की संभावना भी नहीं रहती .
 

- जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है . गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए अनार के रस में - अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये तो चार फायदे होंगे - पहला फायदा होगा के माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नॉर्मल डीलिवरी होगी , दूसरा बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हृष्ट पुष्ट और तंदुरुस्त होगा , तीसरा फ़ायदा वो बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया , और चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत Intelligent और Brilliant होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है .
 

- चूना घुटने का दर्द ठीक करता है , कमर का दर्द ठीक करता है , कंधे का दर्द ठीक करता है, एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो चुने से ठीक होता है . कई बार हमारे रीढ़ की हड्डी में जो मनके होते है उसमे दूरी बढ़ जाती है Gap आ जाता है जिसे ये चूना ही ठीक करता है . रीढ़ की हड्डी की सब बीमारिया चूने से ठीक होती है . अगर हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है . इसके लिए चूने का सेवन सुबह खाली पेट करे .
- अगर मुंह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाने से बिलकुल ठीक हो जाता है , मुंह में अगर छाले हो गए है तो चूने का पानी पिने से तुरन्त ठीक हो जाता है । 

शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए , एनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अच्छी दवा है ये चूना . गन्ने के रस में , या संतरे के रस में , नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में डाल कर चूना ले . अनार के रस में चूना पिने से खून बहुत बढता है , बहुत जल्दी खून बनता है - एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट ले .
- भारत के जो लोग चूने से पान खाते है, बहुत होशियार है और वे महर्षि वाग्भट के अनुयायी है . पर पान बिना तम्बाखू , सुपारी और कत्थे के ले . तम्बाखू ज़हर है और चूना अमृत है . कत्था केन्सर करता है, पान में सौंठ , इलायची , लौंग , केसर , सौंफ , गुलकंद , चूना , कसा हुआ नारियल आदि डाल के खाए .
- अगर घुटने में घिसाव आ गया हो और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हरसिंगार ( पारिजातक या प्राजक्ता ) के पत्ते का काढ़ा पीजिये , घुटने बहुत अच्छे काम करेंगे ।

Thursday, April 3, 2014

BENEFITS OF DAHI (CURD)



दही
 दही लाभप्रद है सुंदरता और सेहत के लिए :
दही औषधि भी है और सौंदर्यवर्ध्दक भी
* दही में कैल्शियम और प्रोटीन की प्रचूर मात्रा होती है जो हड्डियों की मजबूती, विकास और दांतों के लिए निहायत जरूरी है।
* दही में मौजूद बैक्टीरिया हमारी त्वचा को नर्म बनाते हैं और सनबर्न से रक्षा करते हैं।
* तेल में दही बराबर मात्रा में मिलाएं और इस मिश्रण से सिर के स्कैल्प (सिर की त्वचा) की मालिश हल्के हाथों से करें और 40-45 मिनट तक मिश्रण लगा रहने दें। बाद में गुनगुने पानी से बाल धो लें। बाल नर्म और चमकदार हो जायेंगे।
* बालों को डैंड्रफ से बचाने के लिए बालों में खट्टा दही लगायें। काफी प्रभावी है।
* पीलिया के रोगियों को दही खाने के लिए बताया जाता है क्योंकि दही आसानी से पच जाता है और स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद भी होता है।
* दही के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रोल लेवल कम होता है।
* यदि खाना अधिक मसालेदार बना हो तो उसके साथ दही का सेवन उसके तीखेपन को कम करता है और खाना आसानी से खाया जा सकता है।
* दही के नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
* खाना खाने के बाद दही में चुटकी भर काला नमक और अजवायन मिला कर खाने से वायु रोग में आराम मिलता है।
* गर्मियों में दही से बनी लस्सी गर्मी दूर भगाने में सहायक होती है। यह एक शीतल पेय है जिसे पीने के बाद शरीर को गर्मी से राहत मिलती है।
* दही में नीम की कोंपल पीस कर फोड़े फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।
* दही में बेसन मिला कर त्वचा की सफाई आराम से होती है।
* दही में आटे का चोकर मिलाकर दस मिनट रखें। उसके बाद उसका प्रयोग उबटन के रूप में करें। इससे त्वचा में चमक बनी रहती है।
* दही में मुलतानी मिट्टी मिला कर बालों पर लगाने से बाद में धोने से बाल मुलायम व घने होते हैं।
* दही में नींबू का रस मिलाकर क्लींजर के रूप में उपयोग कर सकते हैं इससे चेहरे का रंग निखरता है।

Wednesday, April 2, 2014

CONSTIPATION- HOW TO REMOVE ....?




कब्ज का प्राकृतिक उपचार

1. मैदा से बने खाद्द पदार्थ जैसे बिस्कुट, ब्रेड, केक, पेस्ट्रीज आदि, अधिक मांसाहार, मिर्च मसाले, अधिक चाय व कॉफ़ी इन सब को छोड़ना होगा|
2. आहार में फल और सब्जियों का अधिक प्रयोग करें|
3.खाने में सादा भोजन करे जैसे फल, सब्जियां, गेहूं की चपाती, मुंग, मसूर, घी और दूध|
4. भोजन को अच्छी तरह से चबाकर खाएं| हर एक निवाले को 15 से 20 बार तक अवश्य चबाना चाहिए|
5. शक्कर से बने पदार्थों से परहेज करना चाहिए|
6. पानी पीने में कमी न करें|
7. भोजन के फ़ौरन बाद या पहले पानी नहीं पीना चाहिए| भोजन और पानी के बीच कम से कम डेढ़ घंटे का अंतर होना चाहिए|
8. केला और कटहल को छोड़कर सभी फल कब्ज को ठीक करने में सहायक होते हैं|
9. नाशपाती कब्ज को ठीक करने में काफी सहायक होती है|
10. अमरुद भी कब्ज ठीक करने में लाभकारी है|
11. कब्ज से छुटकारा पाने में अंगूर भी पर्याप्त मददगार है|
12. जिन लोगों को सामान्य कब्ज होती है वह पांच दिनों तक केवल फल ही खाएं|
13. जिन लोगों को पुरानी और भयंकर कब्ज होती है उन्हें चार से पांच दिन का उपवास रखना चाहिए| 14. अगर कब्ज के रोगी शारीरक रूप से कमजोर हैं तो वह उपवास के समय संतरे का जूस ले सकते हैं|उपवास के बाद एकदम से ठोस आहार खाना शुरू ना करें| शुरू में फल और सब्जियां ही खाएं| फिर कुछ दिनों बाद हल्का खाना लें जैसे दलिया या खिचड़ी| इसी तरह धीरे धीरे बढाते हुए ठोस आहार पर जाएँ|
15.प्राणयाम और योगासन करने से भी कब्ज ठीक हो जाता है| प्राणयाम और योगासन रोजाना करें इससे आँतें स्वस्थ रहेंगी|

BENEFITS OF RICS



चावल के घरेलू नुस्खे

यदि रात्रि के भोजन में रोटी कम खाएं और चावल प्रतिदिन खाएं तो यह हलका भोजन आपका स्वास्थ्य ठीक रखेगा।
तीन साल पुराना चावल काफी स्वादिष्ट व ओजवर्धक होता है। चावल को मांड सहित खाना चाहिए। मांड अलग कर देने से चावल के प्रोटीन, खनिज, विटामिन्स निकल जाते हैं और यह बेकार भोजन कहलाता है।
मांड यानी चावल पकाते समय बचा हुआ गाढ़ा सफेद पानी होता है। इसमें प्रोटीन, विटामिन्स व खनिज होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। जिनका पेट कमजोर हो यानी जो आसानी से भोजन न पचा पाते हों, उन्हें चावल में दूध मिलाकर 20 मिनट तक ढंककर रख दें, फिर खिलाएं तो आराम होगा।
चावल के औषधीय उपयोग भी हैं, कई रोगों में यह लाभ करता है। सीने में या पेट में जलन, सूजाक, चेचक, मसूरिका, मूत्रविकार में नीबू के रस व नमक रहित चावल का मांड या कांजी सेवन करने से लाभ होता है।
इसी प्रकार चावल, दाल (खासकर मूंग की), नमक, मिर्च, हींग, अदरक, मसाले मिलाकर बनाई गई खिचड़ी में घी मिलाकर सेवन करने से शरीर को बल मिलता है, बुद्धि विकास होता है व पाचन ठीक रहता है।
* अतिसार में चावल का आटा लेई की भांति पकाकर उसमें गाय का दूध मिलाकर रोगी को सेवन कराएं।
* पेट साफ न हो तो भात में दूध व शकर मिलाकर सेवन करने से दस्त के साथ पेट साफ हो जाता है।
  इसी के विपरीत भात को दही के साथ मिलाकर खाने से यदि दस्त लगे हों तो बंद हो जाते हैं।
* यदि भांग का नशा ज्यादा हो गया हो तो चावल धोकर निकाले पानी में खाने का सोडा दो चुटकी व शकर मिलाकर पिलाने से नशा उतर जाता है। यही पेय मूत्र विकार में भी काम आता है।
* सूर्योदय से पूर्व चावल की खील 25 ग्राम लेकर शहद मिलाकर खाकर सो जाएं। सप्ताहभर में आधासीसी सिर दर्द दूर हो जाएगा।

USES OF MINT (PUDINA)



गर्मी में पुदीना खाने का टेस्ट बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। ये एक बहुत अच्छी औषधि भी है साथ ही इसका सबसे बड़ा गुण यह है कि पुदीने का पौधा कहीं भी किसी भी जमीन, यहां तक कि गमले में भी आसानी से उग जाता है। यह गर्मी झेलने की शक्ति रखता है। इसे किसी भी उर्वरक की आवश्यकता नहीं पडती है।
थोड़ी सी मिट्टी और पानी इसके विकास के लिए पर्याप्त है। पुदीना को किसी भी समय उगाया जा सकता है। इसकी पत्तियों को ताजा तथा सुखाकर प्रयोग में लाया जा सकता है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं पुदीने के कुछ लाजवाब गुण
1.मुंहासे दूर करता है
2.श्वांस संबंधी परेशानियों में रामबाण
3.कैंसर में भी है उपयोगी
4. मुंह की दुर्गंध मिटाता है
5. खांसी खत्म करता है
6. गर्मी दूर कर ठंडक पहुंचाता है
7.बुखार में राहत देता है

- हरा पुदीना पीसकर उसमें नींबू के रस की दो-तीन बूँद डालकर चेहरे पर लेप करें। कुछ देर लगा रहने दें। बाद में चेहरा ठंडे पानी से धो डालें।
- कुछ दिनों के प्रयोग से मुँहासे दूर हो जाएँगे तथा चेहरा निखर जाएगा।
- हरे -पुदीने की 20-25 पत्तियां, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2-3 दाने इन सबको पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें।
-इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।

- एक चम्मच पुदीने का रस, दो चम्मच सिरका और एक चम्मच गाजर का रस एकसाथ मिलाकर पीने से श्वास संबंधी विकार दूर होते हैं।
- इतना ही नहीं अधिक गर्मी या उमस के मौसम में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और -आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है।

- एक रिसर्च से पता चला है कि यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी में लाभकारी है ।
- इसलिए हमें अपने घर के बगीचे में पुदीने का पौधा जरूर लगाना चाहिए,पुदीने का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से ज्वर दूर हो जाता है।
- पेट में अचानक दर्द उठता हो तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करे।

- नकसीर आने पर प्याज और पुदीने का रस मिलाकर नाक में डाल देने से नकसीर के रोगियों को बहुत लाभ होता है।
- सलाद में इसका उपयोग स्वास्थ्यवर्धक है। प्रतिदिन इसकी पत्ती चबाई जाए तो दुत क्षय, मसूडों से रक्त निकलना, पायरिया आदि रोग कम हो जाते हैं। यह एंटीसेप्टिक की तरह काम करता है और दांतों तथा मसूडों को जरूरी पोषक तत्व पहुंचाता है। एक गिलास पानी में पुदीने की चार पत्तियों को उबालें। ठंडा होने पर फ्रिज में रख दें। इस पानी से कुल्ला करने पर मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है।
- एक टब में पानी भरकर उसमें कुछ बूंद पुदीने का तेल डालकर यदि उसमें पैर रखे जाएं तो थकान से राहत मिलती है और बिवाइयों के लिए बहुत लाभकारी है।पानी में नींबू का रस, पुदीना और काला नमक मिलाकर पीने से मलेरिया के बुखार में राहत मिलती है। इसके अलावा हकलाहट दूर करने के लिए पुदीने की पत्तियों में काली मिर्च पीस लें तथा सुबह शाम एक चम्मच सेवन करें।पुदीने की चाय में दो चुटकी नमक मिलाकर पीने से खांसी में लाभ मिलता है। हैजे में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।
- हरे पुदीने की 20-25 पत्तियां, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2-3 दाने इन सबको पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें। इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है। इतना ही नहीं अधिक गर्मी या उमस के मौसम में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है।
- पुदीने का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से ज्वर दूर हो जाता है तथा न्यूमोनिया से होने वाले विकार भी नष्ट हो जाते हैं। पेट में अचानक दर्द उठता हो तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें। नकसीर आने पर प्याज और पुदीने का रस मिलाकर नाक में डाल देने से नकसीर के रोगियों को बहुत लाभ होता है।