Wednesday, August 31, 2016

चेहरे को लाल बनाने के लिए विशेष नुस्खा.

चेहरे को लाल टमाटर जैसा बनाने के लिए विशेष जूस और विशेष नुस्खा.

गुलाबी लाल टमाटर जैसा चेहरा, सेब जैसे लाल लाल गाल, गुलाबी नाख़ून हो तो चेहरे की आभा और व्यक्तित्व में चार चाँद लग जाते हैं. लड़के और लड़कियों के लिए विशेष होता है चेहरे का लुक. मगर आज भागदौड़ भरी जिंदगी और सही पोषण ना मिलने से चेहरा सूख कर सफ़ेद हो जाता है और सारा व्यक्तित्व मुरझा जा जाता है. ऐसे में अगर आप रोजाना एक से तीन महीने तक ये जूस पियें तो आपकी पूरी बॉडी ही चमक उठेगी. ये जूस पीने से चेहरे पर ऐसी कान्ति आ जायेगी के देखने वाले भी हैरान हो जायेंगे. आइये जाने इसके बारे में.

आवश्यक सामग्री.

गाजर  –  २५० ग्राम.
अनार  – २५० ग्राम.
चुकंदर – २५० ग्राम
पालक – 100 ग्राम.
शहद या मिश्री – स्वादानुसार

बनाने की विधि

इन सब को अच्छे से साफ़ कर लीजिये और बाद में जूस में डालकर इनका जूस निकाल लीजिये, और इसमें स्वाद के लिए शहद या मिश्री मिला सकते है.. अब इसको घूँट घूँट कर पीना है. इसके पीने का सही समय दोपहर में 2 बजे से ४ बजे के बीच का रखें. और अगर मौसम में गाजर ना मिले तो अनार और चुकंदर का मिश्रित जूस नित्य पिए. ये जूस पीने से चेहरे पर ऐसी कान्ति आ जायेगी के देखने वाले भी हैरान हो जायेंगे.
इसके अलावा जल्द नतीजे लेने के लिए आप ये निम्नलिखित प्रयोग साथ में करें.

किशमिश.

10 ग्राम किशमिश 100 ग्राम पानी में रात को भिगों दें। प्रांत: उठकर यह पानी पी लें और किशमिश खा लें। पंद्रह दिन में एक महीने तक लें। इससे रक्त में लौह ततव

सब्जी जो कैंसर से लेकर सफ़ेद बालो तक लगभग 50 रोगों में फायदेमंद है

एक ऐसी सब्जी जो कैंसर से लेकर सफ़ेद बालो तक लगभग 20 रोगों में फायदेमंद है

सब्जियों में चौलाई का अपना एक अलग स्थान है। दुनिया भर के लोग इसका उपयोग सब्जी और अनाज के रूप में स्वास्थ्य लाभों के रूप में करते है। यह अनेकों औषधीय गुणों से भरपूर होता है।
चौलाई दो तरह की होती है ,एक सामान्य हरे पत्तों 🌿 वाली दूसरी लाल पत्तों वाली। यह कफ और पित्त का नाश करती है जिससे रक्त विकार दूर होते हैं। पेट और कब्ज के लिए चौलाई का साग बहुत उत्तम माना जाता है। चौलाई की सब्जी का नियमित सेवन करने से वात, रक्त व त्वचा विकार दूर होते हैं। सबसे बडा गुण सभी प्रकार के विषों का निवारण करना है, इसलिए इसे विषदन नाम दिया गया है। इसके डंठल और पत्तों में पौष्टिक तत्वों की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। पेट और कब्ज के लिए चौलाई बहुत उत्तम मानी जाती है।
चौलाई में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-ए, मिनिरल्स और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। इसमें सोना धातु पाया जाता है जो किसी और साग-सब्जियों में नहीं पाया जाता। औषधि के रूप में चौलाई के पंचांग यानि पांचों अंग- जड, डंठल, पत्ते, फल, फूल काम में लाए जाते हैं। इसकी डंडियों, पत्तियों में प्रोटीन, खनिज, विटामिन ए, सी प्रचुर मात्रा में है
कहा गया है कि किसी भी तरह के चर्म रोग में इसके पत्ते पीस कर लेप कर 21 दिनों तक लगातार लेप करने से वह ठीक हो जाता है। शरीर में अगर कही भी खून बह रहा है और बंद नहीं हो रहा लाल पत्ते वाली चौलाई की जड़ को पानी में पीस कर पी लेने से ही रुक जाता है। एक बार पीने से नहीं रुक रहा तो बारह घंटे बाद दुबारा पीने को कहा गया है। चाहे गर्भाशय से खून बह रहा हो या मल द्वार से या बलगम के साथ यह सब में उपयोगी बताई गई है। मान्यता है कि गर्भवती को खून दिखाई दे जाए तो फ़ौरन पी ले, गिरता हुआ गर्भ रुक जायेगा। जिनको गर्भ गिरने की बीमारी हो उन महिलाओं के लिये मासिक धर्म के समय में रोज जड़ पीस कर चावलों के पानी के साथ पीने का उल्लेख मिलता है।

एलोवेरा जूस के फायदे

एलोवेरा .🌵 एक औषधीय पौधा है और यह भारत में प्राचीनकाल से ग्वारपाठा या धृतकुमारी नाम से जाना जाता है। यह कांटेदार पत्तियों वाला पौधा है जिसमें रोग निवारण के गुण भरे हैं। औषधि की दुनिया में इसे संजीवनी भी कहा जाता है। इसे साइलेंट हीलर तथा चमत्कारी औषधि भी कहा जाता है।
एलोवेरा के जूस का सेवन करने से शरीर में होने वाले पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सकता है. एलोवेरा में एक जड़ी-बूटी की तरह कई गुण होते हैं. चेहरे के लिए अमृत और औषधीय गुणों का भण्डार है एलोवेरा।।
● इसकी 200 से ज्यादा प्रजातियां हैं लेकिन इनमें से 5 प्रजातियां हीं हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। रामायण, बाइबिल और वेदों में भी इस पौधे के गुणों की चर्चा की गई है। एलोवेरा का जूस पीने से कई वीमारियों का निदान हो जाता है। आयुर्वेदिक पद्धति के मुताबिक इसके सेवन से वायुजनित रोग, पेट के रोग, जोडों के दर्द, अल्सर, अम्लपित्त आदि बीमारियां दूर हो जाती हैं। इसके अलावा एलोवेरा को रक्त शोधक, पाचन क्रिया के लिए काफी गुणकारी माना जाता है। सबसे अच्छी बात तो यह की एलोवेरा जूस का असर सिर्फ 15-20 दिनों में दिखने लगता हैं ।

एनर्जी बढ़ाए :
नियमित रूप से एलोवेरा जूस को पीने से एनर्जी आती है। एलोवेरा जूस में कई तरह के पोषण तत्व, विटामिन और मिनरल होते है जो बॉडी सिस्टम को सुधार होता है और उसे एनर्जी देते है। इसे पीने से शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता भी बढ़ जाती है। एलोवेरा के कांटेदार पत्तियों को छीलकर रस निकाला जाता है। 3 से 4 चम्मदच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है।
➡ बालों और त्वचा की सुंदरता बढ़ाये :
एलोवेरा जूस के सेवन से त्वचा में निखार आने लगता है। इसके नियमित सेवन से आपकी त्वचा लंबे समय तक जवां और चमकदार लगती है। एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों, आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है। एलोवेरा जूस बालों के लिए भी फायदेमंद है। इसको पीने से बालों में चमक आती है, रूसी दूर हो जाती है और टेक्सचर भी अच्छा हो जाता है। एलोवेरा का जूस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ्य होते हैं।
➡ अच्छा पाचक :
एलोवेरा जूस में प्रचुर मात्रा में पाचक तत्व विद्यमान होते हैं। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह पेट के रोगो में बहुत फायदा करता है। एलोवेरा जूस के नियमित सेवन से कब्ज की समस्या भी दूर हो जाती है।
➡ डिटॉक्स जूस :
हमारे शरीर में मौजूद कई तरह के विषैले तत्व त्वचा को खराब और बॉडी सिस्टम पर बुरा प्रभाव डालते हैं। इसलिए बॉडी को डिटॉक्स करने की जरूरत होती है। एलोवेरा जूस एक अच्छा डिटॉक्सीफिकेशन करने वाला पेय है।
➡ वजन कम करें :
नियमित रूप से एलोवेरा जूस पीने से बढ़ा हुआ वजन कम होने लगता है। और इसे पीने से बार-बार खाने की आदत भी दूर हो जाती है और आपकी पाचन क्रिया भी दुरूस्त रहती है। एलोवेरा जूस में कई पोषक तत्व होते है जो शरीर का कमजोर नहीं होने देते है।
➡ दांतों के लिए लाभकारी :
एलोवेरा जूस दांतों के स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होता है। इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोवाइल गुण दांतों को साफ और कीटाणु मुक्त रखने में मदद करते है। एलोवेरा जूस को माउथ फ्रेशनर के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। एलोवेरा के जूस को मुंह में भरने से छाले और बहने वाले खून को भी रोका जा सकता है।

▶ आइये अब संक्षेप में जानते है 🌵एलोवेरा के गुणों के बारे में ◀
• नजले-खांसी में एलोवेरा का रस दवा का काम करता है. इसके पत्ते को भूनकर रस निकाल लें और आधा चम्मच जूस एक कप गर्म पानी के साथ लेने से नजले-खांसी में फायदा होता है।
• जलने या चोट लगने पर एलोवेरा जेल या एलोवेरा को छिलकर लगाने से आराम मिलता है. जली हुई जगह पर एलोवेरा जेल लगाने से छाले भी नहीं निकलते और तीन-चार बार लगाने से जलन भी खत्म हो जाती है।
• एलोवेरा का रस बालों में लगाने से बाल काले, घने और मुलायम रहते हैं।
• एलोवेरा का रस बवासीर, डायबिटीज और पेट की परेशानियों से निजात दिलाने में मदद करता है।
• एलोवेरा से मुहांसे, रूखी त्वचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों और आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है।
• एलोवेरा गंजेपन को भी दूर करने की ताकत रखता है।
• एलोवेरा का जूस पीने से कब्ज की बीमारी दूर होती है।
• एलोवेरा के जूस से शरीर में खून की कमी को दूर किया जा सकता है।
• फटी एड़ियों पर एलोवेरा लगाने से बहुत जल्दी ठीक हो जाती हैं।
• एलोवेरा का जूस ब्लड में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है।
• एलोवेरा का रस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार और स्वस्थ होते हैं।

Monday, August 29, 2016

प्याज़ का रस: बालों को उगाए, बालों को झड़ने से रोके, सफ़ेद बालों को काला करे …

बालों को घना और लम्बा करने में –

इस  प्रक्रिया में हम आपको बतायेंगे के केसे एक लाल रंग का प्याज भूरे रंग के बालों का उगना और बालों का झडना रोक सकता है | हमारे बालों का विकास  हमारे जींस (Genes) पर निर्भर करता है , लेकिन कई कारणों की वजेह से हमारे बालों का विकास रुक जाता है या कम हो जाता है | यह  विधि आप के लिए लाभदायक तो होगी ही बल्कि आगे चल कर आपके बच्चों  को भी लाभ देगी |

विधि :–

बालों को झड़ने से रोकने के लिए बालों पर प्याज़ के प्रयोग का सबसे बेहतरीन तरीका प्याज का रस के रूप में प्रयोग करना है। प्याज के रस के फायदे, 3-5 प्याज छीलें और उन्हें अच्छे से पीस लें। इस पेस्ट को अपने हाथों से निचोड़कर इसका रस निकाल लें। अब इस रस को अपने सिर पर तथा बालों पर लगाएं। अब इस रस को सिर पर आधे घंटे तक रहने दें एवं एक हलके शैम्पू का प्रयोग करके इसे धो दें। हफ्ते में 3 बार इस पद्दति का इस्तेमाल करने से मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होगी। तुरंत अच्छे परिणाम पाने की आशा ना करें क्योंकि प्राकृतिक उपचारों में काफी समय लगता है।

दोबारा से बालों को उगाए –

एक कटोरी में 2 चम्मच शहद लें और इसमें एक चौथाई कप प्याज का रस डालें। इन दोनों को अच्छे से मिलाएं एवं सिर पर मसाज करते हुए धीरे धीरे लगाएं। बेहतरीन परिणामों के लिए इस प्रक्रिया का प्रयोग हफ्ते में 3 बार करें।

प्‍याज, ऑलिव ऑयल, नारियल तेल पैक-

इस पैक को बनाने के लिये कुछ प्‍याज ले कर पीस लीजिये और उसका रस निकाल लीजिये। उसमें चम्‍मच ऑलिव ऑयल और नारियल तेल मिलाइये। इस मिश्रण को बालों में लगाइये, जड़ों में इस तेल को न लगाएं। इसे 2 घंटे तक लगा रहने के बाद शैंपू से धो लें। इस पैक को आप रोज लगा सकते  हैं।

पलाश : वीर्य विकार, यौन शक्ति से लेकर लिंग की दृढ़ता तक 28 रोगों का रामबाण उपाय

  • प्रकृति ने हमें सब कुछ दिया है मगर जब तक आपको किसी भी वनस्पति की जानकारी नहीं है आपके लिए व्यर्थही है लेकिन जब आप उसके सहीगुणों को जान और पहचान जाते है तब आप कह उठते है अरे ये तो हमें पहले नहीं पता था इसी में एक नाम है “पलाश”
  • पलाश वीर्य विकार को दूर कर के उत्तम वाजीकरण है, पुरुषों के लिंग कि दृढ़ता शीघ्रपतन, स्तम्भन और शुक्र के शोधन में बहुत ही गुणकारी है, इसके साथ साथ ये बांझपन में भी अति श्रेष्ठ औषिधि है, आइये जानते हैं इसके गुण और उपयोग कि विधि।
  • इसे विभिन्न नामो से जाना जाता है -इसे ढाक-टेशू -पलाश-गुजराती में खाकरा-तमिल में पुगु-कतुमुसक-किन्जुल आदि नामों से पुकारते है।
➡ पलाश के औषधीय गुण : 
  1. दूध के साथ प्रतिदिन एक Palaash(पलाश) पुष्प पीसकर दूध में मिला के गर्भवती माता को पिलायें-इससे बल-वीर्यवान संतान की प्राप्ति होती है।
  2. यदि अंडकोष बढ़ गया हो तो पलाश की छाल का 6 ग्राम चूर्ण पानी के साथ निगल लीजिये।
  3. नारी को गर्भ धारण करते ही अगर गाय के दूध में पलाश के कोमल पत्ते पीस कर पिलाते रहिये तो शक्तिशाली और पहलवान बालक पैदा होगा।
  4. यदि इसी पलाश के बीजों को मात्र लेप करने से नारियां अनचाहे गर्भ से बच सकती हैं।
  5. पेशाब में जलन हो रही हो या पेशाब रुक रुक कर हो रहा हो तो पलाश के फूलों का एक चम्मच रस निचोड़ कर दिन में बस 3 बार पी लीजिये।
  6. बवासीर के मरीजों को पलाश के पत्तों का साग ताजे दही के साथ खाना चाहिए लेकिन साग में घी ज्यादा चाहिए।
  7. बुखार में शरीर बहुत तेज दाहक रहा हो तो पलाश के पत्तों का रस लगा लीजिये शरीर पर 15 मिनट में सारी जलन ख़त्म हो जाती है।
  8. जो घाव भर ही न रहा हो उस पर पलाश की गोंद का बारीक चूर्ण छिड़क लीजिये फिर देखिये।
  9. फीलपांव या हाथीपाँव में पलाश की जड़ के रस में सरसों का तेल मिला कर रख लीजिये बराबर मात्रा में और फिर सुबह शाम 2-2 चम्मच पीजिये।
  10. नेत्रों की ज्योति बढानी है तो पलाश के फूलों का रस निकाल कर उसमें शहद मिला लीजिये और आँखों में काजल की तरह लगाकर सोया कीजिए- अगर रात में दिखाई न देता हो तो पलाश की जड़ का अर्क आँखों में लगाइए।
  1. नपुंसकता की चिकित्सा के लिए भी इसके बीज काम आते हैं अन्य दवाओं में मिला के इसका प्रयोग होता है।
  2. शरीर में अन्दर कहीं गांठ उभर आयी हो तो इसके पत्तों को गर्म करके बांधिए या उनकी चटनी पीस कर गरम करके उस स्थान पर लेप कीजिए।
  3. इसके बीजों को नीबू के रस में पीस कर लगाने से दाद खाज खुजली में आराम मिलता है।
  4. इसी पलाश से एक ऐसा रसायन भी बनाया जाता है जिसके अगर खाया जाए तो बुढापा और रोग आस-पास नहीं आ सकते।
  5. इसके पत्तों से बनी पत्तलों पर भोजन करने से चाँदी के पात्र में किये गये भोजन के समान लाभ प्राप्त होते हैं पहले लोग शादी ब्याह और अन्य संस्कार में पत्तल और दोने पलाश (ढाक) का ही करते थे और आज की अपेक्षा जादा स्वस्थ थे।

इसका गोंद हड्डियों को मजबूत बनाता है पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।

औषधि है छुईमुई (लाजवंती)

लाजवंती नमी वाले स्थानों में ज्यादा पायी जाती है इसके छोटे पौधे में अनेक शाखाएं होती है। इसका वानस्पतिक नाम माईमोसा पुदिका है। संपूर्ण भारत में होने वाला यह पौधा अनेक रोगों के निवारण के लिए उपयोग में लाया जाता है। इनके पत्ते को छूने पर ये सिकुड़ कर आपस में सट जाती है। इस कारण इसी लजौली नाम से जाना जाता है इसके फूल गुलाबी रंग के होते हैं । लाजवंती का पौधा एक विशेष पौधा है .इसके गुलाबी फूल बहुत सुन्दर लगते हैं और  पत्ते तो छूते ही मुरझा जाते हैं | इसे छुईमुई भी कहते हैं |

लाजवंती के औषधीय उपयोग :-

  1. पातालकोट के आदिवासियों के अनुसार छुईमुई की जड़ और पत्तों का चूर्ण दूध में मिलाकर दो बार देने से बवासीर और भगंदर रोग ठीक होता है। छुईमुई के पत्तों का एक चम्मच पाउडर दूध के साथ प्रतिदिन सुबह शाम लेने से बवासीर या पाइल्स में आराम मिलता है। गुजरात के जानकार छुईमुई की जड़ और पत्तियों का पाउडर दूध में मिलाकर दो बार देने से बवासीर और भगंदर जैसे रोग में आराम मिलता है। डाँग में आदिवासी पत्तियों के रस को बवासीर के घाव पर सीधे लेपित करने की बात करते हैं। इनके अनुसार यह रस घाव को सुखाने का कार्य करता है और अक्सर होने वाले खून के बहाव को रोकने में भी मदद करता है।
  2. अगर खांसी हो तो लाजवंती के जड़ के टुकड़ों के माला बना कर गले में पहन लो . हैरानी की बात है कि जड़ के टुकड़े त्वचा को छूते रहें ; बस इतने भर से गला ठीक हो जाता है . इसके अलावा इसकी जड़ घिसकर शहद में मिलाये . इसको चाटने से , या फिर वैसे ही इसकी जड़ चूसने से खांसी ठीक होती है . इसकी पत्तियां चबाने से भी गले में आराम आता है .
  3. यदि छुईमुई की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिली पानी में डालकर काढ़ा बनाया जाए तो यह काढ़ा मधुमेह के रोगियों को काफी फायदा होता है।
  4. छुईमुई और अश्वगंधा की जड़ों की समान मात्रा लेकर पीस लिया जाए और तैयार लेप को ढीले स्तनों पर हल्के हल्के मालिश किया जाए तो स्तनों का ढीलापन दूर होता है। स्तन में गाँठ या कैंसर की सम्भावना हो तो , लाजवंती की जड़ और अश्वगंधा की जड़ घिसकर लगाएँ |
  5. छुईमुई की जड़ों का चूर्ण (3 ग्राम) दही के साथ खूनी दस्त से ग्रस्त रोगी को खिलाने से दस्त जल्दी बंद हो जाती है। वैसे डाँगी आदिवासी मानते है कि जड़ों का पानी में तैयार काढ़ा भी खूनी दस्त रोकने में कारगर होता है।
  6. छुईमुई की पत्तियों और जड़ों में एंटीमायक्रोबियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं जिनकी पुष्टि आधुनिक विज्ञान भी करता है और मजे की बात ये भी है कि आदिवासी अंचलों में हर्बल जानकार आज भी त्वचा संक्रमण होने पर इसकी पत्तियों के रस को दिन में 3 से 4 बार लगाने की सलाह देते हैं।
  7. टांसिल्स होने पर इसकी पत्तियों को पीसकर गले पर लगाने से जल्द ही समस्या में आराम मिलता है। प्रतिदिन 2 बार ऐसा करने से तुरंत राहत मिल जाती है, जिन्हें गोईटर की समस्या हो उन्हें भी इसी तरह का समाधान अपनाना चाहिए।
  8. uterus बाहर आता  है  तो, पत्तियां पीसकर रुई से उस स्थान को धोएँ |
  9. डाँग गुजरात में आदिवासियों के अनुसार तीन से चार इलायची, छुईमुई की जड़ें 2 ग्राम सेमल की छाल (3 ग्राम) को आपस में मिलाकर कुचल लिया जाए और इसे एक गिलास दूध में मिलाकर प्रतिदिन रात को सोने से पहले पिया जाना चाहिए, यह नपुंसकता दूर करने के लिए एक कारगर फार्मूला है।
  10. छुईमुई की जड़ों का काढ़ा तैयार कर सर्पदंश होने पर प्रभावित शारीरिक अंग पर लगाने से जहर का असर कम हो जाता है। कई इलाकों के सर्पदंश होने पर रोगी को इस रस का सेवन भी कराया जाता है।

वीर्य गाढ़ा करने के लिए

  • वीर्य ही शरीर का सार है, एक योगी को सबसे ज्यादा दुःख अपने वीर्यपात होने पर ही होता है, मगर आज कल के युवा और आधुनिक डॉक्टर इसकी उतना नहीं आंकते, अत्यधिक मैथुन से या अश्लील सिनेमा और साहित्य से वीर्यपात कर चुके युवा जिनका वीर्य पानी कि भाँती हो चूका है, उनका जीवन नरक के समान है। वीर्य ही जीवन है, यही व्यक्ति कि आभा है, ये नहीं तो कुछ नहीं। वीर्य को गाढ़ा और शक्तिशाली करने के लिए सफ़ेद प्याज और अजवायन का ये प्रयोग बहुत लाभदायक है। आइये जाने…
➡ वीर्य गाढ़ा करने के लिए सफ़ेद प्याज और अजवायन का प्रयोग :
  • एक किलो सफ़ेद प्याज का रस निकाल कर रख लीजिये, अभी इसमें 100 ग्राम अजवायन को 12 घंटे तक सफेद प्याज के रस में भिगोकर रख लीजिये, रस इतना ही डाले के अजवायन इसको सोख ले, सुबह जब सारा रस अजवायन सोख ले तो इसको छाया में सुखा लें। सूखने के बाद उसे फिर से इसी प्रक्कर प्याज के रस में गीला करके सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें। उसके बाद इसे कूटकर किसी बोतल में भरकर रख लें। आधा चम्मच इस चूर्ण को एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें। इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है।

Sunday, August 28, 2016

भीगे बादाम क्यों बेहतर

भीगे बादाम क्यों बेहतर :-
बादाम अपने असीम स्वास्थ्य लाभो के लिए जाना जाता है और सबसे ज्यादा यह आपकी याद्दाश्त को बढ़ाने में मदद करने के लिए जाना जाता है बादाम आवशयक विटामिन और मिनरल्स जैसे विटामिन इ ,जिंक,केलशियम ,मैग्नीशियम और ओमेगा- 3 फैटी एसिड से भरपूर है लेकिन इन सभी पोषक तत्वों को अवशेषित करने के लिए बादाम को खाने से पहले रात भर पानी में भिगोना चाहिए ऐसा इसलिए क्योकि बादाम के भूरे रंग के छिलके में टनीन होता है जो पोषक तत्वों के अवशेषण को रोकता है एक रात बादाम को पानी में भिगोने से छिलका आसानी से उत्तर जाता है और नट्स को पोषक तत्वों को रिहा करने का अनुमति देता है भीगा हुआ बादाम पाचन मैं भी मदद करता है यह लाइपेज नामक एंजाइम की विज्ञप्ती करता है जो वसा के पाचन के लिए फायदेमंद होता है इसके आलावा इसके बहुत से फायदे है
1 . वजन घटाने में मददगार :-
बादाम वजन घटाने में भी मददगार होते है इसमें मोनो अनसैचुरेटेड फैट आपकी भूख को रोकने में मदद करता है भीगा हुआ बादाम एंटी आक्सिडेंट का भी अच्छा स्रोत है यह मुक्त कणो के नुकसान से बचाकर उम्र बढ़ने की प्रकिर्या को रोकता है भीगे बादाम में विटामिन B 17 और फॉलिक एसिड कैंसर से लड़ने और जन्म दोष को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण होता है
2 . दिल को स्वस्थ रखे :-
जर्नल आफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक अध्धयन के अनुसार बादाम एक बहुत ही शक्तिशाली एंटीआक्सीडेंट एजेंट है जो एल डी एल कोलोस्ट्रोल के आक्सीकरण को रोकने में मदद करता है बादाम के ये गन दिल को स्वस्थ रखने और पुरे ह्रदय प्रणाली को नुकसान और आक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है अगर आप दिल की बीमारी के किसी भी रूप से पीड़ित है तो स्वस्थ रहने के लिए अपने आहार में भीगे बादाम को शामिल करें
3 . हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें :-
बादाम ब्लड प्रेशर के लिए भी अच्छा होता है जर्नल फ्री रेडिकल रिसर्च में प्रकाशित एक अध्धयन के अनुसार बादाम का सेवन करने से ब्लड में अल्फा टोकोफ़ेरॉल की मात्रा बढ़ जाती है जो किसी के भी रक्तचाप को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होता है अध्धयन से यह भी पता चला की नियमित रूप से बादाम खाने से एक व्यक्ति का ब्लड प्रेशर निचे लाया जा सकता है
4 . गर्भस्थ शिशु के विकास में मदद :-
भीगे हुए बादाम में फॉलिक एसिड काफी होता है ये पोषक तत्व गर्भ के शिशु के मष्तिष्क और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम के विकास में मददगार साबित होता है इसके आलावा जब बादाम को भिगोया जाता है तो उसे खाना आसान हो जाता है गर्भवती महिलाओं की कमजोर पाचन किर्या के लिए खाना अच्छा होता है
5 . पाचन किर्या बनाए बेहतर :-
भीगे हुए बादाम पाचन किर्या को मजबूत और स्वस्थ बनाता है जर्नल आफ फ़ूड साइंस में प्रकाशित एक अध्धयन में ये पाया गया की भीगे कच्चे बादाम खाने से पेट जल्दी साफ होता है और प्रोटीन पचाना आसान हो जाता हैं बादाम का छिलका निकल जाने से उसके छिलके में मौजूद एंजाइम अलग हो जाते है और इस वजह से फैट तोड़ने में आसानी होती है
6 . बेड कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण :-
उच्च कोलेस्ट्रॉल की समस्या हमारे देश में सबसे आम हो गई है उच्च कोलोस्ट्रोल ह्रदय रोग और दिल की धमनियों में रुकावट समेत

मधुमेह की आयुर्वेदिक की दवा

मधुमेह या चीनी की बीमारी एक खतरनाक रोग है। रक्त ग्लूकोज (blood sugar level ) स्तर बढा़ हूँआ मिलता है, यह रोग मरीजों के (रक्त मे गंदा कोलेस्ट्रॉल,) के अवयव के बढने के कारण होता है। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है.

भोजन पेट में जाकर एक प्रकार के ईंधन में बदलता है जिसे ग्लूकोज कहते हैं। यह एक प्रकार की शर्करा होती है। ग्लूकोज हमारे रक्त धारा में मिलता है और शरीर की लाखों कोशिकाओं में पहुंचता है। pancreas (अग्न्याशय) ग्लूकोज उत्पन्न करता है इनसुलिन भी रक्तधारा में मिलता है और कोशिकाओं तक जाता है।
मधुमेह बीमारी का असली कारण जब तक आप लोग नही समझेगे आपकी मधुमेह कभी भी ठीक नही हो सकती है जब आपके रक्त में वसा (गंदे कोलेस्ट्रोल)LDL की मात्रा बढ जाती है तब रक्त में मोजूद कोलेस्ट्रोल कोशिकाओ के चारों तरफ चिपक जाता है !और खून में मोजूद जो इन्सुलिन है कोशिकाओं तक नही पहुँच पाता है (इंसुलिन की मात्रा तो पर्याप्त होती है किन्तु इससे द्वारो को खोला नहीं जा सकता है, अर्थात पूरे ग्लूकोज को ग्रहण कर सकने के लिए रिसेप्टरों की संख्या कम हो सकती है). वो इन्सुलिन शरीर के किसी भी काम में नही आता है जिस कारण जब हम शुगर level चैक करते हैं शरीर में हमेशा शुगर का स्तर हमेशा ही बढा हुआ होता है क्यूंकि वो कोशिकाओ तक नहीं पहुंची क्योंकि वहाँ (गंदे कोलेस्ट्रोल)LDL VLDL जमा हुआ है जबकि जब हम बाहर से इन्सुलिन लेते है तब वो इन्सुलिन नया-नया होता है तो वह कोशिकाओं के अन्दर पहुँच जाता है !
अब आप समझ गये होगे कि मधुमेह का रिश्ता कोलेस्ट्रोल से है न कि शुगर से जब सम्भोग के समय पति पत्नी आपस में नही बना कर रख पाते है या सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है समझ जाइये मधुमेह हो चूका है या होने वाला है क्योकि जिस आदमी को मधुमेह होने वाला हो उसे सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है क्योकि मधुमेह से पहले जो बिमारी आती वो है सेक्स में प्रोब्लम होना, मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। बार बार बहुत अधिक प्यास लगती है अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रोगी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्मध्घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।
  

मधुमेह  की आयुर्वेद की दवा


•  100 ग्राम (मेथी का दाना )ले ले इसे धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
• 100 ग्राम (तेज पत्ता ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
• 150 ग्राम (जामुन की गुठली )लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
• 250 ग्राम (बेलपत्र के पत्ते ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना ले।
तो इन सबका पाउडर बनाकर इन सबको एक दूसरे मे मिला लें ! बस दवा तैयार है !!
सेवन करने की विधि : इसे सुबह -शाम (खाली पेट ) 1 से डेड चम्मच से खाना खाने से एक घण्टा पहले गरम पानी के साथ लें !!
2 से 3 महीने लगातार इसका सेवन करें !! (सुबह उठे पेट साफ करने के बाद ले लीजिये )
कई बार लोगो से सीधा पाउडर लिया नहीं जाता ! तो उसके लिए क्या करें ??
आधे से आधा गिलास पानी को गर्म करे उसमे पाउडर मिलाकर अच्छे से हिलाएँ !! वो सिरप की तरह बन जाएगा ! उसे आप आसानी से एक दम पी सकते है ! उसके बाद एक आधा गिलास अकेला गर्म पानी पी लीजिये !!
अगर आप इसके साथ एक और काम करे तो सोने पे सुहागा हो जाएगा ! और ये दवा का असर बहुत ही जल्दी होगा !! जैसा कि आप जानते है शरीर की सभी बीमारियाँ वात,पित ,और कफ के बिगड़ने से होती हैं !! दुनिया मे सिर्फ दो ही ओषधियाँ है जो इन तीनों के सतर को बराबर रखती है !!
एक है गौ मूत्र , दूसरी है त्रिफला चूर्ण !!
खैर जिसको पीना है वो पी सकता है ! गौ मूत्र बिलकुल ताजा पिये सबसे बढ़िया !! बाहरी प्रयोग के लिए जितना पुराना उतना अच्छा है लेकिन पीने के लिए ताजा सबसे बढ़िया !! हमेशा देशी गाय का ही मूत्र पिये (देशी गाय की निशानी जिसकी पीठ पर हम्प होता है ) ! 3 -4 घंटे से अधिक पुराना मूत्र ना पिये !!
और याद रखे गौ मूत्र पीना है अर्क नहीं ! आधे से एक सुबह सुबह कप पिये ! सारी बीमारियाँ दूर !
• अब बात करते हैं त्रिफला चूर्ण की !
त्रिफला अर्थात तीन फल !
कौन से तीन फल !
1) हरड़ (Terminalia chebula)
2) बहेडा (Terminalia bellirica)
3) आंवला (Emblica officinalis)
एक बात याद रखें इनकी मात्रा हमेशा 1:2:3 होनी चाहिए ! 1 अनुपात 2 अनुपात 3 !
बाजार मे जितने भी त्रिफला चूर्ण मिलते है सब मे तीनों की मात्रा बराबर होती है ! बहुत ही कम बीमारियाँ होती है जिसमे त्रिफला बराबर मात्रा मे लेना चाहिए !!
इसलिए आप जब त्रिफला चूर्ण बनवाए तो 1 :2 मे ही बनवाए !!
सबसे पहले हरड़ 100 ग्राम , फिर बहेड़ा 200 ग्राम और अंत आंवला 300 ग्राम !!
इन तीनों को भी एक दूसरे मे मिलकर पाउडर बना लीजिये !! और रात को एक से डेड चमच गर्म दूध के साथ प्रयोग करें !!
सावधानियाँ !!
चीनी का प्रयोग कभी ना करें और जो sugar free गोलियां का तो सोचे भी नहीं !!
गुड़ खाये , फल खाये ! भगवान की बनाई गई को भी मीठी चीजे खा सकते हैं !!
रात का खाना सर्यास्त के पूर्व करना होगा !! मतलब सूर्य अस्त के बाद भोजन ना करें

ऐसी चीजे ज्यादा खाए जिसमे फाइबर हो रेशे ज्यादा हो, High Fiber Low Fat Diet घी तेल वाली डायेट कम हो और फाइबर वाली ज्यादा हो रेशेदार चीजे ज्यादा खाए। सब्जिया में बहुत रेशे है वो खाए, डाल जो छिलके वाली हो वो खाए, मोटा अनाज ज्यादा खाए, फल ऐसी खाए जिनमे रेशा बहुत है ।

किडनियां और शरीर विषाक्त पदार्थों से मुक्त करें

सामग्री – INGREDIENTS

1 गिलास पानी
4 सेब
1 ताज़ा अदरक (3 चमच के बराबर पिसा हुआ)
1 निम्बू
यदि संभव हो तो , यह सामग्री आर्गेनिक ही  उपयोग की जाए |

  • विधि- PREPARATION :-

    निम्बू का छिलका  उतार कर सेब, निम्बू, अदरक और पानी को एक साथ जूसर में डाल कर रस निकाल ले | सुबह  खाली  पेट इस का सेवन करे | आप महसूस करेंगे कैसे  विषेले तत्व आपके शारीर से निकल रहें हैं और अपनी  सेहत में सुधार  नजर आयेगा आप पहले से जायदा उर्जा से भरे हुए महसूस करेंगे |

इंसानी शरीर का विषाक्त पदार्थों से मुक्त होना बहुत  जरुरी होता है अन्यथा  यह हमारे शरीर को हानी पंहुचा  सकते है |बहतु से प्राक्रतिक तरीकों से शारीर को विषैले तत्वों से मुक्त किया जा सकता है, इस लेख में हम आप को बताएँगे  के शरीर को टोक्सिन मुक्त करने का सही और प्राक्रतिक तरीका क्या है | इस औषधि के  इस्तेमाल के बाद आप इस से मिलने वाले नतीजो से दंग रह जाएगे | इस विधि से आपका शरीर टोक्सिनस रहत हो जाये गा और शरीर पूरा दिन उर्जा से भरपूर रहेगा |

पथरी की ग़ज़ब दवा

  1. पत्थरचट जिसको पखानबेद भी कहते हैं इसके 12 – 15 पत्ते. (ये पौधा आपको किसी भी नर्सरी में मिल जायेगा).
  2. जवाखार 15 – 20 ग्राम. (ये किसी अच्छे विश्वसनीय पंसारी से लीजिये, क्यूंकि इसमें मिलावट भी आती है, प्रयोग की सफलता के लिए उच्च कोटि की जवाखार चाहिए.) असली जवाखार करीब रेत के रंग का होता है.
प्रयोग की विधि.
पत्थरचट के पत्तों को अच्छे से धो कर मिक्सर में डाले और उसमे एक गिलास पानी और जवाखार भी डाले फिर मिक्सर में करीब 4-5 मिनट तक उन्हें अच्छे से क्रश कर लें. अब इसमें 7 गिलास पानी और डाल लीजिये. अब इस को अच्छे से मिक्स कर के कांच के बर्तन में भरें और उसको छानना नहीं है ऐसे ही इस्तेमाल करना है. अभी आपके पास 8 गिलास लिक्विड है. एक दिन में 4 गिलास पीने हैं. 4 घंटे के अंतर में एक गिलास पीना है. दिन में 4 गिलास पीने हैं. और बाकी के चार गिलास अगले दिन पीने हैं. और इसके साथ हर आधे घंटे के बाद मटके का शुद्ध पानी पीना है. और ये दो दिन हो सके तो पूरा रेस्ट करना है. इन दो दिनों में बहुत पेशाब लगेगी. और हर बार छन्नी से अपना मूत्र छाने, आपको रेत जैसे कण दिखाई देंगे जो इस प्रयोग के सफल होने की और इशारा करेंगे.
इस प्रयोग के एक हफ्ते के बाद आप दोबारा पथरी के लिए जांच करवाएं, यदि थोड़ी पथरी रह गयी हो तो एक हफ्ते या पंद्रह दिनों के बाद फिर से यह प्रयोग करे. इस प्रयोग से 80 % केसेस में पथरी कितनी भी बड़ी हो वो निकल जाती है. ज़्यादातर केसों में इस प्रयोग के बाद ऑपरेशन करवाने की नौबत नहीं आती.

Latin name: Kalanchoe Pinnata Synonym: Bryophyllum calycinum, Bryophyllum pinnatum Family: Crassulaceae
संस्कृत नाम : पर्ण बीज, हेमसागर
हिंदी: पत्थर चट्टम, पत्थर चूर, पत्थर चट, पाषाणबेद, पखान बेद
बंगाली : कोप्पट, पत्थर कुची
तेलुगु: रानापला
तमिल: रुनाकली
Other Names: Cathedral Bells, Air Plant, Life Plant, Miracle Leaf, Goethe Plant.
यह पौधा साधारणतः लोग घरों में शोभा बढ़ाने के लिए गमलों में ही लगा देते हैं. यह सर्व्सुलुभ है. और किसी भी नर्सरी से आसानी से मिल जायेगा. इसके पौध की कीमत भी 15 से 20 रुपैये होती है. और ये कलम लगाने से ही फूट पड़ता है. ये गमलों में तो क्या ये पत्थरों के बीच में भी निकल जाता है. यह सिर्फ मूत्र मार्ग ही नहीं बल्कि पित्ताशय की पथरी को भी निकालने में सक्षम है. इसको अनेक औषधीय प्रयोगों में प्रयोग किया जाता है. शरीर में कहीं गाँठ बन जाए और उसका मुंह ना बन रहा हो तो उस जगह इस पत्ते को थोडा गर्म करके बाँध दें. कुछ ही दिनों में चाहे वो स्तन की गांठ हो या शरीर के किसी और अंग की गाँठ हो तो वो भी मुंह बना लेती है. ऐसा ग़ज़ब है ये पौधा.

दालचीनी और शहद

आपने घर के मसालों की रानी, दालचीनी का उपयोग तो कई बार किया होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि‍ यह आपकी हर बीमारी का इलाज करने में सक्षम है। और जब दालचीनी के साथ शहद का भी मेल हो जाए, फिर तो यह समझो सोने पर सुहागे वाली बात हो गई।
इजिप्ट वासी इस नुख्से का इस्तेमाल घावों को भरने के लिए, ग्रीक वासी इस का इस्तेमाल अपनी जीवनशेली को लम्बा बनाने के लिए और भारतीय कोग इस का इस्तेमाल अपने स्वास्थ्य को संतुलित बनाये रखने के लिए कई साल पहले से करते आ रहे है |
1.कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए :- इस मिश्रण के माध्यम से आप बहत आसानी से अपने कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण कर सकते है | 1 कप पानी में 2 चमच शहद और 3 चमच दालचीनी मिला कर सेवन करने से 2 घंटे में आपका 10% कोलेस्ट्रॉल कम हो जयेगा |
2.ह्रदय रोग – हृदय को स्वस्थ बनाए रखने और हृदय रोगों पर नियंत्रण रखने में दालचीनी सहायक होती है, क्योंकि यह हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल को जमने से रोकती है। प्रतिदिन शहद और दालचीनी का गर्म पानी के साथ सेवन करें। आप दालचीनी और शहद के मिश्रण को रोटी के साथ भी खा सकते हैं। इसके अलावा दालचीनी को चाय में डालकर भी ले सकते हैं। इसके प्रयोग से हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है।
3.गठिए से राहत – जोड़ों में दर्द होने पर दालचीनी का प्रयोग आपको राहत देता है। इसके लिए प्रतिदिन दालचीनी का गर्म पानी में सेवन तो लाभप्रद है ही, इसके अलावा इस हल्के गर्म पानी की दर्द वाले स्थान पर मालिश करने से भी जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।
इसके पानी को पीने एक सप्ताह में संधिवात के दर्द से निजात मिलती है और एक महीने तक इका सेवन करने से चलने फिरने में असमर्थ लोग भी चलने में सक्षम हो जाते हैं। आर्थाइटिस के दर्द में भी दालचीनी काफी फायदेमंद साबित होती है।
4.पित्ते की इन्फेक्शन :– इस औषधि से पितते की इन्फेक्शन भी दूर हो जाये गी | अगर आप सामग्री की मात्रा को बडाना चाहते हो तो 2 चमच दालचीनी और एक या दो चमच शहद के उबले हुए पानी में डाल कर भी सेवन कर सकते है |
5.सर्दी-खांसी –  सर्दी, खांसी या गले की तकलीफों में दालचीनी बेहद असरकार‍क दवा के रूप में काम करती है। इसे पीसकर एक चम्मच शहद के साथ एक चुटकी मात्रा में खाने से जुकाम में लाभ मिलता है। आप गर्म या गुनगुने पानी में दालचीनी के पाउडर को शहद के साथ मिलाकर पी सकते हैं। दालचीनी के पाउडर को पिसी हुई काली मिर्च के साथ सेवन करने से भी राहत मिलती है। इससे पुराने कफ में भी राहत मिलेगी।
6.पेट के रोग- अपच, गैस, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्यों में भी दालचीनी का पाउडर लेने से आराम मिलता है। इससे उल्टी-दस्त की समस्या में भी लाभ होता है, और भोजन का पाचन भी बेहतर होता है। शहद और दालचीनी के पावडर का मिश्रण लेने से पेट का अल्सर जड़ से ठीक हो जाता है।
7.कैंसर- दालचीनी का प्रयोग कैंसर जैसे रोग पर नियंत्रण पाने में सक्षम है। वैज्ञानिकों ने अमाशय के कैंसर और हड्डी के बढ़ जाने की स्थति‍ में दालचीनी और शहद को लाभदायक बताया है। एक माह तक गरम पानी में दालचीनी पाउडर और शहद का सेवन इसके लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है, जिससे शरीर बीमारियों से लड़ सके |

खाली पेट भीगे चने खाने से होते है चमत्कारी फायदे,

आयुर्वेद में चने की दाल और चने को शरीर के लिए स्वास्थवर्धक बताया गया है। चने के सेवन से कई रोग ठीक हो जाते हैं। क्योंकि इसमें प्रोटीन, नमी, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स पाये जाते हैं। चना दूसरी दालों के मुकाबले सस्ता होता है और सेहत के लिए भी यह दूसरी दालों से पौष्टिक आहार है। चना शरीर को बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनाता है। साथ ही यह दिमाग को तेज और चेहरे को सुंदर बनाता है। चने के सबसे अधिक फायदे इन्हे अंकुरित करके खाने से होते है।
 सुबह खाली पेट चने से मिलते है कई फायदे :
1. शरीर को सबसे ज्यादा पोषण काले चनों से मिलता है। काले चने अंकुरित होने चाहिए। क्योंकि इन अंकुरित चनों में सारे विटामिन्स और क्लोरोफिल के साथ फास्फोरस आदि मिनरल्स होते हैं जिन्हें खाने से शरीर को कोई बीमारी नहीं लगती है। काले चनों को रातभर भिगोकर रख लें और हर दिन सुबह दो मुट्ठी खाएं। कुछ ही दिनों में र्फक दिखने लगेगा।
2. रातभर भिगे हुए चनों से पानी को अलग कर उसमें अदरक, जीरा और नमक को मिक्स कर खाने से कब्ज और पेट दर्द से राहत मिलती है।
3. शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए अंकुरित चनों में नींबू, अदरक के टुकड़े, हल्का नमक और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं। आपको पूरे दिन की एनर्जी मिलेगी।
चने का सत्तूचने का सत्तू भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद औषघि है। शरीर की क्षमता और ताकत को बढ़ाने के लिए गर्मीयों में आप चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलकार पी सकते हैं। यह भूख को भी शांत रखता है।
पथरी की समस्या में चनापथरी की समस्या अब आम हो गई है। दूषित पानी और दूषित खाना खाने से पथरी की समस्या बढ़ रही है। गाल ब्लैडर और किड़नी में पथरी की समस्या सबसे अधिक हो रही है। एैसे में रातभर भिगोए चनों में थोड़ा शहद मिलाकर रोज सेवन करें। नियमित इन चनों का सेवन करने से पथरी आसानी से निकल जाती है। इसके अलावा आप आटे और चने का सत्तू को मिलाकर बनी रोटियां भी खा सकते हो।
शरीर की गंदगी साफ करनाकाला चना शरीर के अंदर की गंदगी को अच्छे से साफ करता है। जिससे डायबिटीज, एनीमिया आदि की परेशानियां दूर होती हैं। और यह बुखार आदि में भी राहत देता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिएचना ताकतवर होता है। यह शरीर में ज्यादा मात्रा में ग्लूकोज को कम करता है जिससे डायबिटीज के मरीजों को फायदा मिलता है। इसलिए अंकुरित चनों को सेवन डायबिटीज के रोगियों को सुबह-सुबह करना चाहिए।
मूत्र संबंधी रोगमूत्र से संबंधित किसी भी रोग में भुने हुए चनों का सवेन करना चाहिए। इससे बार-बार पेशाब आने की दिक्कत दूर होती है। भुने हुए चनों में गुड मिलाकर खाने से यूरीन की किसी भी तरह समस्या में राहत मिलती है।
पुरूषों की कमजोरी दूर करनाअधिक काम और तनाव की वजह से पुरूषों में कमजोरी होने लगती है। एैसे में अंकुरित चना किसी वरदान से कम नहीं है। पुरूषों को अंकुरित चनों को चबा-चबाकर खाने से कई फायदे मिलते हैं। इससे पुरूषों की कमजोरी दूर होती है। भीगे हुए चनों के पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से पौरूषत्व बढ़ता है। और नपुंसकता दूर होती है।
पीलिया के रोग में
पीलिया की बीमारी में चने की 100 ग्राम दाल में दो गिलास पानी डालकर अच्छे से चनों को कुछ घंटों के लिए भिगो लें और दाल से पानी को अलग कर लें अब उस दाल में 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4 से 5 दिन तक रोगी को देते रहें। पीलिया से लाभ जरूरी मिलेगा।
पीलिया रोग में रोगी को चने की दाल का सेवन करना चाहिए।
कुष्ठ रोग में चनाकुष्ठ रोग से ग्रसित इंसान यदि तीन साल तक अंकुरित चने खाएं। तो वह पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
गर्भवती महिला को यदि मितली या उल्टी की समस्या बार-बार होती हो। तो उसे चने का सत्तू पिलाना चाहिए। अस्थमा रोग मेंअस्थमा से पीडि़त इंसान को चने के आटे का हलवा खाना चाहिए। इस उपाय से अस्थमा रोग ठीक होता है।
भीगे चनेयह जरूरी नहीं कि आपको केवल अंकुरित चने ही खाने हैं। रात को चनों को पानी में भिगों लें और सुबह व्यायाम करने के बाद इन भीगे हुए चनों को चबाकर खाएं। और बाद में चनों का बचा हुआ पानी भी पी लें। इस उपाय से आपको ताकत व बल मिलता है।
सौदर्य के लिए चनानियमित रूप से यदि आप अंकुरित चनों का सेवन करते हो तो आप के उपर बुढ़ापा बहुत ही देर में आएगा। अंकुरित चनों में इंसान को ताकत देने की शक्ति होती है जिससे इंसान बूढ़ा नहीं होता है।और वह चुस्त रहता है।
चना सेवन किन लोगों को नहीं करना है वे लोग जिन्हें अफरा व गैस की समस्या होती हो वेअंकुरित चनों का सेवन करने से बचें।
 त्वचा की समस्या मेंचने के आटे का नियमित रूप से सेवन करने से थोड़े ही दिनों में खाज, खुजली और दाद जैसी त्वचा से संबंधित रोग ठीक हो जाते हैं।
कफ दूर करेलंबे समय से चली आ रही कफ की परेशानी में भुने हुए चनों को रात में सोते समय अच्छे से चबाकर खाएं और इसके बाद दूध पी लें। यह कफ और सांस की नली से संबंधित रोगों को ठीक कर देता है।
चेहरे की चमक के लिए चनाचेहरे की रंगत को बढ़ाने के लिए नियमित अंकुरित चनों का सेवन करना चाहिए। साथ ही आप चने का फेस पैक भी घर पर बनाकर इस्तेमाल कर सकेत हो। चने के आटे में हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा मुलायम होती है। महिलाओं को हफ्ते में कम से कम एक बार चना और गुड जरूर खाना चाहिए।
दाद खाज और खुजलीएक महीने तक चने के आटे की रोटी का सेवन करने से त्वचा की बीमारियां जैसे खुजली, दाद और खाज खत्म हो जाती हैं।
धातु पुष्टदस ग्राम शक्कर और दस ग्राम चने की भीगी हुई दाल को मिलाकर कम से कम एक महीने तक खाने से धातु पुष्ट होती है।
रात को सोने से पहले गर्म दूध के साथ भुने हुए चने खाने से सांस की नली व कफ से संबंधित रोग ठीक होते हैं।
शहद को चने में मिलाकर पीने से नपुंसकता खत्म होती है।
खून साफ और त्वचा की रंगत को सुधारता है चना।
रूमाल व कपड़े में गर्म चने बांधकर सूंघने से सर्दि जुकाम में राहत मिलती है।
सुबह के व्यायाम के बाद यदि आप भीगे हुए चने खाते हैं तो इससे आपकी सेहत हमेशा स्वस्थ रहेगी।
चना सेहत और सौंदर्य को बढ़ाता है। इसलिए जो लोग निमित रूप से अंकुरित चने को खाते हैं वे कभी बीमार नहीं पड़ते हैं साथ ही साथ उनकी त्वचा के रंग में भी निखार आता है।

भीगा चना यूं तो सेहत के साथ-साथ सुंदरता के लिए भी बेहतर है लेकिन आयुर्वेद में इसे मर्दानगी बढ़ाने की अचूक दवा माना गया है. जानिए क्यों?

नपुंसकता समाप्त – आयुर्वेद में कहा गया है कि रात भर भीगे हुए चने का पानी पीने से शरीर में घट रहा वीर्य फिर से बनने लगता है और शरीर पुष्ठ होता है. भीगे हुए चने के पानी में अगर शहद मिलाकर पिया जाए तो सालों पुरानी नपुंसकता समाप्त हो जाती है 
वीर्यवर्धक उपाय – अगर शरीर कमजोर होने के साथ साथ वीर्य में कमी हो तो चनों को चीनी के बर्तन में रात को ही भिगोकर रख दें.सुबह इसे पानी से निकाल कर चबा-चबा कर खाएं और इसका पानी भी पी लें. दो सप्ताह ये क्रिया करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है और पौरुष से जुड़ी परेशानियां खत्म हो जाती हैं.एक कटोरी भीगे हुए या सेंके हुए चने रोज पांच बादाम के साथ चबा-चबा कर खाएं.इससे शरीर मजबूत होता है और यौन शक्ति में इजाफा होता है. भीगे चनों को दूध के साथ खाने से मांसपेशियां और पुट्ठे मजबूत होते हैं.
चने को आप खाने में जरूर इस्तेमाल करें। यह किसी दवा से कम नहीं है। चने खाने से एक नहीं कई फायदे मिलते हैं तो क्यों नहीं अंकुरित चनों का इस्तेमाल रोज किया जा सकता है। वैदिक वाटिका का प्रयास है आपके स्वास्थ के लिए हर जरूरी चीज को आप तक पहुंचाना जो आप और आपके परिवार के लिए जरूरी और फायदेमंद है।

शहद के स्वास्थ्य लाभ शहद के स्वास्थ्य लाभ

शहद के स्वास्थ्य लाभ
शहद आपके खून के लिए अच्छा है
शहद शरीर पर अलग-अलग तरह से असर डालता है, जो इस पर निर्भर करता है कि आप उसका सेवन कैसे करते हैं। अगर शहद को गुनगुने पानी में मिलाकर पिया जाए तो उसका खून में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की संख्या पर लाभदायक असर पड़ता है। लाल रक्त कोशिकाएं मुख्य रूप से शरीर के विभिन्न अंगों तक खून में ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। शहद और गुनगुने पानी का मिश्रण खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है, जिससे एनीमिया या खून की कमी की स्थिति में लाभ होता है। आयरन की कमी यानी एनीमिया की स्थिति तब आती है जब आहार में लौह तत्व को कम मात्रा में ग्रहण किया जाता है या शरीर उसे पर्याप्त रूप से सोख नहीं पाता। इससे रक्त की ऑक्सीजन ढोने की क्षमता प्रभावित होती है। ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम होने से थकान, सांस फूलना और कई बार उदासी और दूसरी समस्याएं होती हैं। शहद रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को बढ़ाते हुए इन समस्याओं को कम कर सकता है।
खून में ऑक्सीजन का होना बेहद जरूरी होता है। आपका शरीर कितना स्वस्थ है या बीमारी के बाद कितनी जल्दी खुद को ठीक कर पाता है, यह आपके खून में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा पर निर्भर करता है। खासकर महिलाओं को इस मामले में खास ख्याल रखने की जरूरत होती हैं, क्योंकि उन्हें हर महीने मासिकचक्र से गुजरना पड़ता है। चूंकि हर महीने उनके शरीर से एक खास मात्रा में खून बाहर निकल जाता है, इसलिए एनेमिया की संभावना उनमें पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा पाई जाती है। अगर मस्तिष्क को उचित मात्रा में खून नहीं मिलेगा तो शरीर और दिमाग को जैसा काम करना चाहिए, वे वैसे नहीं कर पाएंगे।
शहद : रक्तचाप में फायदेमंद
शहद का नियमित सेवन सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है। अगर आपको निम्न रक्तचाप की शिकायत है और अगर आप नीचे बैठे-बैठे अचानक उठने की कोशिश करते हैं तो आपको चक्कर आ जाते हैं। निम्न रक्तचाप का मतलब दिमाग में ऑक्सीजन का कम मात्रा में पहुंचना है। इसी तरह से अगर आप अपना सिर नीचे करते हैं और आपको चक्कर आते हैं तो इसका मतलब है कि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है। या तो उच्च रक्तचाप की वजह से या फिर ऑक्सीजन की कमी की वजह से आपको चक्कर आते हैं।
शहद का सेवन हमारे शरीर के इन असंतुलनों को दूर करता है। शरीर में रक्त का दबाव शरीर की जरूरतों पर निर्भर करता है। लोगों को लगता है कि उच्च रक्तचाप एक बीमारी है, लेकिन सच्चाई यह नहीं है। दरअसल, शरीर अपनी जरूरतों के हिसाब से खून का दबाव तय करता है। अगर किसी कारण वश शरीर को सामान्य रूप से ज्यादा ऑक्सीजन या पोषक तत्वों की जरूरत होती है या फिर खून की गुणवत्ता वैसी नहीं होती, जैसी होनी चाहिए तो शरीर का खून पंप करने वाला पंपिंग सिस्टम ज्यादा खून पंप करना शुरू कर देता है। इसके लिए अंगों में शीघ्र और तेज प्रवाह के लिए दिल तेजी से खून को पंप करता है, जिससे खून का दबाव बढ़ता है।
निम्न रक्तचाप के पीछे भी वजह होती है, जैसे शरीर को ही निम्न दबाव की जरूरत हो सकती है या फिर जन्मजात वजहों से ही दिल इतना मजबूत नहीं होता कि वह शरीर की जरूरत के मुताबिक ज्यादा खून पंप कर पाए। ये भी हो सकता है कि शरीर के परिसंचरण तंत्र यानी सर्कुलेटरी सिस्टम में कोई दिक्कत हो अथवा खून की रासायनिक संरचना के चलते ऐसा हो रहा हो। अकसर एक साथ कई वजहों के चलते ऐसा होता है। ठीक इसी तरह उच्च रक्तचाप के कई परिणाम सामने आते हैं, लेकिन शुरु में तो उच्च रक्तचाप खुद ही एक परिणाम है- यह एक परिणाम है, कारण नहीं है।
योग का नियमित अभ्यास करने वाले व शरीर को खास तरह की प्रक्रिया में ढालने वाले लोगों के लिए अपने सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। शहद का नियमित सेवन इस संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको अपेक्षा कृत ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है।
कीमोथैरेपी में असरदायक
इसके भी कुछ प्रारंभिक प्रमाण हैं कि शहद कीमोथैरेपी के मरीजों में श्वेत रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की संख्या को कम होने से रोक सकता है। एक छोटे प्रयोग में कीमोथैरेपी के दौरान कम डब्ल्यूबीसी संख्या के जोखिम वाले 40 फीसदी मरीजों में उपचार के तौर पर दो चम्मच शहद पीने के बाद वह समस्या फिर से नहीं उभरी।
शहद चीनी से कम नुकसानदायक है
शरीर पर सफेद चीनी के हानिकारक प्रभावों के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। शहद उसका एक बढ़िया विकल्प है जो उतना ही मीठा है मगर उसका सेवन अहानिकर है। हालांकि शहद के रासायनिक तत्वों में भी सिंपल शुगर होती है मगर वह सफेद चीनी से काफी भिन्न होती है। उसमें करीब 30 फीसदी ग्लूकोज और 40 फीसदी फ्रक्टोज होता है यानि दो मोनोसेकाराइड या सिंपल शुगर और 20 फीसदी दूसरे कांप्लेक्स शुगर होते हैं। शहद में एक स्टार्ची फाइबर डे‍क्सट्रिन भी होता है। यह मिश्रण शरीर में रक्त शर्करा का स्तर संतुलित रखता है।
शहद योगाभ्यासियों के लिए अच्छा है
योग अभ्यासों को करने वाले लोगों के लिए शहद का सेवन रक्त के रसायन में संतुलन लाता है, इसलिए उन्हें खास तौर पर इसका सेवन करना चाहिए। शहद का नियमित सेवन शरीर को अधिक जीवंत बनाता है। सुबह अभ्यास शुरू करने से पहले गुनगुने पानी में थोड़ा सा शहद मिलाकर लेने पर शरीर सक्रिय हो जाता है।
शहद एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक है
शहद का सेवन लाभदायक एंटीऑक्सीडेंट तत्वों की संख्या को बढ़ाता है, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है और हानिकारक सूक्ष्मजीवों से लड़ता है। कई अध्ययनों में जख्मों की चिकित्सा में भी शहद के इस्तेमाल पर विचार किया गया है। एक अध्ययन में एक उपचारात्मक शहद का इस्तेमाल किया गया जो एक खास शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजरा था। इस अध्ययन में भाग लेने वाले सभी लोगों के जख्मों से सारा बैक्टीरिया नष्ट हो गया। एक और अध्ययन में असंसाधित (अनप्रोसेस्ड) शहद के इस्तेमाल से 59 मरीजों के जख्म और पैर के अल्सर ठीक हो गए। इन मरीजों में से 80 फीसदी पर पारंपरिक उपचार का कोई असर नहीं हुआ था। एक मरीज को छोड़कर बाकी सभी के जख्मों में सुधार हुआ। साथ ही शहद लगाने के एक सप्ताह के भीतर संक्रमित जख्म जीवाणुरहित हो गए। पारंपरिक चिकित्सा में, शहद के एक लाभ में श्वास संबंधी संक्रमणों का उपचार शामिल है।
क्लीनिकल रिसर्च से यह भी पता चला है कि मेडिकल ग्रेड शहद भोजन से पैदा होने वाले जीवाणुओं जैसे इशटीशिया कोली और सेलमोनेला को नष्ट कर सकता है। शहद उन बैक्टीरिया से लड़ने में भी प्रभावकारी साबित हुआ है, जिन पर एंटीबायोटिक्स का असर नहीं होता। शहद कई स्तरों पर संक्रमण से लड़ता है जिससे वह जीवाणुओं के लिए प्रतिरोधी क्षमता विकसित करना मुश्किल बना देता है। इसके विपरीत एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया पर उस समय हमला करते हैं, जब वे विकसित हो रहे होते हैं इससे वे उसे प्रतिरोधी क्षमता विकसित करने का मौका देते हैं।
शहद दिल की देखभाल में फायदेमंद
एक अनार का ताजा रस लेकर उसमें एक बड़ा चम्मच शहद मिलाएं। रोजाना सुबह खाली पेट लें।
खजूर में सुई चुभाते हुए उसमें छेद करें। उसे शहद में डुबा दें और दिन में दो बार 2-4 खजूर खाएं।
सर्दी जुकाम के लिए शहद के उपचार
अगर आप सर्दी-जुकाम से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं या आपको हर सुबह बंद नाक से जूझना पड़ता है, तो नीम, काली मिर्च, शहद और हल्दी का सेवन काफी फायदेमंद हो सकता है। यहां कुछ सरल उपचार दिए गए हैं:
विकल्प 1:
काली मिर्च के 10 से 12 दानों को दरदरा कूट लें और उन्हें दो छोटे चम्मच शहद में रात भर भिगो कर रखें। सुबह खूब अच्छी तरह चबाते हुए काली मिर्च के दाने खा लें। आप शहद में थोड़ा हल्दी भी मिला सकते हैं।
विकल्प 2:
नीम के पत्तों का पेस्ट बना लें और उस पेस्ट से एक कंचे के आकार की गोली बनाएं। उस गोली को शहद में डुबाकर हर सुबह खाली पेट निगल लें। अगले 60 मिनट तक कुछ न खाएं ताकि नीम आपके शरीर में फैल जाए। इससे दूसरी तरह की एलर्जी जैसे त्वचा या किसी खाद्य पदार्थ से होने वाली एलर्जी में भी लाभ मिलता है। नीम में बहुत से औषधीय गुण हैं और यह आदत बहुत ही लाभदायक है। अगर आपको नीम के सामान्य पत्ते ज्यादा कड़वे लगते हैं, तो नीम के कोमल पत्तों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
शहद एक बलवर्धक खाद्य पदार्थ (एनर्जी फूड) है
पारंपरिक औषधि में शहद का एक महत्वपूर्ण प्रयोग एक त्वरित बलवर्धक के रूप में किया जाता है। जैसा कि पहले भी जिक्र किया गया है, शहद में अलग-अलग तरह के शुगर कण होते हैं, खासकर ग्लूकोज और फ्रक्टोज। हालांकि सफेद चीनी, जिसमें फ्रक्टोज और ग्लूकोज एक साथ सुक्रोज के रूप में होते हैं, इसके विपरीत शहद में ये दोनों शर्कराएं अलग होती हैं। इसलिए शहद तत्काल शक्ति देता है।
संयुक्त राष्ट्र राष्ट्रीय शहद बोर्ड शहद के सेवन का सुझाव देता है क्योंकि इसमें कम मात्रा में बहुत से विटामिन और मिनरल होते हैं। इनमें कैल्शियम, कॉपर, आयरन, मैगनीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम और जिंक शामिल हैं।