Tuesday, November 10, 2015

TIPS TO INCREASE BLOOD IN THE HUMAN BODY

शरीर में तेजी से खून बढ़ाने के घरेलु उपाय।
शरीर में खून की कमी से बहुत बीमारियां लग सकती हैं। जिस वजह से इंसान कमजोर हो जाता है और उसका शरीर बीमारियों से लड़ नहीं पाता है। इसलिए महिलाओं और पुरूषों को शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने के लिए इन आयुवेर्दिक उपायों को अपनाना चाहिए।
1. तिल और शहद
दो घंटे के लिए 2 चम्मच तिलों को पानी में भिगों लें और बाद में पानी से छानकर इसका पेस्ट बना लें। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में दो बार सेवन करें।
2. काफी और चाय खतरनाक
काफी और चाय का सेवन कम कर दें। एैसा इसलिए क्योंकि ये चीजें शरीर को आयरन लेने से रोकते हैं।
3.ठंडा स्नान
दो बार दिन में ठंडे पानी से नहाए और सुबह नहाने के बाद सूरज की रोशनी में बैठें।
4. अंकुरित भोजन
आप अपने भोजन में गेहूं, मोठ, मूंग और चने को अंकुरित करके उसमें नींबू मिलाकर सुबह का नाश्ता लें।
5. आम
पके आम के गुदे को मीठे दूध के साथ सेवन करें। एैसा करने से खून तेजी से बढ़ता है।
6. मूंगफली और गुड़
शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए मूंगफली के दानों को गुड़ के साथ चबा-चबा कर सेवन करें।
7. सिंघाड़ा
सिंघाड़ा शरीर में खून और ताकत दोनो को बढ़ाता है। कच्चे सिंघाड़े को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है।
8. मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर
मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर का नियमित सेवन करें और रात को सोने से पहले दूध में खजूर डालकर उसको पीएं।

Saturday, October 24, 2015

Ayurvedic Contracipative

गर्भनिरोधक आयुर्वेदिक नुस्खेँ
‪
*गर्भनिरोधक Ayurvedic Tips (आयुर्वेदिक नुस्खेँ)*
वैसे तो गर्भनिरोधकों के तमाम विकल्प बाजार में मौजूद हैं लेकिन अगर आप इनके केमिकल या साइड एफेक्ट से दूरी रखना चाहते हैं या फिर इन प्रचलित
तरीकों में यकीन नहीं रखते हैं तो आयुर्वेद में आपके लिए कुछ घरेलू उपाय भी हैं। आयुर्वेद पर यकीन रखते हैं तो इन उपायों का गर्भनिरोधक के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे तो इनके साइड एफेक्ट नहीं है लेकिन इनका इस्तेमाल आप किसी अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श से करें तो प्राकृतिक और सुरक्षित तौर पर गर्भनिरोध और बेफिक्र सेक्स लाइफ आसान हो सकेगी।

*कैस्टर यानी अरंडी के
बीज को फोड़ें और इनमें मौजूद सफेद
बीज को निकालें। सेक्स के 72 घंटे के
भीतर महिलाएं इसका सेवन करें तो यह आई-पिल
की तरह ही गर्भधारण रोक सकता है।
महिलाएं इसका सेवन पीरियड्स के
तीन दिनों तक करें तो एक महीने तक
इसका प्रभाव रहेगा।

*सूखे पुदीने के पत्ते का पाउडर बनाएं और स्टोर
कर लें। सेक्स के पांच मिनट के बाद एक ग्लास गुनगुने
पानी के साथ एक चम्मच पाउडर का सेवन करें।
महिलाओं के लिए यह नैचुरल कंट्रासेप्टिव दवा का काम करेगा।

*गुड़हल के फूल का पेस्ट बनाएं इसमें स्टार्च मिलाएं।
पीरियड्स के शुरुआती तीन दिनों तक इसका सेवन कंट्रासेप्टिव की तरह ही काम करेगा।

*आंवला, रसनजनम और हरितकारी को समान
मात्रा में लेकर इनका पाउडर बनाएं और स्टोर करें। ये
औषधियां किसी भी आयुर्वेदिक स्टोर
पर मिल जाएंगी। महिलाएं इनका सेवन पीरियड्स के चौथे दिन से 16वें दिन तक करें तो यह गर्भनिरोधक
गोलियों की तरह ही असरदार होता है।

Tuesday, October 20, 2015

HOW TO KILL STOMACH WARMS

आंतों के कीड़ों के लिए घरेलू उपचार
पेट में कीड़े पड़ जायें तो यह बहुत ही दुखदायी होता है। इसके कारण पेट में गैस, बदहजमी, पेट में दर्द, बुखार जैसी समस्‍यायें होती हैं, यह समस्‍या सबसे अधिक बच्‍चों में होती है लेकिन बड़ों की आंतों में भी कीड़े हो सकते हैं।
ये कृमि लगभग 20 प्रकार के होते हैं जो अंतड़ियों में घाव पैदा कर सकते हैं। इसके कारण रोगी को बेचैनी, पेट में गैस बनना, दिल की धड़कन असामान्‍य होना, बदहजमी, पेट में दर्द, बुखार जैसी कई प्रकार की समस्‍यायें होती हैं। इसके कारण रोगी को खाने में रुचि नहीं होती और उसे चक्‍कर भी आते हैं। गंदगी के कारण ही पेट में कीड़े होते हैं। अशुद्ध और खुला भोजन करने वालों को यह समस्‍या अधिक होती है। घरेलू उपचार के जरिये इस समस्‍या का इलाज किया जा सकता है।
1.अजवायन
अजवायन का सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। इसके लिए अजवायन का चूर्ण आधा ग्राम और उतना ही गुड़ में गोली बनाकर दिन में तीन बार इसका सेवन मरीज को करायें। अजवायन में एंटी-बैक्‍टीरियल तत्‍व पाये जाते हैं जो कीडों को समाप्‍त कर देते हैं। अजवायन का सेवन सेव 2-3 दिन करने पर कीड़े पेट से पूरी तरह से समाप्‍त हो जायेंगे।
2.काला नमक
चुटकी भर काला नमक और आधा ग्राम अजवायन चूर्ण मिला लीजिए, इस चूर्ण को रात के समय रोजाना गर्म पानी से लेने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं। अगर बड़ों को यह समस्‍या है तो काला नमक और अजवायन दोनों को बराबर मात्रा में लीजिए। सुबह-शाम इसका सेवन करने से पेट के कीड़े दूर हो जायेंगे।
3.अनार के छिलके
बच्‍चों और बड़ों दोनों में पेट के कीड़े हो जायें तो यह बहुत ही फायदेमंद उपचार है। अनार के छिलकों को सुखाकर इसका चूर्ण बना लीजिए। यह चूर्ण दिन में तीन बार एक-एक चम्मच लीजिए। कुछ दिनों तक इसका सेवन करने से पेट के कीड़े पूरी तरह से नष्‍ट हो जाते हैं।
4.नीम के पत्‍ते
नीम के पत्‍तों का सेवन करने से पेट की हर तरह की समस्‍या दूर हो जाती है। नीम के पत्‍ते एंटी-बॉयटिक होते हैं जो पेट के कीड़ों को नष्‍ट कर देते हैं। नीम के पत्‍तों को पीसकर उसमें शहद मिलकार पीने से जल्‍दी फायदा होता है और कीड़े नष्‍ट हो जाते हैं। सुबह के वक्‍त इनका सेवन करना अधिक फायदेमंद होता है।
5.टमाटर के जरिये
टमाटर का प्रयोग खाने का स्‍वाद बढ़ाने के साथ-साथ पेट के कीड़ों को नष्‍ट करने के लिए कर सकते हैं। टमाटर को काटकर, उसमें सेंधा नमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर इसका सेवन कीजिए। इस चूर्ण का सेवन करने के बाद पेट के कीड़े मर कर गुदामार्ग से बाहर निकल जाते हैं।
6.लहसुन की चटनी
पेट की समस्‍या दूर करने के साथ आंतों को पूरी तरह से साफ करने के लिए लहसुन का प्रयोग करें। अगर बच्‍चे या बड़े किसी को भी पेट में कीड़े हैं तो उसे लहसुन की चटनी खिलायें। लहसुन की चटनी बनाकर उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम खाने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।
7.तुलसी के पत्‍ते
तुलसी भी एंटी-बैक्‍टीरियल होती है, किसी भी प्रकार के संक्रमण के उपचार के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं। पेट में कीड़े होने पर तुलसी के पत्तों का एक चम्मच रस दिन में दो बार पीने से पेट के कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं। इसका सेवन करने से आंत पूरी तरह से साफ हो जाती है और पेट में गैस और कब्‍ज की भी शिकायत नहीं होती है।
8 कच्‍चे आम की गुठली
बच्‍चों या बड़ों की आंत में कीड़े पड़ गये हों तो कच्‍चे आम की गुठली का सेवन करने से कीड़े मल के रास्‍ते बाहर निकल जाते हैं। इसके लिए कच्चे आम की गुठली का चूर्ण दही या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इसके नियमित सेवन से कुछ दिनों में ही आंत के कीड़े बाहर निकल जायेंगे।

Monday, October 19, 2015

BENEFITS OF MANGOS

आम की पत्तियां इस तरह मदद करती है
प्राचीन चीनी दवाइयों में आम के पत्तों का अर्क डायबिटीज और अस्थमा के इलाज में उपयोग किया जाता है। आम के पत्तों में कैफीक एसिड जैसे फिनॉलिक, मैगीफेरिन जैसे पॉलिफिनॉल्स, गैलिक एसिड, फ्लेवोनोइड्स और कई अस्थाई यौगिकों जैसे घटक पाए जाते हैं। ये सभी गुण आम को अच्छा एंटी-डायबिटीक, एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी-एलर्जिक प्राकृतिक उत्पाद बनाते हैं।

ये हैं आम के खास गुणः
ब्लड शुगर नियंत्रणः ऐसा आम के पत्तों में मौजूद टैनिन की वजह से होता है। आम के पत्तों से निकला अर्क इंसुलिन उत्पादन और ग्लूकोज का प्रसार ब्लड शुगर का स्तर घटाता है। पढ़िये, किस तरह से आपका ब्लड शुगर लेवल आपके स्वभाव को प्रभावित करता है।
कम कोलेस्ट्रॉलः आपको याद रखना चाहिये कि डायबिटीज आपके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करता है और हृदय उनमें से एक होता है। कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर आपके हृदय को व्यापक तौर पर नुकसान पहुंचा सकता है। यदि आप शुगर की बीमारी से पीड़ित हैं तो बाकी चीजें आपके लिये स्वतः खराब होने लगती है। चूंकि आम के पत्तों में फाइबर, पेक्टिन और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है, जो आपके कोलेस्ट्रॉल, खासतौर पर एलडीएल या हानिकारक कोलेस्ट्रॉल के लेवल को घटाता है। इसके अलावा फल में मौजूद फ्लेवोनोविड्स लिपिड लेवल को कम करने में मदद करता है। इससे आपकी धमनियां मजबूत और स्वस्थ बन सकती है।
डायबिटीक रेटिनोपैथी का इलाजः आम के फल के साथ-साथ पत्तों में भी विटामिन ए होता है, जो आंखों के लिये बेहद फायदेमंद होता है। यही कारण है कि पत्ते भी आंखों को खराब होने से बचा सकते हैं, साथ ही ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखने में भी मदद करते हैं।
किडनी और लिवर की सेहतः डायबिटीज के चलते किडनी फेल होना बेहद आम है। अनियंत्रित ब्लड शुगर लेवल से यह बड़ी समस्या सबसे पहले होती है। आम का सेवन करने से इस समस्या से बचने में काफी मदद मिलती है। आम की पत्तियों से किडनी में पथरी की समस्या को हल करने और किडनी को सेहतमंद रखने में मदद मिलती है। इसी तरह यह आपको पित्ताशय की पथरी से निजात पाने और लिवर को सेहतमंद रखने में भी मदद करता है।
(अपनी रोग बीमारी का विवरण आध्यात्मिक चिकित्सा केंद्र के पेज के मेसेज बॉक्स में भेजे और समाधान पाए )
इस तरह उपयोग करें आम की पत्तियां
-हल्के हरे रंग के छोटे आकार के आम के पत्तों को तो़ड़ लें, उन्हें अच्छे से धोएं और छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर चबाइये।
-आम के कुछ पत्तों को तोड़िये और रात भर के लिये बर्तन में भिगो दें। अलसुबह इसका सेवन करें। ध्यान रखें इसका सेवन खाली पेट ही करें।
-पत्तियों को धो कर धूप में सुखाएं और पावडर बना लें। इस पावडर की एक चम्मच लें और एक गिलास पानी में मिलाकर पी लें। रोज सुबह एक चम्मच सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।

Thursday, August 6, 2015

DIASATION PROBLEMS


अपच के लक्षण और अपच के आयुवेर्दिक उपाय

जब खाना ठीक से नहीं पचता है तब अजीर्ण, अपच होने लगती है। अजीर्ण के मुख्य लक्षण और कारण हैं। मीठे का ज्यादा 


प्रयोग करना, बार-बार खाना खाते रहना, बासी खाने का सेवन, पानी कम पीना, आदि। अजीर्ण के मुख्य लक्षण हैं खट्टी डकार आना, गैस बनना, पेट में दर्द, छाती में जलन होना आदि। लेकिन अब आपको अजीर्ण से परेशान होने की जरूरत नहीं है आयुर्वेद में दिए गए हैं अजीर्ण से बचने के आसान तरीके।
अजीर्ण और अपच के आयुवेर्दिक उपाय :


1. पपीता को छिलकर उसमें सेंधा नमक और पिसी हुई काली मिर्च बुरक कर सेवन करने से अजीर्ण ठीक हो जाता है।
2. नींबू को काटकर उसमें सेंधा नमक लगाकर चाटने से अपच और अजीर्ण से मुक्ति मिलती है।
3. उपवास के दिन कई बार अजीर्ण आना स्वभाविक है। एैसे में पानी में नींबू का रस घोलकर पीने से लाभ मिलता है।
4. मूली पर नमक और पीसी काली मिर्च को बुरक कर खाने से खाना पच जाता है और अजीर्ण भी नहीं होता।
5. काली मिर्च, तुलसी को खाना खाने के बाद सेवन करने से अजीर्ण की समस्या दूर होती है।
6. सिका हुआ जीरा, नमक और काली मिर्च को दही में डालकर सेवन करने से खाना जल्दी पच जाता है।
7. एक गिलास नारंगी के रस का सेवन करने से अपच की दिक्कत दूर हो जाती है।
8. सेंधा नमक को 1 चम्मच पिसी अजवायन में मिलाकर खाली पेट पानी के साथ लेने से कभी अजीर्ण नहीं होगा।
9. अमरूद काटकर उसमें काला नमक मिलाकर खाने से अपच की समस्या नहीं होती है।
10. आधा कप पानी में 2 लौंग डालकर उसे उबाल लें और फिर उसे ठंडा होने दें, नित्य दिन में 3 बारी इस पानी का सेवन करें जरूर लाभ मिलेगा।
11. फूलगोभी का रस और गाजर का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से थोड़े ही दिनों में ही अपच की समस्या दूर हो जाएगी।
12. खट्टी डकार आने पर आधे गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर चीनी मिलाकर पीने से खट्टी डकार आनी बंद हो जाती है।
13. एक गिलास पानी में दो चम्मच जीरा डालकर उसे उबाल लें और उसे ठंडा करके छान लें और इस पानी को नियमित पीते रहें। थोड़े ही दिनों में अपच की दिक्कत दूर हो जाएगी।
14. राई को पीसकर पानी में घोलकर पीने से अपच और अजीर्ण नहीं होता है।
अपच और अजीर्ण की वजह से बड़ी परेशानी होती है। इसलिए कोशिश करें बासी खाना न खाएं और जितना हो सके पानी को अधिक पीएं। इन आयुवेर्दिक उपायों से आप अजीर्ण की समस्या से निजात पाया जा सकता है।

COUGH AND ALLERGY

खांसी, नाक में एलर्जी के घरेलू उपाय

एक अच्छी दवाई जुकाम एलर्जी सर्दी आदि के लिये जिसे आप घर पर बना सकते हैं इसके लिये आपको 

चाहिये तुलसी के पत्ते, तना और बीज तीनों का कुल वजन 50 ग्राम। इसके लिये आप तुलसी को ऊपर से तोड़ 

लें इसमें बीज तना और तुलसी के पत्ते तीनों आ जाएंगे। इनको एक बर्तन में डालकर 500 मिली पानी डाल लें 

और इसमें 100 ग्राम अदरक और 20 ग्राम काली मिर्च दोनों को पीस कर डालें और अच्छे से उबालें और जब 

पानी 100 ग्राम रह जाए तो इसे छान कर किसी कांच की बोतल में डाल कर रखें इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर 

आप इसके दो चम्मच दिन में 3 बार ले सकते हैं।

– जुकाम के लिये 2 चम्मच अजवायन को तवे पर हल्का भूने और फिर उसे एक रूमाल या कपड़े में बांध ले 


और पोटली बना ले। उस पोटली को नाक से सूंघे और सो जाएं।

– अगर दही खाते हैं तो उसे बंद कर दें और रात को सोते समय दूध न पियें।

– तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में सबसे बढ़िया रहती है।


– हींग, त्रिफला, मुलहठी और मिश्री को नींबू के रस में मिलाकर लेने से खांसी में मदद मिलती है।



– पीपली, काली मिर्च, सौंठ और मुलहठी का चूर्ण बनाकर चौथाई चम्मच शहद के साथ लेना अच्छा रहता है।

UNCONCIOUS- BEHOSHI

बेहोशी (Unconscious)
परिचय:-
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति कुछ समय के लिए बेहोश हो जाता है। इस अवस्था में रोगी एक दम मरे हुए इंसान की अवस्था में आ जाता है और वह कोई भी क्रिया नहीं कर पाता है।
लक्षण:-
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति एक दम मृत की अवस्था में जमीन पर गिर जाता है तथा उसे कुछ भी होश नहीं रहता है। रोगी व्यक्ति के चेहरे का रंग पीला पड़ जाता है। उसके माथे से ठंडा पसीना छूटने लगता है। उसकी आंखों के आगे अन्धेरा सा छा जाता है।
बेहोशी होने का कारण:-
जब किसी कारण से मस्तिष्क में खून का संचारण रुक जाता है तो व्यक्ति बेहोश हो जाता है। यह रोग मस्तिष्क की नाड़ियों में किसी प्रकार का रोग उत्पन्न होने के कारण होता है।
अधिक समय तक उपवास रखने के कारण भी यह रोग व्यक्ति को हो सकता है क्योंकि अधिक समय तक उपवास रखने के कारण व्यक्ति के मस्तिष्क में खून का संचारण कम हो जाता है और व्यक्ति बेहोश हो जाता है।
शरीर में से किसी दुर्घटना या दूसरे कारण से अधिक रक्त निकल जाने की वजह से भी व्यक्ति बेहोश हो सकता है।
किसी रोग के कारण तेज दर्द होने से रोगी व्यक्ति बेहोश हो सकता है।
दूषित गैस जब किसी प्रकार से सांस के द्वारा शरीर के अन्दर चली जाती है तो भी व्यक्ति बेहोश हो जाता है।
सिर पर किसी तरह की चोट आदि लगने के कारण भी व्यक्ति बेहोश हो जाता है।
बेहोशी रोग से पीड़ित व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-
जब कोई व्यक्ति बेहोश हो जाता है तो उस समय सबसे पहले रोगी व्यक्ति के कपड़ों को ढीला कर देना चाहिए। फिर इसके बाद रोगी व्यक्ति को खुली हवादार जगह पर लिटा देना चाहिए। इसके बाद उसके चेहरे पर पानी के छींटे मारने चाहिए।
जब रोगी की अवस्था बहुत अधिक गंभीर हो जाए तो उस समय उसके चेहरे पर पानी की छींटे मारने के अलावा उसके सीने और मस्तक पर कपड़े की ठंडी पटि्टयां भी रखनी चाहिए। फिर इसके बाद रोगी की नाभि के निचले हिस्से पर मिट्टी की गीली पट्टी बांधनी चाहिए।
जब रोगी व्यक्ति होश में आ जाए तो उसे गुनगुने पानी से गरारे कराने चाहिए और थोड़ा सा गरम पानी पीने के लिए देना चाहिए।
इस रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक फलों का रस पिलाना चाहिए, जिसके फलस्वरूप शरीर के अन्दर के दूषित द्रव्य शरीर से बाहर पेशाब के द्वारा निकल जाते हैं और मस्तिष्क की नाड़ियां ठीक प्रकार से कार्य करने लगती हैं।
बेहोश हुए व्यक्ति के पेड़ू (नाभि) पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए जिससे व्यक्ति जल्दी ही होश में आ जाता है।
रोगी व्यक्ति के रीढ़ के भाग को भीगे तौलिये से पोंछना चाहिए और उस पर कुछ समय के लिए गरम तथा ठंडी सिंकाई करनी चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
जब रोगी व्यक्ति होश में आ जाए तो उसे गुनगुना पानी पिलाना चाहिए |
जानकारी-
इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से बेहोश रोगी का इलाज करने से रोगी व्यक्ति जल्दी ही होश में आ जाता है और उसका रोग ठीक हो जाता है।

Tuesday, July 14, 2015

DIASATION PROBLEMS

अपच के लक्षण और अपच के आयुवेर्दिक उपाय
जब खाना ठीक से नहीं पचता है तब अजीर्ण, अपच होने लगती है। अजीर्ण के मुख्य लक्षण और कारण हैं। मीठे का ज्यादा प्रयोग करना, बार-बार खाना खाते रहना, बासी खाने का सेवन, पानी कम पीना, आदि। अजीर्ण के मुख्य लक्षण हैं खट्टी डकार आना, गैस बनना, पेट में दर्द, छाती में जलन होना आदि। लेकिन अब आपको अजीर्ण से परेशान होने की जरूरत नहीं है आयुर्वेद में दिए गए हैं अजीर्ण से बचने के आसान तरीके।
अजीर्ण और अपच के आयुवेर्दिक उपाय :
1. पपीता को छिलकर उसमें सेंधा नमक और पिसी हुई काली मिर्च बुरक कर सेवन करने से अजीर्ण ठीक हो जाता है।
2. नींबू को काटकर उसमें सेंधा नमक लगाकर चाटने से अपच और अजीर्ण से मुक्ति मिलती है।
3. उपवास के दिन कई बार अजीर्ण आना स्वभाविक है। एैसे में पानी में नींबू का रस घोलकर पीने से लाभ मिलता है।
4. मूली पर नमक और पीसी काली मिर्च को बुरक कर खाने से खाना पच जाता है और अजीर्ण भी नहीं होता।
5. काली मिर्च, तुलसी को खाना खाने के बाद सेवन करने से अजीर्ण की समस्या दूर होती है।
6. सिका हुआ जीरा, नमक और काली मिर्च को दही में डालकर सेवन करने से खाना जल्दी पच जाता है।
7. एक गिलास नारंगी के रस का सेवन करने से अपच की दिक्कत दूर हो जाती है।
8. सेंधा नमक को 1 चम्मच पिसी अजवायन में मिलाकर खाली पेट पानी के साथ लेने से कभी अजीर्ण नहीं होगा।
9. अमरूद काटकर उसमें काला नमक मिलाकर खाने से अपच की समस्या नहीं होती है।
10. आधा कप पानी में 2 लौंग डालकर उसे उबाल लें और फिर उसे ठंडा होने दें, नित्य दिन में 3 बारी इस पानी का सेवन करें जरूर लाभ मिलेगा।
11. फूलगोभी का रस और गाजर का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से थोड़े ही दिनों में ही अपच की समस्या दूर हो जाएगी।
12. खट्टी डकार आने पर आधे गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर चीनी मिलाकर पीने से खट्टी डकार आनी बंद हो जाती है।
13. एक गिलास पानी में दो चम्मच जीरा डालकर उसे उबाल लें और उसे ठंडा करके छान लें और इस पानी को नियमित पीते रहें। थोड़े ही दिनों में अपच की दिक्कत दूर हो जाएगी।
14. राई को पीसकर पानी में घोलकर पीने से अपच और अजीर्ण नहीं होता है।
अपच और अजीर्ण की वजह से बड़ी परेशानी होती है। इसलिए कोशिश करें बासी खाना न खाएं और जितना हो सके पानी को अधिक पीएं। इन आयुवेर्दिक उपायों से आप अजीर्ण की समस्या से निजात पाया जा सकता है।

Wednesday, March 4, 2015

IMPORTANT TIPS

90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं.....!

* पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए।


अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेंगे ।

* 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन


के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।
* 80 रोग चाय पीने से होते हैं ।

* ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ीआंत सिकुड़

जाती है।

* भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द

हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।

* शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल

पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।

* गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम

हो जाती है और

शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से

आँखें कमजोर हो जाती हैं।

* खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में

पीड़ा होती है।

* खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़

की हड्डी को हानि होती है।

* भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप

(ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।

* जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।

* मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।

* पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और

क्षय(टीबी) होने का डर रहता है।

* चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध

हो जाता है मलेरिया नहीं होता है।

* तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।

* हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस,

तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त

आटा, छिलकेयुक्त अनाज औशधियां हैं।

* भोजन के पश्चात् गुड़ या सौंफ खाने से पाचन

अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।

* मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर

होती है।

* जल सदैव ताजा(चापाकल, कुएं आदि का)

पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और

अनेक रोगों के कारण होते हैं।

* नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के

रोग) तथा हैजा से बचाता है।


* फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त

जल नहीं पीना चाहिए।

* भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए।

उसके पश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12

घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।।

* मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोशकता 100%

कांसे के बर्तन में 97% पीतल के बर्तन में 93%

अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13%

ही बचते हैं।

* गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार,

बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक

पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए।

* खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेश्ठ होता है उसके

बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर

के समान होता है।

* सरसों, तिल,मूंगफली या नारियल का तेल

ही खाना चाहिए। देशी घी ही खाना चाहिए ।

रिफाइंड तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर

होता है।

* पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से

आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक

हो जाती है।

* खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।

* चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20

मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है।

* मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी(कच्ची)

चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर

होता है।

* बर्तन मिटटी के ही परयोग करन चाहिए।

* टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन

करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे।

(आँखों के रोग में दातून नहीं करना)



Saturday, February 14, 2015

REMEDY OF DIABETES

हमारे शरीर में अनेकों प्रकार
की ग्रंथियां होती है जो शरीर
को अलग-अलग
प्रकार से पोषण देने तथा शरीर के अवशिष्ट
पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं
जिससे शरीर का संतुलन बना रहता है।
ऐसा ही एक ग्रंथी है पेन क्रियाज इस
ग्रंथी का कार्य है इंसुलिन बनाना,
यही इंसुलिन शरीर के धमनीयों के
द्वारा रक्त में पहुंच कर रक्त में मौजूद शुगर
की मात्रा को नियंत्रित करता है।
कभी-कभी शरीर की पेनक्रियाज ग्रंथी किस
कारण अपना काम करना बंद कर देती है तब
इंसुलिन बनना बंद हो जाता है फिर हम जो भोजन करते हैं उसमें शरीर की आवश्यकता से अधिक शक्कर की मात्रा होने पर हमारे रक्त कणों में मिल
जाती है और खुन में शक्कर की मात्रा अधिक
होने लगती है इसी अवस्था को डायबिटिज
अथवा शुगर कहा जाता है।
भोजन के रूप में ग्रहण किया गया कार्बोहाइड्रेट शरीर
की रासायनिक क्रयाओं से गुजरते हुए ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाता है फिर रक्त वाहिनी कोशिकाओं के माध्यम से रक्त में मिल जाता है, इस ग्लुकोज को शरीर की अनेकों कोशिकाएं ग्रहण करती हैं
परंतु पेनक्रियाज में इंसुलिन न बनने के कारण शरीर
में अधिक मात्रा में ग्लुकोज इक्कट्ठा होने लगता है जिसे अन्य कोशिकाएं ग्रहण करने लगती हैं फल स्वरूप किडनी, लिवर, आँख, हृदय इत्यादि पर बुरा असर पड़ता है।
मधुमेह-
जब शरीर में अत्यधिक मात्रा में शक्कर इकक्ट्ठा होने लगता है तब वह शुगर पेशाब के माध्यम से बाहर निकलने लगता है तथा शरीर मे कमजोरी आने लगती है इसी अवस्था को मधुमेह कहा जाता है।
डायबिटिज से ग्रसित रोगीयों की संख्या भारत में
करीब 5 करोड़ 70 लाख के लगभग है इस प्रकार से यह रोग भारत की प्रमुख समस्या बनती जा रही है। आज भारत में डायबिटिज के कारण करोड़ों लोग
डायबिटिज के कारण हार्ट अटैक, किडनी फेलियर, पैरालायसिस, मानसिक तनाव, अनिद्रा, लिवर डेमेज, इत्यादि समस्याओं के शिकार होते जा रहे है। वहीं डायबिटिज से ग्रसित रोगियों का परहेज के कारण हाल-बेहाल है, शक्कर, गुड़, मिठाई, चावल,आलु,
जैसे अनेकों मीठे खाद्य सामग्रीयां उनके लिए खतरे से खाली नही। यदि वास्तव में देखा जाए तो डायबिटिज से ग्रसित रोगीयों का पुरा जीवन निरस और बेकार
हो जाता है।
डायबिटिज के कारण-
डायबिटिज होने के अनेकों कारण हैं जैसे-
मानसिक तनाव, अत्यधिक चिंता, लोभ, मोह,
क्रोध तथा शरीरिक श्रम में कमी इत्यादि।
डायबिटिज की बिमारी यदि एक बार
किसी को लग जाए तो फिर उससे उत्पन्न होने
वाले वंश को भी डायबिटिज का खतरा रहता है।
आयुर्वेद में डायबिटिज का इलाज-

1. मेथी 100 ग्राम, तेजपत्र 100 ग्राम, जामुन
गुठली 150 ग्राम, तथा बेलपत्र 250 ग्राम
सबको इकट्ठा कर कुटपीस कर चुर्ण बनालें फिर
एक-एक चम्मच सुबह शाम खाली पेट सेवन करें
तो डायबिटिज समाप्त हो जाता है।

2. बेलपत्र 25 ग्राम, तेजपत्र 25 ग्राम,
निमपत्र 50 ग्राम, करेला बीज 100 ग्राम,
जामुन गुठली 150 ग्राम तथा गुड़मार
की पत्ती 200 ग्राम सभी सामग्रीयों को मिला कर
कुटपीस कर चूर्ण बनालें फिर एक-एक चम्मच चुर्ण
को सुबह शाम पानी के साथ खाली पेट सेवन करें।

3. गुड़मार पत्ती 200 ग्राम, जामुन गुठली 100 ग्राम, सोंठ 100 ग्राम सबको मिलाकर बारीक चुर्ण बना लें फिर घीक्वार के रस की सात भावना दें
तत्पश्चात गोली बनाकर छाया में सुखालें इस प्रकार
बनी गोली को दिन में तीन बार दो-दो गोली सेवन करें।

4. सदाबहार की पत्ती 5 पीस, तुलसी पत्र 10
पीस, बेलपत्र 3 पीस तथा गुड़मार
पत्ती 3 पीस सबको मिलाकर पानी के साथ
पीस कर सुबह शाम खाली पेट सेवन करें।

5. अमेरिका मे पाया जाने वाला स्टीविया नामक पौधे को डायबिटिज के इलाज में कारगर पाया गया है। इस्टिविया की पत्ती की मिठास गुड़, शक्कर तथा शहद से तीन सौ गुना अधिक होता है इसके बावजूद भी यह डायबिटिज को नही बढ़ाता बल्कि डायबिटिज के लेबल को शरीर से आश्चर्य जनक ढंग से कम करता है तथा डायबिटिज को जड़ से भी समाप्त करने की क्षमता भी रखता है।

Wednesday, January 14, 2015

REMEDY FOR BREAST CANCER

गौ मूत्र से स्तन कैंसर का इलाज ! माताएँ बहने जरूर पढ़ें !
___________________
महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर हो रहा है स्तनों में ( Breast मे ) और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. पहले 
Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए !
! बहुत बड़े hosptial tata institute वो महिला इलाज करवाती करवाती बहुत परेशान हो गई 
थी ! और वो घाव बढ़ता ही जा रहा था ! 
और अंत डाक्टर ने कहा अब मैं इनको breast भी कट करूंगा तो भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला ! और वो बहुत 
गरीब महिला थी उसके पति ने खेत बेचकर डाकटर की फीस भरी थी !
ओषधि क्या है ध्यान से पढ़िये !
औषधि है देशी गाय का मूत्र लीजिये (सूती के आठ परत कपड़ो में छान लीजिये ) 

हल्दी लीजिये और गेंदे के फूल लीजिये । गेंदे के फुल की पीला या नारंगी पंखरियाँ निकलना है, फिर उसमे \
हल्दी डालकर गाय मूत्र डालकर उसकी चटनी बनानी है।
अब चोट का आकार कितना बढ़ा है उसकी साइज़ के हिसाब से गेंदे के फुल की संख्या तय होगी, माने चोट 
छोटे एरिया में है तो एक फुल, काफी है चोट बड़ी है तो दो, तीन,चार अंदाज़े से लेना है। इसकी चटनी बनाके 
इस चटनी को लगाना है जहाँ पर भी बाहर से खुली हुई चोट है जिससे खून निकल जुका है और ठीक नही हो 
रहा। कितनी भी दावा खा रहे है पर ठीक नही हो रहा, ठीक न होने का एक कारण तो है डाईबेटिस दूसरा कोई 
जैनेटिक कारण भी हो सकते है।
इसको दिन में कम से कम दो बार लगाना है जैसे सुबह लगाके उसके ऊपर रुई पट्टी बांध दीजिये ताकि उसका 
असर बॉडी पे रहे; और शाम को जब दुबारा लगायेंगे तो पहले वाला धोना पड़ेगा ! इसको गोमूत्र से ही धोना है 
डेटोल जैसो का प्रयोग मत करिए, गाय के मूत्र को डेटोल की तरह प्रयोग करे। धोने के बाद फिर से चटनी लगा 
दे। फिर अगले दिन सुबह कर दीजिये।
यह इतना प्रभावशाली है इतना प्रभावशाली है के आप सोच नही सकते देखेंगे तो चमत्कार जैसा लगेगा। यहाँ 
आप मात्र post पढ़ रहे लेकिन अगर आपने सच मे किया तब आपको इसका चमत्कार पता चलेगा !इस 
औषधि को हमेशा ताजा बनाके लगाना है। किसीका भी जखम किसी भी औषधि से ठीक नही हो रहा है तो ये 
लगाइए। जो सोराइसिस गिला है जिसमे खून भी निकलता है, पस भी निकलता है उसके लीजिये भी यह 
औषधि पूर्णरूप से ठीक कर देती है।
अकसर यह एक्सीडेंट के केस में खूब प्रोयोग होता है क्योंकि ये लगाते ही खून बंद हो जाता है। ऑपरेशन का 
कोई भी घाव के लिए भी यह सबसे अच्छा औषधि है। गिला एक्जीमा में यह औषधि बहुत काम करता है, जले 
हुए जखम में भी काम करता है।

Sunday, January 4, 2015

TRUE FACTS ABOUT SEX

Pasha वाजीकरण
(संभोग शक्ति बढ़ाना)
.: परिचय-
यौनसुख अर्थात संभोग क्रिया के समय चरम सुख
की प्राप्ति होना बहुत ही आनंददायक
होता है। इसकी तुलना बहुत से विद्वानों ने स्वर्ग
के
सुख से की है। हर मनुष्य पूरे
जीवन
इस सुख को भोगना चाहता है। मनुष्य
कभी भी काम अर्थात सेक्स से मुक्त
नहीं होना चाहता। यही उसके
जीवन का प्राथमिक बिंदु है। काम अर्थात सेक्स
की शक्ति परमात्मा की शक्ति है
इसलिए
तो काम अर्थात सेक्स से शरीर में
ऊर्जा पैदा होती है इसलिए मनुष्य
को पूरी तरह से काम-शक्ति संपन्न होना चाहिए।
लेकिन आज के आधुनिक युग में
युवा पीढ़ी पर काम का बोझ, एक-दूसरे
से
आगे निकलने की होड़, मानसिक तनाव , विषाद, नशे
की लत, पश्चिमी सभ्यता को अपनाने
की लालसा, अप्राकृतिक मैथुन , एलोपैथिक दवाईयों के
दुष्परिणाम, खान-पान में अनिमियता बरतना, दूषित वातावरण और
बढ़ती हुई कामवासना के कारण उम्र से पहले
ही यौनशक्ति की कमी से
पीड़ित होते जा रहे हैं।
कामशक्ति की कमी से ग्रस्त
युवकों की संख्या दिन पर दिन
बढ़ती ही जा रही है।
वाजीकरण की जरूरत-
दुनिया में हर स्त्री और पुरुष सेक्स के लिए
बराबर रूप से समर्थ नहीं होते हैं और हर कोई
संतान पैदा करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। जैसे
कि बहुत से पुरुष शरीर से तो बहुत
ही हष्ट-पुष्ट और ताकतवर होते हैं लेकिन फिर
भी वह संभोगशक्ति में कमजोर होते हैं।
इन्हीं के विपरीत बहुत से पुरुष
दुबले-
पतले शरीर वाले होते हुए भी बहुत
तेज संभोग शक्ति वाले और स्त्री को संतुष्ट करने
वाले होते हैं। बहुत से पुरुष स्वभाव से
ही सेक्स
करने में कमजोर होते हैं और इस क्रिया में कुछ
ही देर में थक जाते हैं। लेकिन बहुत से पुरुष
संभोग
शक्ति को ज्यादा लंबे समय तक ले जाने वाले होते हैं। कुछ
पुरुष
वाजीकरण औषधियों के सेवन से संभोग क्रिया में
सफल
होते हैं तो कुछ इस क्रिया का बार-बार अभ्यास करने से इस
क्रिया को सफल बनाते हैं। बहुत से पुरुष कम
वीर्य
वाले होते हैं तो कुछ संभोग क्रिया के समय देर से उत्तेजित
होने
वाले होते हैं। ऐसे पुरुषों में काम-उत्तेजना सोई हुई अवस्था में
होती है जिसे स्त्री के नग्न
शरीर के अंगों को देखकर, चुंबन, आलिंगन, सेक्स
के
बारे में बातचीत और नग्न तसवीर
आदि के
द्वारा जागृत किया जाता है। ऐसे पुरुषों को संभोग क्रिया में तुरंत
उत्तेजित करने के लिए वाजीकरण औषधियों का सेवन
कराना जरूरी होता है।
वाजीकरण का सेवन करने के लिए
जरूरी बातें-
आयुर्वेद में बताया गया है कि कम उम्र के बच्चों और
ज्यादा उम्र के पुरुषों को वाजीकरण औषधि का सेवन
नहीं करना चाहिए। इनका सेवन लगभग 16 से 50
साल तक की उम्र के लोगों को करना चाहिए।
क्योंकि यही उम्र सेक्स करने के लिए सबसे
ज्यादा अच्छा होता है। 16 साल से कम उम्र में या 50 साल से
ज्यादा की उम्र में सेक्स करना बेकार होता है
क्योंकि बाल्यकाल (युवावस्था से पहले की उम्र) में
शरीर की धातुएं (वीर्य,
शुक्राणु) पूरी तरह से विकसित
नहीं होते हैं और अगर ऐसे में वह
स्त्री के साथ संभोग क्रिया करता है तो वह उसके
लिए व्यर्थ ही होता है और कभी-
कभी हानिकारक भी हो जाता है।
इसी तरह से 50 साल की उम्र
अर्थात वृद्धावस्था में शरीर
की सारी धातुएं (वीर्य,
शुक्राणु) कमजोर हो जाती हैं। कमजोर
शरीर वाला, कमजोर हड्डियों वाला व्यक्ति अगर
किसी स्त्री के साथ संभोग करने में लग
जाता है तो वह इसमें कुछ पाने के बजाय अपने
शरीर
का नाश करवा लेता है। रसायन औषधि के सेवन से जहां नए
यौवन
की प्राप्ति होती है
वही वाजीकरण औषधियों के सेवन से
यौनसुख मिलता है। जिस व्यक्ति का मन उसके वश में
रहता है
वह हमेशा वाजीकरण औषधि का सेवन कर
सकता है।
.: वाजीकरण द्रव्य-
दूध-
आयुर्वेद के अनुसार दूध को सबसे
ज्यादा उपयोगी वाजीकरण औषधि का नाम
दिया गया है। दूध वीर्य की वृद्धि करने
वाला, काम-शक्ति को बढ़ाने वाला और शरीर
की खोई हुई ताकत को दुबारा पैदा करने में
प्रभावशाली होता है। अगर स्त्री के
साथ
संभोग करने से पहले गर्म दूध पी लिया जाए
तो इससे
यौनशक्ति बढ़ती है, संभोग के प्रति मन में
इच्छा पैदा होती है, पूरी मात्रा में
वीर्य स्खलन होता है। वहीं अगर
संभोग करने के बाद गर्म और मीठा दूध
पीने से संभोग करने के समय खर्च हुई
शक्ति दुबारा मिलकर व्यक्ति की थकान दूर
हो जाती है। इसलिए संभोग करने के पहले और
बाद
में हमेशा दूध पीना चाहिए।
अंडा-
अंडे के अंदर वीर्य को बढ़ाने
की बहुत ज्यादा क्षमता होती है।
दूध
के अंदर अंडे की जर्दी मिलाकर
पीने से वीर्य बढ़ता है और संभोग
करने
की शक्ति भी तेज
होती है।
वैसे तो ज्यादातर लोग मुर्गी और
मोरनी के
अंडों का सेवन करते ही हैं लेकिन इनके
अलावा चिड़िया के अंडों को भी बहुत
ज्यादा वाजीकरण औषधि के रूप में गिना जाता है।
.: गोखरू-
गोखरू का फल कांटेदार होता है और औषधि के रूप में
काम आता है। बारिश के मौसम में यह हर जगह पर
पाया जाता है। नपुंसकता रोग में गोखरू के लगभग 10 ग्राम
बीजों के चूर्ण में इतने ही काले तिल
मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। पकने पर
इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर
इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन
करना चाहिए। इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग
में
बहुत ही लाभ होता है।
इसके अलावा गोखरू का चूर्ण, आंवले का चूर्ण,
नीम और गिलोय को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण
बना लें। इस बने हुए चूर्ण को रसायन चूर्ण कहा जाता है।
इस
चूर्ण को रोजाना 3 बार 1-1 चम्मच की मात्रा में दूध
या ताजे पानी के साथ लेने से नपुंसकता , संभोग करने
की इच्छा न करना, वीर्य
की कमी होना, प्रमेह, प्रदर और
मूत्रकृच्छ जैसे रोगों में लाभ होता है।
.: मूसली-
मूसली पूरे भारत में पाई
जाती है। यह सफेद और
काली दो प्रकार
की होती है।
काली मूसली से
ज्यादा गुणकारी
सफेद मूसली होती है। यह
वीर्य को गाढ़ा करने
वाली होती है।
मूसली के चूर्ण को लगभग 3-3 ग्राम
की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ लेने से
वीर्य
की बढ़ोत्तरी होती है और
शरीर में काम-
उत्तेजना की वृद्धि होती है।
इसके अलावा मूसली के लगभग 10 ग्राम
चूर्ण को 250 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर
अच्छी तरह से उबालकर
किसी मिट्टी के बर्तन में रख दें। इस
दूध
में रोजाना सुबह और शाम पिसी हुई
मिश्री
मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन,
शीघ्रपतन और संभोग
क्रिया की इच्छा न
करना, वीर्य की कमी
होना आदि रोगों में बहुत लाभ मिलता है।
कौंच-
कौंच को कपिकच्छू और कैवांच आदि के नामों से
भी जाना जाता है। संभोग करने
की शक्ति को बढ़ाने के लिए इसके बीज
बहुत लाभकारी रहते हैं। इसके
बीजों का सेवन करने से वीर्य
की बढ़ोत्तरी होती है,
संभोग
करने की इच्छा तेज होती है और
शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है। इसके
बीजों का उपयोग करने के लिए
बीजों को दूध
या पानी में उबालकर उनके ऊपर
का छिलका हटा देना चाहिए। इसके बाद
बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण
बना लेना चाहिए। इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम
की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के
साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन
और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।
कौंच के बीज, सफेद मूसली और
अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में
मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण तैयार
कर लें। इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम
दूध
के साथ लेने से लिंग का ढीलापन,
शीघ्रपतन और वीर्य
की कमी होना जैसे रोग
जल्दी दूर हो जाते हैं।
शतावरी-
शतावरी को लेटिन भाषा में असपारगस-
रेसेमेसस कहा जाता है। इसका पौधा उत्तर भारत में
ज्यादा पाया जाता है। इसकी जड़ को औषधि के रूप
में
प्रयोग किया जाता है। शरीर में बल और
वीर्य को बढ़ाने के लिए
शतावरी की जड़ का चूर्ण लगभग 5-5
ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम गर्म दूध के
साथ
लेना लाभकारी रहता है। इसे दूध में चाय
की तरह पकाकर भी सेवन
किया जा सकता है। यह औषधि स्त्रियों के स्तनों को बढ़ाने में
लाभकारी रहती है।
शतावरी के ताजे रस को 10 ग्राम
की मात्रा में लेने से कुछ ही समय में
वीर्य बढ़ता है।
विदारीकंद-
विदारीकंद की बेल पूरे भारत में
खासकर हिमालय की निचली पहाड़ियों,
बंगाल, पंजाब, असम आदि स्थानों पर मिलती है।
इसको लेटिन भाषा में Pueraria-Tuberosa कहा जाता है।
विदारीकंद के चूर्ण को 5-5 ग्राम
की मात्रा में सुबह और शाम असमान मात्रा के
घी और शहद के साथ मिलाकर चाटने और ऊपर से
गर्म दूध पीने से पुरुष की काम-
शक्ति तेज हो जाती है। विदारीकंद बल
और वीर्य बढ़ाने वाली औषधि है।
इसके
अलावा विदारीकंद के चूर्ण में
इसी का ताजा रस मिलाकर लगभग 21 बार घोटें व
डिब्बे
में सुरक्षित रखें। इसमें से 5-5 ग्राम
की मात्रा लेकर
दिए गए तरीके से ही दूध के साथ
सेवन
करने से पुरुष का वीर्य बढ़ता है।

WORMS IN CHILD STOMATCH

बच्चों को चूरने होना आम समस्या है. 

इस रोग में बच्चे को गुदा द्वार पर छोटे छोटे कीड़े हो जाते हैं. जो काटते रहते हैं और बच्चे को गुदा द्वार पर
 खुजली और हल्का दर्द होता है.
समस्या अगर बढ़ जाती है तो गंभीर इन्फेक्षन का भी रूप ले लेती है.

आमतौर पर यह रोग ज़्यादा मीठा खाने खाने से होता है.
इसके उपचार हेतु आप शुद्ध हीरा हींग लीजिए.

इसको शुद्ध देसी घी या शुद्ध तिल के तेल में मिला लीजिए और 

रूई के फाहे से गुदा द्वार पर लगा दीजिए.
सुबेह शाम 2 बार कीजिए. समस्या हल हो जाएगी.
इसके अतिरिक्त बच्चे को मीठा देना बिल्कुल बंद कर दीजिए 

और हरड़ को पानी में घिस कर सुबेह शाम 1 चम्मच पिला दीजिए.