Saturday, October 24, 2015

Ayurvedic Contracipative

गर्भनिरोधक आयुर्वेदिक नुस्खेँ
‪
*गर्भनिरोधक Ayurvedic Tips (आयुर्वेदिक नुस्खेँ)*
वैसे तो गर्भनिरोधकों के तमाम विकल्प बाजार में मौजूद हैं लेकिन अगर आप इनके केमिकल या साइड एफेक्ट से दूरी रखना चाहते हैं या फिर इन प्रचलित
तरीकों में यकीन नहीं रखते हैं तो आयुर्वेद में आपके लिए कुछ घरेलू उपाय भी हैं। आयुर्वेद पर यकीन रखते हैं तो इन उपायों का गर्भनिरोधक के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे तो इनके साइड एफेक्ट नहीं है लेकिन इनका इस्तेमाल आप किसी अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श से करें तो प्राकृतिक और सुरक्षित तौर पर गर्भनिरोध और बेफिक्र सेक्स लाइफ आसान हो सकेगी।

*कैस्टर यानी अरंडी के
बीज को फोड़ें और इनमें मौजूद सफेद
बीज को निकालें। सेक्स के 72 घंटे के
भीतर महिलाएं इसका सेवन करें तो यह आई-पिल
की तरह ही गर्भधारण रोक सकता है।
महिलाएं इसका सेवन पीरियड्स के
तीन दिनों तक करें तो एक महीने तक
इसका प्रभाव रहेगा।

*सूखे पुदीने के पत्ते का पाउडर बनाएं और स्टोर
कर लें। सेक्स के पांच मिनट के बाद एक ग्लास गुनगुने
पानी के साथ एक चम्मच पाउडर का सेवन करें।
महिलाओं के लिए यह नैचुरल कंट्रासेप्टिव दवा का काम करेगा।

*गुड़हल के फूल का पेस्ट बनाएं इसमें स्टार्च मिलाएं।
पीरियड्स के शुरुआती तीन दिनों तक इसका सेवन कंट्रासेप्टिव की तरह ही काम करेगा।

*आंवला, रसनजनम और हरितकारी को समान
मात्रा में लेकर इनका पाउडर बनाएं और स्टोर करें। ये
औषधियां किसी भी आयुर्वेदिक स्टोर
पर मिल जाएंगी। महिलाएं इनका सेवन पीरियड्स के चौथे दिन से 16वें दिन तक करें तो यह गर्भनिरोधक
गोलियों की तरह ही असरदार होता है।

Tuesday, October 20, 2015

HOW TO KILL STOMACH WARMS

आंतों के कीड़ों के लिए घरेलू उपचार
पेट में कीड़े पड़ जायें तो यह बहुत ही दुखदायी होता है। इसके कारण पेट में गैस, बदहजमी, पेट में दर्द, बुखार जैसी समस्‍यायें होती हैं, यह समस्‍या सबसे अधिक बच्‍चों में होती है लेकिन बड़ों की आंतों में भी कीड़े हो सकते हैं।
ये कृमि लगभग 20 प्रकार के होते हैं जो अंतड़ियों में घाव पैदा कर सकते हैं। इसके कारण रोगी को बेचैनी, पेट में गैस बनना, दिल की धड़कन असामान्‍य होना, बदहजमी, पेट में दर्द, बुखार जैसी कई प्रकार की समस्‍यायें होती हैं। इसके कारण रोगी को खाने में रुचि नहीं होती और उसे चक्‍कर भी आते हैं। गंदगी के कारण ही पेट में कीड़े होते हैं। अशुद्ध और खुला भोजन करने वालों को यह समस्‍या अधिक होती है। घरेलू उपचार के जरिये इस समस्‍या का इलाज किया जा सकता है।
1.अजवायन
अजवायन का सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। इसके लिए अजवायन का चूर्ण आधा ग्राम और उतना ही गुड़ में गोली बनाकर दिन में तीन बार इसका सेवन मरीज को करायें। अजवायन में एंटी-बैक्‍टीरियल तत्‍व पाये जाते हैं जो कीडों को समाप्‍त कर देते हैं। अजवायन का सेवन सेव 2-3 दिन करने पर कीड़े पेट से पूरी तरह से समाप्‍त हो जायेंगे।
2.काला नमक
चुटकी भर काला नमक और आधा ग्राम अजवायन चूर्ण मिला लीजिए, इस चूर्ण को रात के समय रोजाना गर्म पानी से लेने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं। अगर बड़ों को यह समस्‍या है तो काला नमक और अजवायन दोनों को बराबर मात्रा में लीजिए। सुबह-शाम इसका सेवन करने से पेट के कीड़े दूर हो जायेंगे।
3.अनार के छिलके
बच्‍चों और बड़ों दोनों में पेट के कीड़े हो जायें तो यह बहुत ही फायदेमंद उपचार है। अनार के छिलकों को सुखाकर इसका चूर्ण बना लीजिए। यह चूर्ण दिन में तीन बार एक-एक चम्मच लीजिए। कुछ दिनों तक इसका सेवन करने से पेट के कीड़े पूरी तरह से नष्‍ट हो जाते हैं।
4.नीम के पत्‍ते
नीम के पत्‍तों का सेवन करने से पेट की हर तरह की समस्‍या दूर हो जाती है। नीम के पत्‍ते एंटी-बॉयटिक होते हैं जो पेट के कीड़ों को नष्‍ट कर देते हैं। नीम के पत्‍तों को पीसकर उसमें शहद मिलकार पीने से जल्‍दी फायदा होता है और कीड़े नष्‍ट हो जाते हैं। सुबह के वक्‍त इनका सेवन करना अधिक फायदेमंद होता है।
5.टमाटर के जरिये
टमाटर का प्रयोग खाने का स्‍वाद बढ़ाने के साथ-साथ पेट के कीड़ों को नष्‍ट करने के लिए कर सकते हैं। टमाटर को काटकर, उसमें सेंधा नमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर इसका सेवन कीजिए। इस चूर्ण का सेवन करने के बाद पेट के कीड़े मर कर गुदामार्ग से बाहर निकल जाते हैं।
6.लहसुन की चटनी
पेट की समस्‍या दूर करने के साथ आंतों को पूरी तरह से साफ करने के लिए लहसुन का प्रयोग करें। अगर बच्‍चे या बड़े किसी को भी पेट में कीड़े हैं तो उसे लहसुन की चटनी खिलायें। लहसुन की चटनी बनाकर उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम खाने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।
7.तुलसी के पत्‍ते
तुलसी भी एंटी-बैक्‍टीरियल होती है, किसी भी प्रकार के संक्रमण के उपचार के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं। पेट में कीड़े होने पर तुलसी के पत्तों का एक चम्मच रस दिन में दो बार पीने से पेट के कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं। इसका सेवन करने से आंत पूरी तरह से साफ हो जाती है और पेट में गैस और कब्‍ज की भी शिकायत नहीं होती है।
8 कच्‍चे आम की गुठली
बच्‍चों या बड़ों की आंत में कीड़े पड़ गये हों तो कच्‍चे आम की गुठली का सेवन करने से कीड़े मल के रास्‍ते बाहर निकल जाते हैं। इसके लिए कच्चे आम की गुठली का चूर्ण दही या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इसके नियमित सेवन से कुछ दिनों में ही आंत के कीड़े बाहर निकल जायेंगे।

Monday, October 19, 2015

BENEFITS OF MANGOS

आम की पत्तियां इस तरह मदद करती है
प्राचीन चीनी दवाइयों में आम के पत्तों का अर्क डायबिटीज और अस्थमा के इलाज में उपयोग किया जाता है। आम के पत्तों में कैफीक एसिड जैसे फिनॉलिक, मैगीफेरिन जैसे पॉलिफिनॉल्स, गैलिक एसिड, फ्लेवोनोइड्स और कई अस्थाई यौगिकों जैसे घटक पाए जाते हैं। ये सभी गुण आम को अच्छा एंटी-डायबिटीक, एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी-एलर्जिक प्राकृतिक उत्पाद बनाते हैं।

ये हैं आम के खास गुणः
ब्लड शुगर नियंत्रणः ऐसा आम के पत्तों में मौजूद टैनिन की वजह से होता है। आम के पत्तों से निकला अर्क इंसुलिन उत्पादन और ग्लूकोज का प्रसार ब्लड शुगर का स्तर घटाता है। पढ़िये, किस तरह से आपका ब्लड शुगर लेवल आपके स्वभाव को प्रभावित करता है।
कम कोलेस्ट्रॉलः आपको याद रखना चाहिये कि डायबिटीज आपके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करता है और हृदय उनमें से एक होता है। कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर आपके हृदय को व्यापक तौर पर नुकसान पहुंचा सकता है। यदि आप शुगर की बीमारी से पीड़ित हैं तो बाकी चीजें आपके लिये स्वतः खराब होने लगती है। चूंकि आम के पत्तों में फाइबर, पेक्टिन और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है, जो आपके कोलेस्ट्रॉल, खासतौर पर एलडीएल या हानिकारक कोलेस्ट्रॉल के लेवल को घटाता है। इसके अलावा फल में मौजूद फ्लेवोनोविड्स लिपिड लेवल को कम करने में मदद करता है। इससे आपकी धमनियां मजबूत और स्वस्थ बन सकती है।
डायबिटीक रेटिनोपैथी का इलाजः आम के फल के साथ-साथ पत्तों में भी विटामिन ए होता है, जो आंखों के लिये बेहद फायदेमंद होता है। यही कारण है कि पत्ते भी आंखों को खराब होने से बचा सकते हैं, साथ ही ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखने में भी मदद करते हैं।
किडनी और लिवर की सेहतः डायबिटीज के चलते किडनी फेल होना बेहद आम है। अनियंत्रित ब्लड शुगर लेवल से यह बड़ी समस्या सबसे पहले होती है। आम का सेवन करने से इस समस्या से बचने में काफी मदद मिलती है। आम की पत्तियों से किडनी में पथरी की समस्या को हल करने और किडनी को सेहतमंद रखने में मदद मिलती है। इसी तरह यह आपको पित्ताशय की पथरी से निजात पाने और लिवर को सेहतमंद रखने में भी मदद करता है।
(अपनी रोग बीमारी का विवरण आध्यात्मिक चिकित्सा केंद्र के पेज के मेसेज बॉक्स में भेजे और समाधान पाए )
इस तरह उपयोग करें आम की पत्तियां
-हल्के हरे रंग के छोटे आकार के आम के पत्तों को तो़ड़ लें, उन्हें अच्छे से धोएं और छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर चबाइये।
-आम के कुछ पत्तों को तोड़िये और रात भर के लिये बर्तन में भिगो दें। अलसुबह इसका सेवन करें। ध्यान रखें इसका सेवन खाली पेट ही करें।
-पत्तियों को धो कर धूप में सुखाएं और पावडर बना लें। इस पावडर की एक चम्मच लें और एक गिलास पानी में मिलाकर पी लें। रोज सुबह एक चम्मच सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।