Thursday, August 6, 2015

DIASATION PROBLEMS


अपच के लक्षण और अपच के आयुवेर्दिक उपाय

जब खाना ठीक से नहीं पचता है तब अजीर्ण, अपच होने लगती है। अजीर्ण के मुख्य लक्षण और कारण हैं। मीठे का ज्यादा 


प्रयोग करना, बार-बार खाना खाते रहना, बासी खाने का सेवन, पानी कम पीना, आदि। अजीर्ण के मुख्य लक्षण हैं खट्टी डकार आना, गैस बनना, पेट में दर्द, छाती में जलन होना आदि। लेकिन अब आपको अजीर्ण से परेशान होने की जरूरत नहीं है आयुर्वेद में दिए गए हैं अजीर्ण से बचने के आसान तरीके।
अजीर्ण और अपच के आयुवेर्दिक उपाय :


1. पपीता को छिलकर उसमें सेंधा नमक और पिसी हुई काली मिर्च बुरक कर सेवन करने से अजीर्ण ठीक हो जाता है।
2. नींबू को काटकर उसमें सेंधा नमक लगाकर चाटने से अपच और अजीर्ण से मुक्ति मिलती है।
3. उपवास के दिन कई बार अजीर्ण आना स्वभाविक है। एैसे में पानी में नींबू का रस घोलकर पीने से लाभ मिलता है।
4. मूली पर नमक और पीसी काली मिर्च को बुरक कर खाने से खाना पच जाता है और अजीर्ण भी नहीं होता।
5. काली मिर्च, तुलसी को खाना खाने के बाद सेवन करने से अजीर्ण की समस्या दूर होती है।
6. सिका हुआ जीरा, नमक और काली मिर्च को दही में डालकर सेवन करने से खाना जल्दी पच जाता है।
7. एक गिलास नारंगी के रस का सेवन करने से अपच की दिक्कत दूर हो जाती है।
8. सेंधा नमक को 1 चम्मच पिसी अजवायन में मिलाकर खाली पेट पानी के साथ लेने से कभी अजीर्ण नहीं होगा।
9. अमरूद काटकर उसमें काला नमक मिलाकर खाने से अपच की समस्या नहीं होती है।
10. आधा कप पानी में 2 लौंग डालकर उसे उबाल लें और फिर उसे ठंडा होने दें, नित्य दिन में 3 बारी इस पानी का सेवन करें जरूर लाभ मिलेगा।
11. फूलगोभी का रस और गाजर का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से थोड़े ही दिनों में ही अपच की समस्या दूर हो जाएगी।
12. खट्टी डकार आने पर आधे गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर चीनी मिलाकर पीने से खट्टी डकार आनी बंद हो जाती है।
13. एक गिलास पानी में दो चम्मच जीरा डालकर उसे उबाल लें और उसे ठंडा करके छान लें और इस पानी को नियमित पीते रहें। थोड़े ही दिनों में अपच की दिक्कत दूर हो जाएगी।
14. राई को पीसकर पानी में घोलकर पीने से अपच और अजीर्ण नहीं होता है।
अपच और अजीर्ण की वजह से बड़ी परेशानी होती है। इसलिए कोशिश करें बासी खाना न खाएं और जितना हो सके पानी को अधिक पीएं। इन आयुवेर्दिक उपायों से आप अजीर्ण की समस्या से निजात पाया जा सकता है।

COUGH AND ALLERGY

खांसी, नाक में एलर्जी के घरेलू उपाय

एक अच्छी दवाई जुकाम एलर्जी सर्दी आदि के लिये जिसे आप घर पर बना सकते हैं इसके लिये आपको 

चाहिये तुलसी के पत्ते, तना और बीज तीनों का कुल वजन 50 ग्राम। इसके लिये आप तुलसी को ऊपर से तोड़ 

लें इसमें बीज तना और तुलसी के पत्ते तीनों आ जाएंगे। इनको एक बर्तन में डालकर 500 मिली पानी डाल लें 

और इसमें 100 ग्राम अदरक और 20 ग्राम काली मिर्च दोनों को पीस कर डालें और अच्छे से उबालें और जब 

पानी 100 ग्राम रह जाए तो इसे छान कर किसी कांच की बोतल में डाल कर रखें इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर 

आप इसके दो चम्मच दिन में 3 बार ले सकते हैं।

– जुकाम के लिये 2 चम्मच अजवायन को तवे पर हल्का भूने और फिर उसे एक रूमाल या कपड़े में बांध ले 


और पोटली बना ले। उस पोटली को नाक से सूंघे और सो जाएं।

– अगर दही खाते हैं तो उसे बंद कर दें और रात को सोते समय दूध न पियें।

– तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में सबसे बढ़िया रहती है।


– हींग, त्रिफला, मुलहठी और मिश्री को नींबू के रस में मिलाकर लेने से खांसी में मदद मिलती है।



– पीपली, काली मिर्च, सौंठ और मुलहठी का चूर्ण बनाकर चौथाई चम्मच शहद के साथ लेना अच्छा रहता है।

UNCONCIOUS- BEHOSHI

बेहोशी (Unconscious)
परिचय:-
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति कुछ समय के लिए बेहोश हो जाता है। इस अवस्था में रोगी एक दम मरे हुए इंसान की अवस्था में आ जाता है और वह कोई भी क्रिया नहीं कर पाता है।
लक्षण:-
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति एक दम मृत की अवस्था में जमीन पर गिर जाता है तथा उसे कुछ भी होश नहीं रहता है। रोगी व्यक्ति के चेहरे का रंग पीला पड़ जाता है। उसके माथे से ठंडा पसीना छूटने लगता है। उसकी आंखों के आगे अन्धेरा सा छा जाता है।
बेहोशी होने का कारण:-
जब किसी कारण से मस्तिष्क में खून का संचारण रुक जाता है तो व्यक्ति बेहोश हो जाता है। यह रोग मस्तिष्क की नाड़ियों में किसी प्रकार का रोग उत्पन्न होने के कारण होता है।
अधिक समय तक उपवास रखने के कारण भी यह रोग व्यक्ति को हो सकता है क्योंकि अधिक समय तक उपवास रखने के कारण व्यक्ति के मस्तिष्क में खून का संचारण कम हो जाता है और व्यक्ति बेहोश हो जाता है।
शरीर में से किसी दुर्घटना या दूसरे कारण से अधिक रक्त निकल जाने की वजह से भी व्यक्ति बेहोश हो सकता है।
किसी रोग के कारण तेज दर्द होने से रोगी व्यक्ति बेहोश हो सकता है।
दूषित गैस जब किसी प्रकार से सांस के द्वारा शरीर के अन्दर चली जाती है तो भी व्यक्ति बेहोश हो जाता है।
सिर पर किसी तरह की चोट आदि लगने के कारण भी व्यक्ति बेहोश हो जाता है।
बेहोशी रोग से पीड़ित व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-
जब कोई व्यक्ति बेहोश हो जाता है तो उस समय सबसे पहले रोगी व्यक्ति के कपड़ों को ढीला कर देना चाहिए। फिर इसके बाद रोगी व्यक्ति को खुली हवादार जगह पर लिटा देना चाहिए। इसके बाद उसके चेहरे पर पानी के छींटे मारने चाहिए।
जब रोगी की अवस्था बहुत अधिक गंभीर हो जाए तो उस समय उसके चेहरे पर पानी की छींटे मारने के अलावा उसके सीने और मस्तक पर कपड़े की ठंडी पटि्टयां भी रखनी चाहिए। फिर इसके बाद रोगी की नाभि के निचले हिस्से पर मिट्टी की गीली पट्टी बांधनी चाहिए।
जब रोगी व्यक्ति होश में आ जाए तो उसे गुनगुने पानी से गरारे कराने चाहिए और थोड़ा सा गरम पानी पीने के लिए देना चाहिए।
इस रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक फलों का रस पिलाना चाहिए, जिसके फलस्वरूप शरीर के अन्दर के दूषित द्रव्य शरीर से बाहर पेशाब के द्वारा निकल जाते हैं और मस्तिष्क की नाड़ियां ठीक प्रकार से कार्य करने लगती हैं।
बेहोश हुए व्यक्ति के पेड़ू (नाभि) पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए जिससे व्यक्ति जल्दी ही होश में आ जाता है।
रोगी व्यक्ति के रीढ़ के भाग को भीगे तौलिये से पोंछना चाहिए और उस पर कुछ समय के लिए गरम तथा ठंडी सिंकाई करनी चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
जब रोगी व्यक्ति होश में आ जाए तो उसे गुनगुना पानी पिलाना चाहिए |
जानकारी-
इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से बेहोश रोगी का इलाज करने से रोगी व्यक्ति जल्दी ही होश में आ जाता है और उसका रोग ठीक हो जाता है।