Monday, August 29, 2016

पलाश : वीर्य विकार, यौन शक्ति से लेकर लिंग की दृढ़ता तक 28 रोगों का रामबाण उपाय

  • प्रकृति ने हमें सब कुछ दिया है मगर जब तक आपको किसी भी वनस्पति की जानकारी नहीं है आपके लिए व्यर्थही है लेकिन जब आप उसके सहीगुणों को जान और पहचान जाते है तब आप कह उठते है अरे ये तो हमें पहले नहीं पता था इसी में एक नाम है “पलाश”
  • पलाश वीर्य विकार को दूर कर के उत्तम वाजीकरण है, पुरुषों के लिंग कि दृढ़ता शीघ्रपतन, स्तम्भन और शुक्र के शोधन में बहुत ही गुणकारी है, इसके साथ साथ ये बांझपन में भी अति श्रेष्ठ औषिधि है, आइये जानते हैं इसके गुण और उपयोग कि विधि।
  • इसे विभिन्न नामो से जाना जाता है -इसे ढाक-टेशू -पलाश-गुजराती में खाकरा-तमिल में पुगु-कतुमुसक-किन्जुल आदि नामों से पुकारते है।
➡ पलाश के औषधीय गुण : 
  1. दूध के साथ प्रतिदिन एक Palaash(पलाश) पुष्प पीसकर दूध में मिला के गर्भवती माता को पिलायें-इससे बल-वीर्यवान संतान की प्राप्ति होती है।
  2. यदि अंडकोष बढ़ गया हो तो पलाश की छाल का 6 ग्राम चूर्ण पानी के साथ निगल लीजिये।
  3. नारी को गर्भ धारण करते ही अगर गाय के दूध में पलाश के कोमल पत्ते पीस कर पिलाते रहिये तो शक्तिशाली और पहलवान बालक पैदा होगा।
  4. यदि इसी पलाश के बीजों को मात्र लेप करने से नारियां अनचाहे गर्भ से बच सकती हैं।
  5. पेशाब में जलन हो रही हो या पेशाब रुक रुक कर हो रहा हो तो पलाश के फूलों का एक चम्मच रस निचोड़ कर दिन में बस 3 बार पी लीजिये।
  6. बवासीर के मरीजों को पलाश के पत्तों का साग ताजे दही के साथ खाना चाहिए लेकिन साग में घी ज्यादा चाहिए।
  7. बुखार में शरीर बहुत तेज दाहक रहा हो तो पलाश के पत्तों का रस लगा लीजिये शरीर पर 15 मिनट में सारी जलन ख़त्म हो जाती है।
  8. जो घाव भर ही न रहा हो उस पर पलाश की गोंद का बारीक चूर्ण छिड़क लीजिये फिर देखिये।
  9. फीलपांव या हाथीपाँव में पलाश की जड़ के रस में सरसों का तेल मिला कर रख लीजिये बराबर मात्रा में और फिर सुबह शाम 2-2 चम्मच पीजिये।
  10. नेत्रों की ज्योति बढानी है तो पलाश के फूलों का रस निकाल कर उसमें शहद मिला लीजिये और आँखों में काजल की तरह लगाकर सोया कीजिए- अगर रात में दिखाई न देता हो तो पलाश की जड़ का अर्क आँखों में लगाइए।
  1. नपुंसकता की चिकित्सा के लिए भी इसके बीज काम आते हैं अन्य दवाओं में मिला के इसका प्रयोग होता है।
  2. शरीर में अन्दर कहीं गांठ उभर आयी हो तो इसके पत्तों को गर्म करके बांधिए या उनकी चटनी पीस कर गरम करके उस स्थान पर लेप कीजिए।
  3. इसके बीजों को नीबू के रस में पीस कर लगाने से दाद खाज खुजली में आराम मिलता है।
  4. इसी पलाश से एक ऐसा रसायन भी बनाया जाता है जिसके अगर खाया जाए तो बुढापा और रोग आस-पास नहीं आ सकते।
  5. इसके पत्तों से बनी पत्तलों पर भोजन करने से चाँदी के पात्र में किये गये भोजन के समान लाभ प्राप्त होते हैं पहले लोग शादी ब्याह और अन्य संस्कार में पत्तल और दोने पलाश (ढाक) का ही करते थे और आज की अपेक्षा जादा स्वस्थ थे।

इसका गोंद हड्डियों को मजबूत बनाता है पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।

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