* दांतों में कीड़ा लग जाने पर रात्रि को दांत में हींग
दबाकर सोएँ। कीड़े खुद-ब-खुद निकल जाएंगे।
* यदि शरीर के किसी हिस्से में कांटा चुभ
गया हो तो उस स्थान पर हींग का घोल भर दें। कुछ
समय में कांटा स्वतः निकल आएगा।
* हींग में रोग-प्रतिरोधक क्षमता होती है। दाद,
खाज, खुजली व अन्य चर्म रोगों में इसको पानी में
घिसकर उन स्थानों पर लगाने से लाभ होता है।
* हींग का लेप बवासीर, तिल्ली में लाभप्रद है।
* कब्जियत की शिकायत होने पर हींग के चूर्ण में
थोड़ा सा मीठा सोड़ा मिलाकर रात्रि को फांक लें, सबेरे
शौच साफ होगा।
* पेट के दर्द, अफारे, ऐंठन आदि में अजवाइन और
नमक के साथ हींग का सेवन करें तो लाभ होगा।
* पेट में कीड़े हो जाने पर हींग को पानी में घोलकर
एनिमा लेने से पेट के कीड़े शीघ्र निकल आते हैं।
* जख्म यदि कुछ समय तक खुला रहे तो उसमें छोटे-
छोटे रोगाणु पनप जाते हैं। जख्म पर हींग का चूर्ण
डालने से रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।
* प्रतिदिन के भोजन में दाल, कढ़ी व कुछ
सब्जियों में हींग का उपयोग करने से भोजन को पचाने
में सहायक होती है।
* मासिक धर्म के दौरान होने वाली परेशानियां जैसे
पेट में दर्द और मरोड़ या अनियमित मासिक धर्म में
हींग का सेवन करने से फायदे होते हैं। यह
औषधि कैंडिडा संक्रमण और ल्यूकोरहोइया से
भी छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होता है।
* सूखी खांसी, अस्थमा, काली खांसी के लिए हींग
और अदरक में शहद मिलाकर लेने से काफी आराम
मिलता है।
* हींग की मदद से शरीर में ज्यादा इन्सुलिन बनता है
और ब्लड शुगर का स्तर नीचे गिरता है। ब्लड शुगर
के स्तर को घटाने के लिए हींग में पका कड़वा कद्दू
खाना चाहिए।
* हींग में कोउमारिन होता है जो खून को पतला करने
में मदद करता है और इसे जमने से रोकता है। हींग
बढ़े हुए ट्राइग्लीसेराइड और कोलेस्ट्रोल को कम
करता है और उच्च रक्तचाप को भी घटाता है।
* यह औषधि विचार शक्ति को बढ़ाती है और इसलिए
उन्माद, ऐंठन और दिमाग में खून की कमी से
बेहोशी जैसे लक्षण से बचने के लिए भी हींग खाने
की सलाह दी जाती है।
* अफीम के असर को कम करने में हींग मदद
करता है। इसलिए इसे विषहरण
औषधि भी कहा जाता है।
* शोध के अनुसार हींग में वह शक्ति होती है
जो कर्क (कैंसर) रोग को बढ़ावा देने वाले सेल
को पनपने से रोकता है :
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