Wednesday, March 4, 2015

IMPORTANT TIPS

90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं.....!

* पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए।


अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेंगे ।

* 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन


के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।
* 80 रोग चाय पीने से होते हैं ।

* ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ीआंत सिकुड़

जाती है।

* भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द

हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।

* शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल

पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।

* गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम

हो जाती है और

शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से

आँखें कमजोर हो जाती हैं।

* खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में

पीड़ा होती है।

* खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़

की हड्डी को हानि होती है।

* भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप

(ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।

* जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।

* मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।

* पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और

क्षय(टीबी) होने का डर रहता है।

* चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध

हो जाता है मलेरिया नहीं होता है।

* तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।

* हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस,

तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त

आटा, छिलकेयुक्त अनाज औशधियां हैं।

* भोजन के पश्चात् गुड़ या सौंफ खाने से पाचन

अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।

* मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर

होती है।

* जल सदैव ताजा(चापाकल, कुएं आदि का)

पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और

अनेक रोगों के कारण होते हैं।

* नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के

रोग) तथा हैजा से बचाता है।


* फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त

जल नहीं पीना चाहिए।

* भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए।

उसके पश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12

घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।।

* मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोशकता 100%

कांसे के बर्तन में 97% पीतल के बर्तन में 93%

अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13%

ही बचते हैं।

* गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार,

बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक

पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए।

* खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेश्ठ होता है उसके

बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर

के समान होता है।

* सरसों, तिल,मूंगफली या नारियल का तेल

ही खाना चाहिए। देशी घी ही खाना चाहिए ।

रिफाइंड तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर

होता है।

* पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से

आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक

हो जाती है।

* खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।

* चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20

मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है।

* मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी(कच्ची)

चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर

होता है।

* बर्तन मिटटी के ही परयोग करन चाहिए।

* टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन

करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे।

(आँखों के रोग में दातून नहीं करना)



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