हमारे शरीर में अनेकों प्रकार
की ग्रंथियां होती है जो शरीर
को अलग-अलग
प्रकार से पोषण देने तथा शरीर के अवशिष्ट
पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं
जिससे शरीर का संतुलन बना रहता है।
ऐसा ही एक ग्रंथी है पेन क्रियाज इस
ग्रंथी का कार्य है इंसुलिन बनाना,
यही इंसुलिन शरीर के धमनीयों के
द्वारा रक्त में पहुंच कर रक्त में मौजूद शुगर
की मात्रा को नियंत्रित करता है।
कभी-कभी शरीर की पेनक्रियाज ग्रंथी किस
कारण अपना काम करना बंद कर देती है तब
इंसुलिन बनना बंद हो जाता है फिर हम जो भोजन करते हैं उसमें शरीर की आवश्यकता से अधिक शक्कर की मात्रा होने पर हमारे रक्त कणों में मिल
जाती है और खुन में शक्कर की मात्रा अधिक
होने लगती है इसी अवस्था को डायबिटिज
अथवा शुगर कहा जाता है।
भोजन के रूप में ग्रहण किया गया कार्बोहाइड्रेट शरीर
की रासायनिक क्रयाओं से गुजरते हुए ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाता है फिर रक्त वाहिनी कोशिकाओं के माध्यम से रक्त में मिल जाता है, इस ग्लुकोज को शरीर की अनेकों कोशिकाएं ग्रहण करती हैं
परंतु पेनक्रियाज में इंसुलिन न बनने के कारण शरीर
में अधिक मात्रा में ग्लुकोज इक्कट्ठा होने लगता है जिसे अन्य कोशिकाएं ग्रहण करने लगती हैं फल स्वरूप किडनी, लिवर, आँख, हृदय इत्यादि पर बुरा असर पड़ता है।
मधुमेह-
जब शरीर में अत्यधिक मात्रा में शक्कर इकक्ट्ठा होने लगता है तब वह शुगर पेशाब के माध्यम से बाहर निकलने लगता है तथा शरीर मे कमजोरी आने लगती है इसी अवस्था को मधुमेह कहा जाता है।
डायबिटिज से ग्रसित रोगीयों की संख्या भारत में
करीब 5 करोड़ 70 लाख के लगभग है इस प्रकार से यह रोग भारत की प्रमुख समस्या बनती जा रही है। आज भारत में डायबिटिज के कारण करोड़ों लोग
डायबिटिज के कारण हार्ट अटैक, किडनी फेलियर, पैरालायसिस, मानसिक तनाव, अनिद्रा, लिवर डेमेज, इत्यादि समस्याओं के शिकार होते जा रहे है। वहीं डायबिटिज से ग्रसित रोगियों का परहेज के कारण हाल-बेहाल है, शक्कर, गुड़, मिठाई, चावल,आलु,
जैसे अनेकों मीठे खाद्य सामग्रीयां उनके लिए खतरे से खाली नही। यदि वास्तव में देखा जाए तो डायबिटिज से ग्रसित रोगीयों का पुरा जीवन निरस और बेकार
हो जाता है।
डायबिटिज के कारण-
डायबिटिज होने के अनेकों कारण हैं जैसे-
मानसिक तनाव, अत्यधिक चिंता, लोभ, मोह,
क्रोध तथा शरीरिक श्रम में कमी इत्यादि।
डायबिटिज की बिमारी यदि एक बार
किसी को लग जाए तो फिर उससे उत्पन्न होने
वाले वंश को भी डायबिटिज का खतरा रहता है।
की ग्रंथियां होती है जो शरीर
को अलग-अलग
प्रकार से पोषण देने तथा शरीर के अवशिष्ट
पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं
जिससे शरीर का संतुलन बना रहता है।
ऐसा ही एक ग्रंथी है पेन क्रियाज इस
ग्रंथी का कार्य है इंसुलिन बनाना,
यही इंसुलिन शरीर के धमनीयों के
द्वारा रक्त में पहुंच कर रक्त में मौजूद शुगर
की मात्रा को नियंत्रित करता है।
कभी-कभी शरीर की पेनक्रियाज ग्रंथी किस
कारण अपना काम करना बंद कर देती है तब
इंसुलिन बनना बंद हो जाता है फिर हम जो भोजन करते हैं उसमें शरीर की आवश्यकता से अधिक शक्कर की मात्रा होने पर हमारे रक्त कणों में मिल
जाती है और खुन में शक्कर की मात्रा अधिक
होने लगती है इसी अवस्था को डायबिटिज
अथवा शुगर कहा जाता है।
भोजन के रूप में ग्रहण किया गया कार्बोहाइड्रेट शरीर
की रासायनिक क्रयाओं से गुजरते हुए ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाता है फिर रक्त वाहिनी कोशिकाओं के माध्यम से रक्त में मिल जाता है, इस ग्लुकोज को शरीर की अनेकों कोशिकाएं ग्रहण करती हैं
परंतु पेनक्रियाज में इंसुलिन न बनने के कारण शरीर
में अधिक मात्रा में ग्लुकोज इक्कट्ठा होने लगता है जिसे अन्य कोशिकाएं ग्रहण करने लगती हैं फल स्वरूप किडनी, लिवर, आँख, हृदय इत्यादि पर बुरा असर पड़ता है।
मधुमेह-
जब शरीर में अत्यधिक मात्रा में शक्कर इकक्ट्ठा होने लगता है तब वह शुगर पेशाब के माध्यम से बाहर निकलने लगता है तथा शरीर मे कमजोरी आने लगती है इसी अवस्था को मधुमेह कहा जाता है।
डायबिटिज से ग्रसित रोगीयों की संख्या भारत में
करीब 5 करोड़ 70 लाख के लगभग है इस प्रकार से यह रोग भारत की प्रमुख समस्या बनती जा रही है। आज भारत में डायबिटिज के कारण करोड़ों लोग
डायबिटिज के कारण हार्ट अटैक, किडनी फेलियर, पैरालायसिस, मानसिक तनाव, अनिद्रा, लिवर डेमेज, इत्यादि समस्याओं के शिकार होते जा रहे है। वहीं डायबिटिज से ग्रसित रोगियों का परहेज के कारण हाल-बेहाल है, शक्कर, गुड़, मिठाई, चावल,आलु,
जैसे अनेकों मीठे खाद्य सामग्रीयां उनके लिए खतरे से खाली नही। यदि वास्तव में देखा जाए तो डायबिटिज से ग्रसित रोगीयों का पुरा जीवन निरस और बेकार
हो जाता है।
डायबिटिज के कारण-
डायबिटिज होने के अनेकों कारण हैं जैसे-
मानसिक तनाव, अत्यधिक चिंता, लोभ, मोह,
क्रोध तथा शरीरिक श्रम में कमी इत्यादि।
डायबिटिज की बिमारी यदि एक बार
किसी को लग जाए तो फिर उससे उत्पन्न होने
वाले वंश को भी डायबिटिज का खतरा रहता है।
आयुर्वेद में डायबिटिज का इलाज-
1. मेथी 100 ग्राम, तेजपत्र 100 ग्राम, जामुन
गुठली 150 ग्राम, तथा बेलपत्र 250 ग्राम
सबको इकट्ठा कर कुटपीस कर चुर्ण बनालें फिर
एक-एक चम्मच सुबह शाम खाली पेट सेवन करें
तो डायबिटिज समाप्त हो जाता है।
2. बेलपत्र 25 ग्राम, तेजपत्र 25 ग्राम,
निमपत्र 50 ग्राम, करेला बीज 100 ग्राम,
जामुन गुठली 150 ग्राम तथा गुड़मार
की पत्ती 200 ग्राम सभी सामग्रीयों को मिला कर
कुटपीस कर चूर्ण बनालें फिर एक-एक चम्मच चुर्ण
को सुबह शाम पानी के साथ खाली पेट सेवन करें।
3. गुड़मार पत्ती 200 ग्राम, जामुन गुठली 100 ग्राम, सोंठ 100 ग्राम सबको मिलाकर बारीक चुर्ण बना लें फिर घीक्वार के रस की सात भावना दें
तत्पश्चात गोली बनाकर छाया में सुखालें इस प्रकार
बनी गोली को दिन में तीन बार दो-दो गोली सेवन करें।
4. सदाबहार की पत्ती 5 पीस, तुलसी पत्र 10
पीस, बेलपत्र 3 पीस तथा गुड़मार
पत्ती 3 पीस सबको मिलाकर पानी के साथ
पीस कर सुबह शाम खाली पेट सेवन करें।
5. अमेरिका मे पाया जाने वाला स्टीविया नामक पौधे को डायबिटिज के इलाज में कारगर पाया गया है। इस्टिविया की पत्ती की मिठास गुड़, शक्कर तथा शहद से तीन सौ गुना अधिक होता है इसके बावजूद भी यह डायबिटिज को नही बढ़ाता बल्कि डायबिटिज के लेबल को शरीर से आश्चर्य जनक ढंग से कम करता है तथा डायबिटिज को जड़ से भी समाप्त करने की क्षमता भी रखता है।
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