आयुर्वेदिक तरीके से कैसे बढाएं हाइट
आज दुनिया में ऐसे कितने ही लोग हैं, जिनकी हाइट कम है, जिनके शरीर में ठीक से पोषण नहीं पहुंचता और उनका हार्मोन ठीक प्रकार से विकसित नहीं हुआ होता है। अगर शरीर का हार्मोन विकसित नहीं हुआ है तो, आपका शरीर कभी भी ठीक से फल-फूल नहीं पाएगा। आज हम आपको हाइट बढाने और कर्वी फिगर पाने का एक असरदार आयुर्वेदिक तरीका बताएंगे।
आज दुनिया में ऐसे कितने ही लोग हैं, जिनकी हाइट कम है, जिनके शरीर में ठीक से पोषण नहीं पहुंचता और उनका हार्मोन ठीक प्रकार से विकसित नहीं हुआ होता है। अगर शरीर का हार्मोन विकसित नहीं हुआ है तो, आपका शरीर कभी भी ठीक से फल-फूल नहीं पाएगा। आज हम आपको हाइट बढाने और कर्वी फिगर पाने का एक असरदार आयुर्वेदिक तरीका बताएंगे।
सामग्री-
अश्वगंधा की जड़
चीनी
दूध
विधि-
थोड़ी सी मात्रा में अश्वगंधा की साफ जडे़ लें
उसका पाउडर बना लें
फिर उसमें पाउर वाली चीनी ठीक उतनी ही मात्रा में मिलाएं जितनी मात्रा मे अश्वगंधा मिलाई गई हो अब इस मिश्रण को अच्छे से मिक्स कर के किसी खाली शीशी में भर कर रख लें।
उपचार की विधि-
इस मिश्रण का 2 चम्मच लें और उसे 1 गिलास दूध में मिक्स कर के रात में सोने से पहले पियें ऐसा 45 दिनों तक रोज करें, ऐसा करने से आपका शरीर सुडौल भी बनेगा। इस उपचार से आपको कमजोरी, सिरदर्द और कमरदर्द से राहत मिलेगी सावधानियां- वे लोग जिनका शरीर गर्म रहा है, उन्हें इसे लेने से पहले डॉक्टर से पूछना चाहिये इसे कम से कम 45 दिनों तक लें। इस मिश्रण का सेवन करते समय फास्ट फूड या जंक फूड का सेवन कम से कम करें। इस उपचार के लिये गाय का दूध ज्यादा अच्छा रहता है।
अश्वगंधा की जड़
चीनी
दूध
विधि-
थोड़ी सी मात्रा में अश्वगंधा की साफ जडे़ लें
उसका पाउडर बना लें
फिर उसमें पाउर वाली चीनी ठीक उतनी ही मात्रा में मिलाएं जितनी मात्रा मे अश्वगंधा मिलाई गई हो अब इस मिश्रण को अच्छे से मिक्स कर के किसी खाली शीशी में भर कर रख लें।
उपचार की विधि-
इस मिश्रण का 2 चम्मच लें और उसे 1 गिलास दूध में मिक्स कर के रात में सोने से पहले पियें ऐसा 45 दिनों तक रोज करें, ऐसा करने से आपका शरीर सुडौल भी बनेगा। इस उपचार से आपको कमजोरी, सिरदर्द और कमरदर्द से राहत मिलेगी सावधानियां- वे लोग जिनका शरीर गर्म रहा है, उन्हें इसे लेने से पहले डॉक्टर से पूछना चाहिये इसे कम से कम 45 दिनों तक लें। इस मिश्रण का सेवन करते समय फास्ट फूड या जंक फूड का सेवन कम से कम करें। इस उपचार के लिये गाय का दूध ज्यादा अच्छा रहता है।
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