रोजाना थोड़ा गर्म पानी पीएंगे तो इन रोगों के लिए दवा नहीं खानी पड़ेगी
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आयुर्वेद की विशेषता है कि इसमें सामान्य से सामान्य दिखने वाली चीजों के औषधीय गुणों को भी
पहचाना गया है। पानी की दुर्लभ औषधीय क्षमता ऋषि-मुनियों की सूक्ष्म दृष्टि से अछूती नहीं रही है। गर्म
पानी में भी अनेकों ऐसे औषधीय गुण हैं, जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे
हैं आयुर्वेद में बताए गए गर्म पानी के खास गुण व इसे पीने से होने वाले फायदों के बारे
में ....
पानी एक दवा है- पानी भी एक दवा है। यह कई रोगों को दूर करने का काम करता है। इसीलिए सुबह
खाली पेट गर्म पानी पीना शरीर के लिए लाभदायक होता है।
कैसे पीएं गर्म पानी- जब उबलते हुए पानी में झाग आना बंद हो जाए, पानी आधा बचे और साफ हो जाए
तो ऐसे पानी को आयुर्वेद की भाषा में उष्णेदक कहा जाता है। यह पानी आयुर्वेद के अनुसार शुद्ध माना
जाता है और इसे ठंडा करके या हल्का गुनगुना पीने से अनेक लाभ होते हैं।
उष्णेदक पानी पीने के लाभ
यह कफ से संबंधित अनेक बीमारियों का नाश करता है।
गैस्ट्रिक प्रॉब्लम वाले लोगों को ठंडे की जगह गर्म पानी पीना चाहिए।
खाने के बाद गुनगुना पानी पीने से मोटापा कम हो जाता है।
गर्म पानी पीने से भूख तेज लगती है।
खांसी, दमा व अन्य समस्याएं भी दूर होती हैं।
अपच, आफरा , सिरदर्द आदि बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
विशेष- पानी को उबालते हुए जब उसका चौथाई हिस्सा जल जाए और तीन भाग पानी बच जाए तो ऐसे
पानी को पीने से अधिक लाभ होता है। गर्म पानी हमारे शरीर के तीनों दोषों वात, पित्त व कफ का नाश
करता है। जिस पानी में ईंट के टुकड़े को आग में गर्म करके बुझाया गया हो, वह पानी पीने से कई
बीमारियां खत्म हो जाती हैं।
कब नहीं पीएं गर्म पानी- बुखार में, शरीर में जलन होने पर, चक्कर , दस्त आदि समस्याओं में गर्म पानी
वर्जित है। गर्मी के मौसम में गर्म पानी नहीं पीना चाहिए।
उबालकर ठंडा किए गए पानी को पीने से दूर होने वाले रोग- गैस्ट्रिक समस्या, बवासीर, क्षयरोग, पेट के
रोग, सूजन, भूख न लगना, जुकाम आदि समस्या दूर होती है।
उबला पानी पीने की उचित विधि- सुबह बिस्तर से उठते ही बिना मुंह धोए चार बड़े गिलास पानी पीना
चाहिए। अगर चार गिलास न पी पाएं तो कम से कम एक-दो गिलास तो जरूर पीएं। यदि सुबह पीए जाने
वाले पानी को रातभर तांबे के बर्तन में रखा जाए तो वह पेट के लिए बहुत लाभदायक होता है।
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आयुर्वेद की विशेषता है कि इसमें सामान्य से सामान्य दिखने वाली चीजों के औषधीय गुणों को भी
पहचाना गया है। पानी की दुर्लभ औषधीय क्षमता ऋषि-मुनियों की सूक्ष्म दृष्टि से अछूती नहीं रही है। गर्म
पानी में भी अनेकों ऐसे औषधीय गुण हैं, जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे
हैं आयुर्वेद में बताए गए गर्म पानी के खास गुण व इसे पीने से होने वाले फायदों के बारे
में ....
पानी एक दवा है- पानी भी एक दवा है। यह कई रोगों को दूर करने का काम करता है। इसीलिए सुबह
खाली पेट गर्म पानी पीना शरीर के लिए लाभदायक होता है।
कैसे पीएं गर्म पानी- जब उबलते हुए पानी में झाग आना बंद हो जाए, पानी आधा बचे और साफ हो जाए
तो ऐसे पानी को आयुर्वेद की भाषा में उष्णेदक कहा जाता है। यह पानी आयुर्वेद के अनुसार शुद्ध माना
जाता है और इसे ठंडा करके या हल्का गुनगुना पीने से अनेक लाभ होते हैं।
उष्णेदक पानी पीने के लाभ
यह कफ से संबंधित अनेक बीमारियों का नाश करता है।
गैस्ट्रिक प्रॉब्लम वाले लोगों को ठंडे की जगह गर्म पानी पीना चाहिए।
खाने के बाद गुनगुना पानी पीने से मोटापा कम हो जाता है।
गर्म पानी पीने से भूख तेज लगती है।
खांसी, दमा व अन्य समस्याएं भी दूर होती हैं।
अपच, आफरा , सिरदर्द आदि बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
विशेष- पानी को उबालते हुए जब उसका चौथाई हिस्सा जल जाए और तीन भाग पानी बच जाए तो ऐसे
पानी को पीने से अधिक लाभ होता है। गर्म पानी हमारे शरीर के तीनों दोषों वात, पित्त व कफ का नाश
करता है। जिस पानी में ईंट के टुकड़े को आग में गर्म करके बुझाया गया हो, वह पानी पीने से कई
बीमारियां खत्म हो जाती हैं।
कब नहीं पीएं गर्म पानी- बुखार में, शरीर में जलन होने पर, चक्कर , दस्त आदि समस्याओं में गर्म पानी
वर्जित है। गर्मी के मौसम में गर्म पानी नहीं पीना चाहिए।
उबालकर ठंडा किए गए पानी को पीने से दूर होने वाले रोग- गैस्ट्रिक समस्या, बवासीर, क्षयरोग, पेट के
रोग, सूजन, भूख न लगना, जुकाम आदि समस्या दूर होती है।
उबला पानी पीने की उचित विधि- सुबह बिस्तर से उठते ही बिना मुंह धोए चार बड़े गिलास पानी पीना
चाहिए। अगर चार गिलास न पी पाएं तो कम से कम एक-दो गिलास तो जरूर पीएं। यदि सुबह पीए जाने
वाले पानी को रातभर तांबे के बर्तन में रखा जाए तो वह पेट के लिए बहुत लाभदायक होता है।
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