Thursday, July 4, 2013

USES OF TRIFLA

त्रिफला : आयुर्वेद का अनमोल उपहारत्रिफला चूर्ण के
औषधि प्रयोग- नेत्र-प्रक्षलन : एक चम्मच
त्रिफला चूर्ण रातको एक कटोरी पानी में भिगोकर
रखें। सुबह कपड़े सेछानकर उस पानी से आंखें धो लें। यह
प्रयोगआंखों के लिए अत्यंत हितकर है। इससे आंखें
स्वच्छव दृष्टि सूक्ष्म होती है। आंखों की जलन,लालिमा आदि तकलीफें दूर होती हैं।-


कुल्ला करना : त्रिफला रात को पानी में भिगोकररखें।
सुबह मंजन करने के बाद यह पानी मुंह मेंभरकर रखें।
थोड़ी देर बाद निकाल दें। इससे दांत वमसूड़े
वृद्धावस्था तक मजबूत रहते हैं। इससे अरुचि,मुख
की दुर्गंध व मुंह के छाले नष्ट होते हैं।-


त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर पीने सेमोटापा कम होता है।

त्रिफला के काढ़े से घाव धोनेसे एलोपैथिक-
एंटिसेप्टिककी आवश्यकता नहीं रहती। घाव जल्दी भर
जाता है।-


गाय का घी व शहद के मिश्रण (घी अधिक
वशहद कम) के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन
आंखों केलिए वरदान स्वरूप है।- संयमित आहार-विहार के साथ इसका नियमितप्रयोग करने से मोतियाबिंद,
कांचबिंदु-दृष्टिदोषआदि नेत्र रोग होने
की संभावना नहीं होती।- 


मूत्र संबंधी सभी विकारों व
मधुमेह में यहफायदेमंद है। रात को गुनगुने पानी के
साथत्रिफला लेने से कब्ज नहीं रहती है।-


 मात्रा : 2 से 4
ग्राम चूर्ण दोपहर को भोजन केबाद अथवा रात को गुनगुने पानी के साथ लें।एक अध्ययन से पता चला है
कि त्रिफला का सेवनरेडियोधर्मिता से भी बचाव
करता है। प्रयोगों मेंदेखा गया है
कि त्रिफला की खुराकों सेगामा किरणों के रेडिएशन
के प्रभाव से होनेवाली अस्वस्थता के लक्षण भी नहीं पाए
जाते हैं।इसीलिए त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद का अनमोल उपहारकहा जाता है।


सावधानी : दुर्बल,
कृशव्यक्ति तथा गर्भवती स्त्री को एवं नए बुखार
मेंत्रिफला का सेवन नहीं करना चाहिए।
यदि दूधका सेवन करना हो तो दूध व त्रिफला के सेवन
केबीच 2 घंटे का अंतर रखें।

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